बॉस की तीन पैसे की सख्ती, कंपनी को पड़ा लाखों में महंगा – एक ऑफिस कथा
ऑफिस की दुनिया में अक्सर नियमों का हवाला देकर बॉस लोग अपनी ताकत दिखाने का कोई मौका नहीं छोड़ते। लेकिन कभी-कभी यही नियम-कायदे उन्हें उल्टा सबक भी सिखा देते हैं। ऐसी ही एक जबरदस्त कहानी है इंग्लैंड के एक कर्मचारी की, जिसने तीन पैसे की वजह से अपने बॉस को ऐसा पाठ पढ़ाया कि पूरे ऑफिस में हंसी का माहौल बन गया। सोचिए, जब बॉस की ज़िद कंपनी को फायदा की जगह नुकसान पहुंचा दे, तो क्या होता है?
नियमों के नाम पर तीन पैसे की लड़ाई
कहानी है 2015 की इंग्लैंड की, जहां एक कर्मचारी को ऑफिस की तरफ से हफ्ते भर की ट्रेनिंग पर भेजा गया। वैसे तो उसे उस विषय की पूरी जानकारी थी, पर बॉस को मैनेजमेंट के सामने टीम की 100% सर्टिफिकेशन दिखानी थी। यात्रा के लिए ट्रेन टिकट और होटल (केवल Bed & Breakfast) बुक करवा दिए गए। लंच और डिनर का खर्चा खुद उठाना था, लेकिन £5 लंच और £11.72 डिनर के लिए क्लेम किया जा सकता था।
आखिरी रात डिनर का बिल £11.75 आया – यानी सीमा से केवल 3 पेंस (यानी भारतीय पैमाने पर डेढ़-दो रुपए) ज्यादा। बाकी दिनों में वो £10 से भी कम पर निपट गया था, तो उसने सोचा कुल मिलाकर साप्ताहिक लिमिट के अंदर ही हैं, तो फाइनेंस टीम मान जाएगी। खर्चे का फॉर्म और सारे बिल उसने बॉस को दे दिए।
बॉस की टेढ़ी नज़र, कर्मचारी की सीधी चाल
घंटे भर में बॉस ने ऑफिस बुलाकर खर्चे रिजेक्ट कर दिए – तर्क था, "हद से ज्यादा खर्च कर दिया! जरा पॉलिसी पढ़ो और फिर से फॉर्म भरो।" कर्मचारी ने समझाने की कोशिश की कि बाकी दिन तो कम खर्च हुआ, लेकिन बॉस का जवाब था – "नियमों के लिए नियम होते हैं। पॉलिसी पढ़ो!"
अब आया असली 'मालिशियस कंप्लायंस' का मजा। कर्मचारी ने नियमावली, स्टाफ हैंडबुक और कॉन्ट्रैक्ट को खंगाल डाला। पता चला कि असल में वो और भी कई खर्चे क्लेम कर सकता है, जैसे – परिवार को फोन करने का खर्च, घर से दूर रहने का भत्ता, 3 घंटे से ज्यादा सफर का बोनस, ओवरटाइम, और रविवार के लिए डबल पे।
अब उसने नया फॉर्म भरा, नियमों के खास हिस्से हाईलाइट किए, और खर्चा बढ़कर £175 कर दिया (पहले सिर्फ £75 था)। साथ में ओवरटाइम का भी दावा कर दिया, जिससे कुल रकम हुई £325 के आसपास!
नियमों की सख्ती कब पड़ती है उल्टी
बॉस ने फिर बुलाकर खर्चे रिजेक्ट करने की धमकी दी, लेकिन इस बार कर्मचारी पूरी तैयारी से आया था – "अगर आप मना करेंगे तो मैं ऊपरी मैनेजमेंट में शिकायत करूंगा।" बॉस के पास मानने के सिवा कोई रास्ता नहीं बचा।
यहां एक पाठक ने बढ़िया टिप्पणी की – "पैसे-पैसे का हिसाब रखने वाले, आखिर में बड़े नुकसान में रहते हैं!" (जैसा हम कहते हैं, ‘ऊँट के मुँह में जीरा, पर ऊँट ने पूरा खेत ही चर डाला’)। ऑफिस की दुनिया में अक्सर देखा जाता है कि एक छोटी सी बात पर बहस में जितना वक्त और संसाधन खर्च होता है, वो असल रकम से कहीं ज्यादा हो जाता है।
एक अन्य पाठक ने व्यंग्य करते हुए लिखा, "तीन पैसे बचाने के चक्कर में कंपनी को सौ पाउंड का नुकसान हो गया!" किसी और ने मजेदार अंदाज में कहा, "मैनेजर ने अपनी ताकत दिखाने के चक्कर में वो ताकत ही खो दी।"
भारतीय ऑफिसों में क्या हम भी ऐसे हैं?
सोचिए, अपने देश में भी ऐसे कई किस्से मिल जाएंगे। कभी HR रजिस्टर में सिग्नेचर को लेकर, कभी टीए-डीए के बिल में चाय-बिस्कुट के पैसे के लिए, या फिर ऑफिस के गेस्ट हाउस में स्पेशल चाय मंगवाने पर बहस। हम सबने देखा है कि नियमों के नाम पर कभी-कभी छोटी-सी बात का पहाड़ बना दिया जाता है। अक्सर कहा जाता है – "पॉलिसी के खिलाफ है, साहब!"
लेकिन, जब कर्मचारी नियमों की किताब खोलकर एक-एक अधिकार के साथ सामने आता है, तब बॉस के चेहरे की हवाइयाँ उड़ जाती हैं। जैसे, एक कॉमेंट में किसी भारतीय ने लिखा – "जब बॉस ने पेट्रोल खर्च डिनाई किया, मैंने अगले दिन ऑफिस आने की बजाय ऑनलाइन मीटिंग अटेंड कर ली। फिर तो बॉस खुद कहने लगे – चलो तुम्हारा खर्च पास कर देते हैं!"
सीख – नियमों का सही इस्तेमाल और इंसानियत
इस कहानी से हमें दो बातें सीखनी चाहिए – पहली, नियमों का मकसद सुविधा देना है, न कि दिक्कत बढ़ाना। दूसरी, नियमों को हथियार बनाकर अपना अहम दिखाना अंत में कभी फायदेमंद नहीं होता।
एक अनुभवी मैनेजर की सलाह थी – "अगर कर्मचारी सीमाओं के अंदर खर्च करता है, तो छोटी रकम पर बहस करने की बजाय काम पर ध्यान दो।" आखिर, ऑफिस का समय और ऊर्जा ज्यादा कीमती है, तीन पैसे के हिसाब से कहीं ज्यादा!
समाप्ति में, कर्मचारी ने अपने सभी साथियों को भी ये 'खजाना' बताया, ताकि कोई भी अपने अधिकारों से वंचित न रहे। अगली बार जब आपका बॉस आपको ‘रूल बुक’ पढ़ने बोले, तो ध्यान रखना – शायद उसी किताब में आपके लिए भी कोई छुपा खजाना है!
आपके ऑफिस में भी ऐसे किस्से हुए हैं? नीचे कमेंट में जरूर बताएं – आपकी कहानी अगली पोस्ट में आ सकती है!
मूल रेडिट पोस्ट: Angry boss refuses expense claim and tells me to read the policy for guidance.