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मुझे मर्द से बात करनी है!' - जब ग्राहक की सोच पर पड़ा पानी

एक दुकान में महिला, पुरुष कर्मचारी से बात करने की कोशिश में, महिला स्टाफ के बीच निराशा व्यक्त कर रही है।
इस सिनेमाई चित्रण में, एक महिला एक भीड़-भाड़ वाली दुकान में खड़ी है, उसके चेहरे पर दृढ़ता और निराशा का मिश्रण है जबकि वह एक पुरुष से बात करने की मांग कर रही है। यह दृश्य उन अनुभवों को दर्शाता है जो कई लोग लिंग विविधता वाले कार्यस्थलों में सामना करते हैं, और यह लिंग भूमिकाओं और ग्राहक की अपेक्षाओं के बारे में चल रही बातचीत को प्रतिबिंबित करता है।

हमारे देश में अक्सर सुना जाता है — “बेटा, ये काम तो मर्दों का है”, “अरे, ये तो लड़कियों से नहीं होगा”। लेकिन जब असलियत में महिलाएं अपने हुनर से लोगों की बोलती बंद कर देती हैं, तो मज़ा ही कुछ और है। आज की कहानी भी कुछ ऐसी ही है, जिसमें एक दुकान पर आए घमंडी ग्राहक को महिलाओं ने बिना कुछ कहे, बढ़िया सबक सिखा दिया।

हर रोज़ का नज़ारा: "मुझे मर्द से बात करनी है"

सोचिए, आप किसी दुकान में काम कर रहे हैं, जहाँ ज़्यादातर महिलाएं हैं। अचानक एक ग्राहक आता है और बिना वजह कहता है, "मुझे मर्द से बात करनी है!" अब दुकान में एकमात्र पुरुष कर्मचारी स्टोररूम में व्यस्त है, कुछ सामान निकाल रहा है। उसे बुलाने में 10-15 मिनट लग जाते हैं। ग्राहक बेचारा इंतजार करता रहता है, सोचता है अब कोई 'मर्दाना एक्सपर्ट' आएगा और उसकी समस्या हल कर देगा।

जैसे ही वो पुरुष कर्मचारी (जिसे कहानी के अनुसार, OP का बॉयफ्रेंड कह सकते हैं) दुकान में पहुंचता है, ग्राहक पूरी उम्मीद के साथ सवाल करता है — "भैया, मुझे इस पाइप की जरूरत है, ताकि मैं xyz काम कर सकूं। आप मदद कर सकते हैं?" अब बॉयफ्रेंड मुस्कुराते हुए उसी महिला कर्मचारी की तरफ इशारा करता है और कहता है, "मुझे नहीं पता, आप इनसे पूछ लीजिए", और चुपचाप चला जाता है।

दरअसल, बॉयफ्रेंड को सब पता होता है, लेकिन ग्राहक को उसकी सोच का ज़बरदस्त जवाब मिल जाता है — बिना एक शब्द कहे!

ऐसा सिर्फ बाहर नहीं, हमारे यहाँ भी होता है!

अगर आपको लग रहा है कि ऐसा सिर्फ विदेशों में होता है, तो ज़रा अपने आसपास नज़र डालिए। भारत में भी दफ्तरों, दुकानों, बैंक या यहां तक कि सरकारी दफ्तरों में भी अक्सर महिलाएं इसी भेदभाव का सामना करती हैं। किसी महिला कर्मचारी से जब ग्राहक संतुष्ट नहीं होता, तो सीधे-सीधे कह देता है, "कोई सीनियर बुलाइए" या "कोई मर्द बुलाइए" — मानो मर्द ही ज्ञान का भंडार हों!

एक Reddit यूज़र ने कमेंट किया — "मुझे TV डिपार्टमेंट में मैनेजर रहते हुए कई बार ऐसा सुनना पड़ा। मुझे अपनी महिला कर्मचारी को बार-बार ऐसे ग्राहकों से जूझते देखना पड़ता था।" एक और कमेंट में किसी ने लिखा कि उनके पास जब ग्राहक आया और बोला "मुझे मर्द चाहिए", तो उन्होंने बस महिला स्टाफ से जवाब लेकर उसे दोहराया। ग्राहक का चेहरा देखने लायक था!

