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मम्मी की ग़लतफ़हमी: डिस्लेक्सिया पढ़ने की बीमारी नहीं है?

डिस्लेक्सिया और इसके पढ़ाई-लिखाई पर असर के बारे में बातचीत दर्शाने वाली कार्टून 3D चित्रण।
यह जीवंत कार्टून-3D चित्र एक हल्के-फुल्के पल को कैद करता है, जहाँ एक माँ और बच्चा डिस्लेक्सिया के सामान्य गलतफहमियों पर चर्चा कर रहे हैं। ब्लॉग पोस्ट में जानें कि डिस्लेक्सिया केवल एक पढ़ने की समस्या नहीं है, बल्कि यह लेखन कौशल पर भी मुख्यतः असर डालता है!

क्या कभी आपके घर में भी किसी मेडिकल टर्म को लेकर बहस छिड़ी है? खासकर जब मां अपने पुराने अनुभवों के आधार पर कुछ कह दें और आप गूगल या डिक्शनरी लेकर उनका मिथक तोड़ दें! ऐसी ही एक मजेदार और जानकारी से भरपूर बातचीत का किस्सा आज हम आपके लिए लाए हैं – जिसमें एक बेटे ने अपनी मां को समझाने की कोशिश की कि डिस्लेक्सिया सिर्फ लिखने की नहीं, पढ़ने की भी बीमारी है।

समझिए, डिस्लेक्सिया है क्या बला?

हमारे यहां अक्सर मेडिकल शब्दों को लेकर बड़ी ग़लतफ़हमियां होती हैं। डिस्लेक्सिया (Dyslexia) को ज़्यादातर लोग सिर्फ "अक्षर उल्टा लिखने" की समस्या मान लेते हैं। जैसे घर की बड़ी-बूढ़ियां अक्सर कहते मिल जाएंगी, "अरे, गणेश की लिखाई कैसी गड़बड़ है, कहीं इसको वही डिस्लेक्सिया-विस्लेक्सिया तो नहीं?" लेकिन असल में, डिस्लेक्सिया एक न्यूरोलॉजिकल स्थिति है, जिसमें बच्चों या बड़ों को अक्षरों को पढ़ने, पहचानने, और शब्दों को सही समझने में दिक्कत आती है।

इस Reddit पोस्ट में एक बेटे ने बड़े ही मजेदार अंदाज में बताया कि कैसे उसकी मां 12-13 साल पहले की एक घटना को लेकर आज भी अड़ी हैं कि, "डिस्लेक्सिया सिर्फ लिखने की बीमारी है, पढ़ने की नहीं!" बेटा समझाता रहा – "मम्मी, डिक्शनरी में देख लो, ये पढ़ने और लिखने दोनों से जुड़ी समस्या है," लेकिन मां भी अपनी जगह मज़बूत – "जब तू छोटा था, उल्टा-सीधा लिखता था, तभी तो टीचर्स ने ये बोला था!"

मां-बेटे की नोकझोंक: ग़लतफ़हमी से हंसी तक

इस किस्से में हंसी तब आती है जब मां की ज़िद को देखकर बेटा खुद परेशान हो जाता है। जैसे हमारे घरों में अक्सर होता है, "मम्मी, ये मोबाइल में जो दिख रहा है, वो सही है!" और मम्मी का जवाब – "अरे, मैंने तो तेरे पापा से भी पहले रेडियो सुना है, मुझे मत सिखा!"

यहां भी Reddit पर एक कमेंट करने वाले ने चुटकी ली, "मां को तो फिर भी झूठा ही कहूंगा!" (यहां लायर और लैयर के स्पेलिंग को लेकर भी मज़ेदार बहस छिड़ गई थी)। खुद पोस्ट लिखने वाले ने हंसते हुए माना, "हां, मुझे स्पेलिंग की दिक्कत है, लेकिन मैं डिस्लेक्सिक नहीं हूं!"

