मोबाइल ने बिगाड़ा होटल का चेक-इन! – जब ग्राहक की बातें खत्म ही नहीं हुईं
होटल में काम करना कोई बच्चों का खेल नहीं है। वहाँ रोज़ाना अलग-अलग स्वभाव के ग्राहक आते हैं, और हर दिन कुछ नया देखने-सुनने को मिलता है। लेकिन सोचिए, अगर कोई ग्राहक चेक-इन काउंटर पर आकर भी मोबाइल पर बिज़ी रहे, तो रिसेप्शनिस्ट का क्या हाल होता होगा? आज मैं आपको ऐसी ही एक मज़ेदार और थोड़ी अजीब घटना सुनाने जा रहा हूँ, जिसे सुनकर आप भी सोच में पड़ जाएंगे – आखिर मोबाइल की लत कितनी भारी पड़ सकती है!
मोबाइल और होटल – जब दो दुनियाएँ टकरा गईं
कहानी शुरू होती है एक होटल के रिसेप्शन काउंटर से, जहाँ हमेशा की तरह एक कर्मचारी (जिसे हम "अजय" कह सकते हैं) मेहमानों का स्वागत कर रहा था। अचानक एक महिला तेज़-तेज़ क़दमों से काउंटर पर आईं, लेकिन उनका ध्यान रिसेप्शनिस्ट की ओर नहीं था। वो किसी और भाषा में मोबाइल पर इतनी तल्लीन होकर बात कर रही थीं, मानो अगले पल दुनिया बदलने वाली हो!
अजय ने बड़ी विनम्रता से उनका स्वागत किया और आईडी मांगी। साहब, आईडी तो मिली, मगर उसके बाद महिला फिर मोबाइल में डूब गईं – रिसेप्शनिस्ट को जैसे हवा में छोड़ दिया गया हो। आमतौर पर अजय ऐसे में बीच-बीच में सवाल पूछकर काम चला लेते, लेकिन इस बार उनका सब्र जवाब दे गया। उन्होंने भी उसी अंदाज में पीठ घुमा ली और अपने दूसरे काम में लग गए।
"सर, कोई दिक्कत है?" – मोबाइल की दुनिया से रियलिटी चेक
कुछ मिनटों बाद महिला ने अचानक इंग्लिश में पूछा, "सर, कोई दिक्कत है?" अजय ने बिना कोई भाव दिए कहा, "मैम, आप तो अभी बात कर रही हैं।" महिला ने फौरन माफी मांगी और बोलीं, "बस दो मिनट में खत्म कर लूंगी।" लेकिन दो मिनट तो जैसे भारतीय रेल की टाइमिंग हो! दस मिनट बीत गए, मैडम कभी काउंटर के पास घूमतीं, कभी सोफे पर बैठ जातीं, मगर मोबाइल से चिपकी रहीं।
यह देखकर अजय के एक साथी की आँखों में भी सवाल था – "भैया, ये कब फुर्सत पाएंगी?" एक कमेंट में किसी ने मज़ाक में लिखा, "अगर मैं होता, तो politely बोल देता – हमारे यहाँ अब कोई रूम खाली नहीं है, YWCA में जाकर कोशिश करिए!" ये बात सुनकर आप भी मुस्कुरा उठेंगे, आखिर भारतीय होटल में ऐसी हिम्मत कौन दिखाए!
चेक-इन या 'कौन बनेगा करोड़पति'? – जब कार्ड भी धोखा दे गया
आखिरकार, महिला की मोबाइल कॉल खत्म हुई और उन्होंने पूरी तवज्जो दी। लेकिन किस्मत देखिए, चेक-इन शुरू होते ही उनका कार्ड सिक्योरिटी डिपॉज़िट के लिए बार-बार फेल होने लगा। उन्होंने कैश देने की कोशिश की, पर होटल की पॉलिसी थी – नकद स्वीकार नहीं। अब क्या? फिर से एक नई कॉल, इस बार अपने पति को। कुछ देर और बीता, तब कहीं जाकर पैसे का इंतजाम हुआ।
कुल मिलाकर, जो चेक-इन दो मिनट में निपट सकता था, उसने पूरे बीस मिनट ले लिए। जाते-जाते महिला ने सच्चे दिल से माफी मांगी और 20 डॉलर टिप भी थमा दी। अजय ने थोड़ी हिचकिचाहट के बाद टिप ले ली, लेकिन मन ही मन सोच रहे थे – "ये क्या तमाशा था भाई!"
क्या सीखा? – 'थोड़ा समय दें, बहुत कुछ आसान हो जाएगा!'
इस पूरी घटना से एक सीधी-सी बात निकलती है – जब आप किसी से आमने-सामने बात कर रहे हों, खासकर जब कोई आपकी मदद कर रहा हो, तो मोबाइल साइड में रख दें। क्या पता, आपकी दो मिनट की तवज्जो से सामने वाले का दिन बन सकता है! एक पाठक ने बढ़िया टिप्पणी की, "कम से कम महिला को अपनी गलती का एहसास तो हुआ। अगली बार शायद खुद ही सुधार लें – उम्मीद पर दुनिया कायम है।"
एक और पाठक ने शेयर किया, "मेरे साथ तो एक बार एक सज्जन ने पूरा चेक-इन मोबाइल पर बात करते हुए किया, न हैलो, न आई-कॉन्टेक्ट। अगले दिन वही साहब अपने VIP status न बताने की शिकायत लेकर आ गए!" ये तो रही किस्सा-कहानी, लेकिन सच्चाई यही है – आप जितना सम्मान दूसरों को देंगे, उतना ही लौटकर आपको मिलेगा।
मोबाइल – वरदान या अभिशाप?
आजकल मोबाइल हमारी ज़िंदगी का हिस्सा बन चुका है, लेकिन क्या हर जगह इसका इस्तेमाल जरूरी है? भारतीय संस्कृति में हमेशा से सामने वाले का आदर-सत्कार सर्वोपरि रहा है। चाहे होटल हो या कोई दफ्तर, चाय की दुकान हो या सरकारी दफ्तर – थोड़ी देर मोबाइल को जेब में रखिए, और देखिए कैसे आपकी छोटी-सी मुस्कान से सामने वाला भी खुश हो जाता है।
अंत में, रिसेप्शनिस्ट अजय की तरह अपने आत्म-सम्मान के साथ खड़े रहना भी जरूरी है। दूसरों को भी एहसास कराना चाहिए कि छोटी-छोटी बातों से ही समाज में शिष्टाचार बना रहता है।
निष्कर्ष – आपका क्या अनुभव है?
तो दोस्तों, आपके साथ कभी ऐसी घटना हुई है? क्या कभी किसी मोबाइल-प्रेमी ने आपको भी परेशान किया है, या खुद आप भी ऐसी गलती कर चुके हैं? कमेंट में जरूर लिखिए, ताकि हम सब मिलकर इन मजेदार और कभी-कभी परेशान कर देने वाली कहानियों का आनंद ले सकें!
साथ ही अगली बार जब होटल या किसी कार्यालय में जाएं, तो मोबाइल को थोड़ी देर के लिए अलविदा कह दीजिए – जो सामने है, वही सबसे जरूरी है!
मूल रेडिट पोस्ट: Put the phone away