यह हमारे समाज की उसी सोच की झलक है, जहां 'मर्द' को ही एक्सपर्ट मान लिया जाता है, चाहे असलियत कुछ भी हो।

महिलाओं की चुप्पी में छुपा जवाब

सबसे दिलचस्प बात ये है कि ऐसे ग्राहकों को सबक देने के लिए महिलाओं को ज़्यादा कुछ बोलने की ज़रूरत नहीं पड़ती। बस थोड़ी सी 'malicious compliance' — यानी ग्राहक की मांग मानकर भी उसे अपने ही जाल में फँसा देना!

कई बार पुरुष कर्मचारी खुद भी इस खेल में मज़ा लेते हैं। एक Reddit कमेंट में किसी ने लिखा, "अगर कोई मेरी महिला सहकर्मी को नजरअंदाज करता है, तो मैं सीधे कहता हूँ — ‘भाई, मैं तो बस भारी सामान उठाता हूँ, असली ज्ञान तो इन्हीं के पास है।’" एक और मज़ेदार किस्सा शेयर हुआ — "हमारी दुकान में जब कोई ग्राहक मर्द से बात करने की जिद करता, तो सभी पुरुष स्टाफ उसे फिर से महिला स्टाफ के पास भेज देते।"

कुछ दुकानों में महिलाएं ही सुपरवाइज़र होती हैं, लेकिन ग्राहक फिर भी मर्द को ही 'बॉस' मान बैठते हैं। ऐसे में जब असली बॉस महिला निकल आती हैं, तो ग्राहक का मुँह देखना बनता है।

समाज को कब आएगी अक्ल?

ऐसी घटनाएं सिर्फ हँसने-हँसाने के लिए नहीं, बल्कि सोचने के लिए भी मजबूर करती हैं। आखिर कब तक हम महिलाओं को कम आँकते रहेंगे? आज भारत में लाखों महिलाएं इंजीनियरिंग, बैंकिंग, टेक्नोलॉजी, निर्माण, खुदरा बिक्री, और न जाने कितने क्षेत्रों में पुरुषों से ज्यादा दक्षता से काम कर रही हैं।

एक कमेंट में एक महिला ने लिखा — "मैं कंस्ट्रक्शन फील्ड में काम करती हूँ, जब कोई पुरुष सहयोगी इस तरह मेरी इज्जत करता है, तो सच में दिल खुश हो जाता है।"

ऐसी कहानियाँ हमें यह समझाती हैं कि असली काबिलियत लिंग से नहीं, हुनर, अनुभव और मेहनत से आती है। और हाँ, ऐसे "मुझे मर्द से बात करनी है" वाले ग्राहकों को तो हर दुकान पर थोड़ा इंतज़ार ज़रूर करवाना चाहिए — ताकि अगली बार वे सोच-समझकर बोलें!

निष्कर्ष: आपकी राय क्या है?

तो दोस्तों, अगली बार जब कोई महिला कर्मचारी आपको मदद करे, तो उसकी काबिलियत पर शक मत कीजिए। हो सकता है, वही आपको सबसे सटीक जवाब दे दे! क्या आपके साथ कभी ऐसा कोई अनुभव हुआ है? क्या आपके ऑफिस या दुकान में भी कोई 'मर्द एक्सपर्ट' की डिमांड करता है? अपने दिलचस्प किस्से कमेंट में ज़रूर साझा करें — कौन जाने, किसकी कहानी अगली बार सुर्खियों में आ जाए!

समाज बदल रहा है, पर बदलाव में हमारा और आपका योगदान सबसे अहम है। अगली बार जब कोई बोले, "मुझे मर्द से बात करनी है", तो मुस्कुरा के कहिए — "असल एक्सपर्ट तो यहीं हैं, ज़रा इनसे बात कर लीजिए!"


मूल रेडिट पोस्ट: ''I want to talk to a man.''