बाल कटवाना या बच्चा जनना? एक होटल मैनेजर की बेरुखी पर हैरान कर देने वाली कहानी
दोस्तों, ऑफिस में काम करते हुए आपने भी ऐसे लोग देखे होंगे, जिन्हें अपनी जिम्मेदारी से ज़्यादा अपनी सुविधा प्यारी होती है। लेकिन क्या हो, जब एक महिला स्टाफ अपने आखिरी प्रेगनेंसी के दिनों में मदद माँगे और मैनेजर सिर्फ बाल कटवाने का बहाना बनाकर पल्ला झाड़ ले? आज की कहानी कुछ ऐसी ही है, जिसे पढ़कर आप भी सोचने पर मजबूर हो जाएंगे कि आखिर इंसानियत गई कहाँ!
जब संवेदनशीलता हो जाए छुट्टी पर: एक प्रेग्नेंट महिला की आपबीती
यह किस्सा एक होटल चेन का है, जहाँ दो सहेलियाँ काम करती थीं—एक, जो नौवें महीने की गर्भवती थी, और दूसरी, उसकी हमदर्द। दोनों की पोस्टिंग अलग-अलग होटल में थी, लेकिन दूरी सिर्फ 10 किलोमीटर की थी। गर्भवती सहेली पिछले हफ्ते से ही ब्रेक्सटन हिक्स (झूठे प्रसव के दर्द) झेल रही थी, फिर भी रोज़ ऑफिस आ रही थी। सोचिए, भारत में भी कितनी महिलाएँ प्रसव के आखिरी दिनों तक छुट्टी नहीं ले पातीं!
अब आते हैं कहानी के विलेन पर—उस होटल का मैनेजर। कहते हैं ना, "ऊपर से बॉस, नीचे से आलसी," बस वही किस्सा था। रोज़ 10 बजे आना, एक घंटे बाद ऑफिस बंद कर लेना, फिर किसी बहाने 4 घंटे गायब रहना, और 5 बजे फुर्र! ऐसे मैनेजर भारत के सरकारी दफ्तरों में भी मिल जाएंगे—"काम बाद में करेंगे, पहले चाय-सुट्टा!"
बाल कटवाने की प्राथमिकता और प्रेग्नेंट महिला की परेशानी
एक दिन गर्भवती सहेली ने अपने दोस्त को फोन किया—"मुझे असली लेबर पेन हो रहे हैं, क्या करूं?" दोस्त ने सलाह दी कि घर चली जा या अस्पताल चली जा; लेकिन मैनेजर ने क्या किया? उसने कहा, "अगला फ्रंट डेस्क वाला आए तब ही जा सकती हो, मुझे तो बाल कटवाने जाना है, बड़ा जरूरी है!" और जनाब, साहब अपना बैग उठाकर निकल लिए, गर्भवती महिला को तीन घंटे और रुकने का आदेश दे गए!
सोचिए, अगर यही हाल किसी भारतीय दफ्तर के बाबू का हो—"अरे, छुट्टी चाहिए? पहले मेरा चाय-समोसा मंगवा, फिर देखेंगे!" कमेंट्स में एक पाठक ने मज़ाकिया अंदाज़ में लिखा, "ऐसे मैनेजर तो सिर्फ अपनी तबीयत खराब होने पर मेडिकल इमरजेंसी समझते हैं, बाकियों की तो बला से!"
इंसानियत और जिम्मेदारी: कहानी में आया असली मोड़
अब गर्भवती महिला बहुत परेशान थी। उसकी दोस्त ने तुरंत अपने होटल के रीजनल मैनेजर से बात की और बोला, "सर, मैं उसकी शिफ्ट कवर कर सकती हूँ।" लेकिन रीजनल मैनेजर ने गज़ब इंसानियत दिखाई—कहा, "उसे तुरंत छुट्टी लेने को कहो, बाकी मैं देख लूंगा।"
अंत में, गर्भवती सहेली अस्पताल गई और 36 घंटे बाद स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया। वो अपनी मैटरनिटी लीव पर चली गई, लेकिन कभी वापस नहीं आई। उसकी दोस्त ने भी एक महीने बाद नौकरी छोड़ दी। और उस बाल कटवाने वाले मैनेजर का क्या हुआ? किसी को नहीं पता—लेकिन कहानी सुनाते हुए भी गुस्सा आ जाता है!
एक कमेंट में एक पाठक ने लिखा, "ये तो सीधी-सी बात है—कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए ऐसे गैर-जिम्मेदार अफसर पर!" वहीं, एक ने बड़े तंज में कहा, "कुछ मैनेजर तो किताबों के वॉर्निंग को भी सुझाव समझ लेते हैं—1984 जैसी चेतावनी, और ये लोग टॉर्चर नेक्सस बना देते हैं!"
भारतीय कार्यस्थल और महिलाओं की दुर्दशा
यह कहानी सिर्फ अमेरिका या पश्चिमी देशों की नहीं, भारत में भी महिलाएँ आखिरी दिन तक ऑफिस आती हैं। एक पाठक ने अनुभव साझा किया, "मेरी सहकर्मी बेटे के जन्म से एक दिन पहले तक काम कर रही थी, और उसकी सास ही उसकी बॉस थी! सोचिए, दादी बनने जा रही हैं, लेकिन छुट्टी नहीं देतीं!"
एक अन्य ने बताया, "मैं सात महीने की गर्भवती थी, फिर भी बॉस मुझसे काउंटर पर चढ़कर सिगरेट की शेल्फ भरवाने को कहते थे!" क्या ऐसे माहौल में महिलाएँ सुरक्षित और सम्मानित महसूस कर सकती हैं?
नसीहत और उम्मीद: बदलाव की जरूरत
दोस्तों, इस कहानी से साफ है कि चाहे अमेरिका हो या भारत, कुछ लोगों के लिए इंसानियत और जिम्मेदारी बाल कटवाने या चाय पीने से भी कम महत्व की होती है। लेकिन हर जगह अच्छे लोग भी हैं—जैसे रीजनल मैनेजर, जो सही वक्त पर स्टाफ के साथ खड़े होते हैं।
हमें अपने आस-पास ऐसे लोगों की पहचान करनी होगी जो दूसरों की मदद के लिए आगे आएँ। साथ ही, दफ्तरों में महिलाओं की सेहत और सम्मान को प्राथमिकता देना बहुत जरूरी है। वरना, "बाल कटवाने" जैसे बहाने चलते रहेंगे और असली ज़रूरतमंद परेशानी में फँसते रहेंगे।
आपका क्या अनुभव है?
क्या आपके साथ भी कभी बॉस ने संवेदनहीनता दिखाई है? क्या आपने किसी को ऐसे हालात में फँसा देखा है? अपनी राय या अनुभव नीचे कमेंट में ज़रूर साझा करें—शायद आपकी कहानी किसी को हिम्मत दे दे!
मूल रेडिट पोस्ट: Apparently a haircut is more important than giving birth