बहन को हल्का जुकाम हुआ, बॉयफ्रेंड ने बुला ली एंबुलेंस – ये कैसी ‘केविनगिरी’!
अगर आपके घर में किसी को हल्का सा जुकाम या बुखार आ जाए, तो आपके परिवार का क्या रिएक्शन होता है? ज़्यादातर भारतीय घरों में तो दादी-नानी का काढ़ा, गर्म पानी और आराम की सलाह मिलती है। लेकिन सोचिए कि अगर कोई सीधा एंबुलेंस बुला ले – वो भी सिर्फ मामूली फ्लू के लिए! हैरान हो गए न? आज मैं आपके लिए लेकर आया हूँ एक ऐसी ही अतरंगी कहानी, जिसमें बहन के फ्लू ने बॉयफ्रेंड की ‘केविनगिरी’ का ऐसा नमूना दिखाया कि पूरा घर चौंक गया।
जब छोटी सी बीमारी बन गई ‘इमरजेंसी’!
कहानी का मुख्य पात्र है WW (नाम थोड़ा गुप्त रखा गया है, जैसे कि हमारे यहाँ ‘शर्माजी का बेटा’!), जिसे उसके अजीबो-गरीब फैसलों की वजह से सब ‘केविन’ कहते हैं। हुआ यूँ कि OP की बहन को हल्का सा फ्लू हुआ – न कोई तेज़ बुखार, न उल्टी-दस्त, बस सिरदर्द, हल्की कमजोरी और बिस्तर पर आराम। बहन दिनभर मोबाइल पर दोस्तों और WW से चैट कर रही थी, यानी कोई गंभीर हालत नहीं थी।
अचानक WW ने सबको चौंका दिया – उसने मैसेज किया कि उसने बहन के लिए एंबुलेंस बुला ली है! घरवाले पहले तो अवाक रह गए, फिर भाग-दौड़ में लगे कि कैसे इस एंबुलेंस को रोका जाए। लेकिन अफसोस, बात हाथ से निकल चुकी थी और कुछ ही देर में पैरामेडिक्स घर पहुँच गए।
एंबुलेंस, बिल और केविनगिरी: कम्युनिटी की राय
अब सोचिए, भारत में भी अगर कोई ऐसे मामूली फ्लू के लिए एंबुलेंस बुला ले, तो क्या होगा? यहाँ तो कई बार लोग गंभीर हालत में भी खुद ही रिक्शा या ऑटो से अस्पताल पहुँच जाते हैं। Reddit कम्युनिटी में इसी बात पर मज़ेदार चर्चा छिड़ गई। एक यूज़र ने चुटकी लेते हुए लिखा – “अब केविन को एंबुलेंस का बिल भी भरना चाहिए!” अमेरिका में तो एंबुलेंस का एक फेरा कई बार हजारों डॉलर का हो सकता है, चाहे मरीज़ को अस्पताल ले जाएं या ना ले जाएं।
एक और यूज़र ने अनुभव साझा किया कि उनकी माँ का निधन घर पर हुआ, फिर भी सिर्फ EMT बुलाने पर ही $500 का बिल आया, जबकि कोई इलाज या ले जाने की ज़रूरत नहीं पड़ी थी। भारत में भले ही सरकारी एंबुलेंस फ्री या नाममात्र की फीस पर मिल जाए, लेकिन वहाँ मामला अलग है – इसलिए कम्युनिटी यही उम्मीद कर रही थी कि WW को कम से कम बिल का झटका तो लगेगा।
बीमारी कौन सी थी – फ्लू या ‘फूड पॉइज़निंग’?
कहानी में ट्विस्ट तब आया जब पैरा मेडिक्स ने पूछा कि क्या हाल ही में कुछ बाहर का खाना खाया था, तो पता चला बहन ने WW के लाए हुए चिकन से बनी डिश खाई थी। अब बहस छिड़ गई – कहीं ये फ्लू नहीं, फूड पॉइज़निंग तो नहीं? एक कमेंट में मज़े से लिखा, “फ्लू से उल्टी नहीं होती, ये तो फूड पॉइज़निंग का लक्षण है।”
एक और यूज़र ने तंज़ कसा, “मुर्गी उड़ नहीं सकती, तो ‘बर्ड फ्लू’ तो नहीं आया होगा!” आखिरकार, पैरामेडिक्स ने भी यही कहा कि गंभीर कुछ नहीं है, आराम करो। घरवाले बार-बार माफी माँगते रहे कि उनका समय खराब हुआ, लेकिन पैरामेडिक्स खुद इस घटना पर हँसते रहे।
‘केविन’ का तर्क और बहन की नाराज़गी
अब असली केविनगिरी देखिए – बहन ने WW को साफ मना कर दिया था कि एंबुलेंस मत बुलाओ। फिर भी WW ने न सिर्फ बुलाया, बल्कि अपनी आंटी तक को बता दिया! जब आंटी ने पूछा कि जब घरवाले खुद नहीं बुला रहे तो तुम क्यों कर रहे हो, तो भी WW अड़ा रहा। बहन की तरफ से ‘मैं बहुत बीमार हूँ, बिस्तर से उठ नहीं पा रही’ जैसी कोई हल्की-फुल्की बात ज़रूर कही गई होगी, लेकिन इतनी भी नहीं कि इमरजेंसी कॉल कर दी जाए।
एक कमेंट में सुझाव दिया गया कि अगर WW ऐसी हरकतें दोबारा न करें, तो बहन चाहें तो लोकल पुलिस या एंबुलेंस कंट्रोल रूम में नोट डलवा सकती है कि बिना बहन की इजाज़त के इमरजेंसी न भेजी जाए। क्या मज़ेदार उपाय है!
निष्कर्ष: ऐसी केविनगिरी कहीं भी हो सकती है!
कुल मिलाकर, ये कहानी दिखाती है कि ओवर-रिएक्ट करने वाले लोग हर समाज में पाए जाते हैं – चाहे वे अपने प्यार में कितने भी ईमानदार हों। भारतीय घरों में आमतौर पर मामूली बीमारी के लिए एंबुलेंस तो दूर, डॉक्टर के पास जाने से पहले ही घर के घरेलू नुस्खे ट्राई किए जाते हैं। लेकिन WW जैसे केविन अगर आपके आसपास हों, तो ज़रा संभल कर रहिए – कहीं आपकी मामूली छींक पर भी ‘इमरजेंसी’ न आ जाए!
आखिर में यही कहना चाहूँगा, आपके घर या दोस्ती में भी कभी ऐसी कोई ‘केविनगिरी’ हुई है? नीचे कमेंट में ज़रूर बताइए! और हाँ, अगली बार जब जुकाम हो, तो पहले अदरक वाली चाय आज़मा लीजिए, एंबुलेंस बाद में सोचिएगा!
मूल रेडिट पोस्ट: My sister’s kevin boyfriend called an ambulance for the flu