एक और कमेंट में किसी ने लिखा, "शायद मां को डिस्ग्राफिया (Dysgraphia) के बारे में याद आ गया हो!" क्योंकि डिस्ग्राफिया मुख्य रूप से लिखने में दिक्कत से जुड़ा है, जबकि डिस्लेक्सिया पढ़ने और लिखने दोनों में।

डिस्लेक्सिया को लेकर आम ग़लतफ़हमियां

हमारे समाज में ऐसी ग़लतफ़हमियां आम हैं। अक्सर लोग सोचते हैं – अगर बच्चा उल्टा-सीधा लिखता है या अक्षरों की दिशा बदल देता है, तो उसे डिस्लेक्सिया है। जबकि असल में, छोटे बच्चों में अक्षर या नंबर उल्टा लिखना एक सामान्य विकास प्रक्रिया का हिस्सा है। अगर तीसरी कक्षा तक बच्चा यह आदत नहीं छोड़ता, तब जाकर जांच की ज़रूरत पड़ती है।

एक कमेंट में किसी ने बहुत बढ़िया लिखा, "डिस्लेक्सिया में दिमाग को लिखे हुए शब्दों को समझने में ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है, इसी वजह से पढ़ाई का काम बच्चों के लिए बेहद मुश्किल हो जाता है।"

किसी ने तो यहां तक बताया कि कुछ डिस्लेक्सिक लोग उल्टा (upside down) पढ़ने में ज्यादा सहज होते हैं! जैसे हमारे गांवों में बच्चे खाट पर लेटे-लेटे अखबार उल्टा पकड़कर पढ़ लेते हैं, वैसे ही। एक और कमेंट में बताया गया – कुछ लोगों के लिए रंगीन पृष्ठभूमि पर पढ़ना आसान हो जाता है।

पढ़ाई में दिक्कत = आलस्य नहीं!

हमारे यहां अक्सर बच्चों को पढ़ाई में दिक्कत आने पर 'आलसी', 'ध्यान नहीं देता', या 'हाथ की लिखाई खराब है' कहकर टाल दिया जाता है। लेकिन असल में ये दिमाग की एक खास प्रक्रिया से जुड़ी समस्या है, जिसके लिए समझदारी और सहयोग की ज़रूरत है।

Reddit पर एक और यूज़र ने लिखा, "मेरे दोस्त को डिस्लेक्सिया है, लेकिन उसका अपना तरीका है – वो रंगीन पन्नों पर या उल्टे तरीके से पढ़ना पसंद करता है।"

यह बात भी गौर करने लायक है कि डिस्लेक्सिया और डिस्ग्राफिया दो अलग-अलग स्थितियां हैं। एक यूज़र ने कहा, "मुझे पढ़ने में कोई दिक्कत नहीं, लेकिन जब लिखने की बारी आती है, तो दिमाग जैसे शॉर्ट सर्किट हो जाता है!"

निष्कर्ष: हंसी-मजाक और ज्ञान साथ-साथ

अंत में, Reddit पोस्ट की तरह हम भी यही कहेंगे – मां को आज भी शायद यकीन न हो, पर बेटे ने डिक्शनरी दिखाकर अपनी बात रख दी!

हमारे घरों में भी ऐसे मुद्दों पर मस्ती-मजाक चलते रहते हैं, पर ज़रूरी है कि हम सही जानकारी रखें। डिस्लेक्सिया कोई शर्म की बात नहीं, बल्कि समझदारी से बच्चों की मदद करने की ज़रूरत है।

क्या आपके घर में भी कभी ऐसी कोई ग़लतफ़हमी हुई है? या किसी मेडिकल टर्म को लेकर बहस छिड़ी हो? कमेंट में जरूर बताएं – आपकी कहानियां पढ़कर और भी मज़ा आएगा!


मूल रेडिट पोस्ट: Dyslexia isnt a reading disorder!