मुंबई के लग्ज़री होटल में हुआ बड़ा घोटाला: “ट्रस्ट मी, ब्रॉ!” और 5 लाख की चपत
होटल की नौकरी... सुनने में भले ही बड़ी चमक-दमक लगे, पर असलियत में यहां हर दिन कुछ नया ड्रामा चलता रहता है। कभी कोई वीआईपी मेहमान, कभी कोई बिगड़ैल सेलिब्रिटी, तो कभी ऐसे घपलेबाज़ मेहमान जिनकी कहानियाँ बाद में चाय के साथ किस्सों की तरह सुनाई जाती हैं। आज मैं आपको 2016-17 की ऐसी ही एक सच्ची घटना सुनाने जा रहा हूँ, जब मुंबई के एक लग्ज़री होटल में ‘भरोसा करो, भाई’ के नाम पर 5 लाख से ज़्यादा की ठगी हो गई!
होटल की दुनिया में ‘पटेल’ ब्रांड और वो खास रात
मुंबई का वो होटल, जहाँ मैं काम करता था, सिर्फ़ होटल ही नहीं था, बल्कि उसमें शानदार रेसिडेंसी सूट्स भी थे – यानी अमीर मेहमानों का आना-जाना लगा ही रहता था। स्टाफ हमेशा कम, काम हमेशा सर पर! ऐसे में एक दिन रात के समय रिसेप्शन पर एक सज्जन आए – नाम था, मिस्टर पटेल, भारतीय-अमेरिकी, हाथ में अमेरिकी पासपोर्ट, चेहरे पर सफ़ेद झूठ की मुस्कान।
उन्होंने पाँच रातों के लिए बुकिंग कराई थी। फॉर्मेलिटी के लिए मैंने क्रेडिट कार्ड माँगा, तो बोले – “ओह, मेरा कार्ड खो गया है, नया कार्ड मंगवा रहा हूँ, बस भरोसा कर लो।” अब होटल की दुनिया का पहला नियम – बिना पेमेंट, कोई चेक-इन नहीं! पर तभी मिस्टर पटेल ने अपना अगला तुरुप का पत्ता चलाया – “अरे, मैं तो खुद होटल्स की चेन का मालिक हूँ, एक RC होटल भी मेरा है। अपग्रेड मिल जाएगा क्या? ट्रस्ट मी, ब्रॉ!”
‘हीरो’ बनने की होड़, और होटल का डूबता खज़ाना
हमारे होटल में उस समय भीड़ इतनी थी कि मैनेजर भी खुद काउंटर पर खड़े थे। तभी गेस्ट रिलेशन मैनेजर (GRM) आईं – सोचा, आज तो ये ‘स्पेशल गेस्ट’ को खुश करके हीरो बन जाऊंगी। मिस्टर पटेल की बातों में आकर, उन्होंने मुझे चाबी काटने को कहा और खुद उन्हें कमरे तक ले गईं। मैंने अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए कागज़ात पर उनका साइन करवाया, पर खुद साइन नहीं किया (क्योंकि मामला गड़बड़ लग रहा था)।
बाद में, जब सब फुर्सत में आए, मैंने GRM से कहा – “आपने चेक-इन किया है, तो साइन कर दीजिए।” और मैंने पूरी बात अपनी डायरी में लिख दी।
जब ‘पटेल’ गायब हुए और होटल में मचा बवाल
अब असली मज़ा तो बाद में आया! मिस्टर पटेल ने अपनी बुकिंग 5 दिनों से बढ़ाकर लगभग 15 दिन तक कर दी। किसी को भी शक नहीं हुआ, क्योंकि ऊपर से सब ‘भरोसे’ की बात थी और ग्रैंड मैनेजर की सिफारिश। लेकिन जब बिल 5 लाख के पार पहुँच गया और कमरे में ताला खोलकर देखा तो... कमरा खाली, मेहमान गायब!
फ्रंट ऑफिस मैनेजर ने मुझे बुलाया और पूछा – “तुमने क्रेडिट कार्ड क्यों नहीं लिया?” मैंने सारा किस्सा सुनाया, GRM का साइन दिखाया, और मामला वहीं दब गया। मेरे ऊपर अंगुली उठाने वाले खुद चुप हो गए; असली गुनहगार का नाम किसी ने नहीं लिया। कहावत है ना – “ऊपर वाला जानता है, और रिसेप्शनिस्ट की डायरी!”
पाठक समुदाय की राय: “भाई, नियम तोड़ोगे तो भुगतो!”
इस कहानी पर ऑनलाइन एक पाठक ने बिल्कुल सही नसीहत दी – “होटल का पहला नियम – बिना पेमेंट के कोई अंदर नहीं आता, चाहे वो खुद को होटल का मालिक ही क्यों न बताए!”
एक और पाठक ने मज़ाकिया अंदाज़ में लिखा – “गेस्ट रिलेशन मैनेजर को क्या हो गया था? ऐसे तो कोई भी आकर कहेगा कि मैं अम्बानी का दोस्त हूँ, कमरा दे दो!” एक और साहब ने अमेरिका के होटल इंडस्ट्री की दिलचस्प बात बताई – “क्या आप जानते हैं, अमेरिका में आधे से ज़्यादा होटल पटेल सरनेम वाले लोगों के हैं? गूगल कीजिए ‘Patel Cartel’ – आप हैरान रह जाएंगे!”
OP (मूल लेखक) ने भी कमेंट में स्पष्ट किया – “मिस्टर पटेल ने सच में होटल इंडस्ट्री की बहुत बातें कीं, लेकिन फिर भी उनके हावभाव में गड़बड़ी दिख रही थी। असली पहचान तो पैसे से होती है, बातों से नहीं!”
सबक: ‘भरोसे’ से ज़्यादा ज़रूरी है सिस्टम!
इस कहानी से एक बात साफ़ है – जब सिस्टम और नियमों की अनदेखी होती है, तो चाहे कितनी भी बड़ी पोस्ट हो या अनुभव, नुकसान पूरे होटल को उठाना पड़ता है। भारत में भी, जैसे हर सरकारी दफ्तर में फाइल बिना साइन आगे नहीं बढ़ती, वैसे ही होटल में भी बिना पेमेंट के चाबी नहीं मिलनी चाहिए – चाहे सामने वाला कितने भी बड़े खानदान का क्यों न हो!
तो अगली बार अगर कोई ‘भरोसा करो, भाई’ कहता है, तो ज़रा सोचिए – कहीं आप भी मिस्टर पटेल का शिकार तो नहीं बन रहे?
आप क्या सोचते हैं?
क्या आपके साथ कभी ऐसा कोई वाकया हुआ है, या आपने अपने ऑफिस में ऐसे ‘मास्टरमाइंड’ देखे हैं? अपने अनुभव नीचे कमेंट में ज़रूर साझा कीजिए। और अगर आपको ये कहानी मज़ेदार लगी हो, तो शेयर करना न भूलें – कौन जाने, आपके किसी दोस्त को भी अगला ‘पटेल’ न मिल जाए!
नया साल मुबारक हो! होटल इंडस्ट्री में काम करने वालों को सलाम – और हाँ, अपनी डायरी हमेशा अपडेट रखते रहिए!
मूल रेडिट पोस्ट: Another scam story