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बर्फ की सफाई: जब होटल में मेहमान ने मचाया बवाल

उत्तर-पूर्व अमेरिका में एक प्रमुख शीतकालीन तूफान के बाद बर्फ से ढके होटल रिसॉर्ट का दृश्य, 20 इंच ताजा बर्फ के साथ।
हमारी होटल रिसॉर्ट का शानदार दृश्य, pristine बर्फ में ढका हुआ, न्यू इंग्लैंड में हाल ही में आई तूफान के बाद सर्दी की सुंदरता को दर्शाता है। एक आरामदायक छुट्टी के लिए आदर्श!

अगर आप कभी उत्तर भारत के पहाड़ी इलाकों या हिमाचल-उत्तराखंड की सर्दियों में घूमने गए हों, तो आपको बर्फबारी का असली मज़ा और उसकी मुश्किलें दोनों महसूस हुई होंगी। कई बार जब बर्फ इतनी गिर जाती है कि सड़कें, गाड़ियाँ सब सफेद चादर में ढक जाती हैं, तब असली परीक्षा होती है होटल वालों और मेहमानों की। लेकिन सोचिए, अगर ऐसे मौसम में कोई मेहमान अपने ठहरने के अनुभव को लेकर हंगामा कर दे, तो क्या हो?

होटल के सामने बर्फ का पहाड़ और मेहमान की फरमाइश

यह किस्सा है अमेरिका के उत्तर-पूर्वी इलाके के एक होटल रिसॉर्ट का। वहाँ हाल ही में जोरदार बर्फबारी हुई—लगभग 20 इंच बर्फ गिरी, और वो भी शनिवार की रात जब होटल पूरी तरह बुक था। होटल प्रबंधन ने बर्फ हटाने के लिए ठेकेदार को बुलाया, जिसने पूरी रात मेहनत की, लेकिन गाड़ियाँ हर जगह खड़ी थीं और इतनी बर्फ थी कि हटाने की जगह भी कम पड़ी।

होटल ने मेहमानों के लिए बाहर फावड़े (shovel) भी रख दिए ताकि वो अपनी गाड़ी के आसपास की बर्फ खुद हटा सकें। लेकिन, भाईसाहब! लोगों ने फावड़े छोड़कर पिज़्ज़ा के डिब्बे, कपड़े और जो हाथ में आया उससे ही बर्फ हटाने लगे। जैसे हमारे यहाँ बारिश में चप्पल से पानी निकालने वाले जुगाड़ू लोग मिल जाते हैं, वैसे ही यहाँ बर्फ हटाने का देसी जुगाड़ चल पड़ा।

“मेरी गाड़ी क्यों नहीं साफ की?” – नाराज मेहमान का ड्रामा

अब कहानी में आते हैं असली हीरो—एक ऐसे मेहमान पर जो बर्फबारी के दो दिन बाद फ्रंट डेस्क पर पहुँचते हैं और नाराज होकर कहते हैं, “मैंने कभी ऐसा होटल नहीं देखा जो आपकी गाड़ी साफ न करे!” उनकी नाराजगी ऐसी थी जैसे होटल वाले उन्हें चाय-पानी की जगह दूध-बाटी परोस दें।

होटल के कर्मचारी सोच में पड़ गए—“भैया, कौन सा होटल है जो आपकी गाड़ी से बर्फ हटाए? ये कोई पाँच सितारा शादी वाला रिसॉर्ट थोड़े ही है!” फिर भी, शांति बनाए रखने के लिए होटल मैनेजर ने उनकी एक रात की बुकिंग मुफ्त कर दी और कुछ अन्य खर्चे भी माफ कर दिए। लेकिन साहब तो मानो उस्ताद निकले—मुआवजे के लिए बहस करते रहे, मैनेजर की बातों के ऊपर अपनी आवाज चढ़ा दी।

“जल्दी है, गाड़ी निकालनी है!” – पर गाड़ी निकालना खुद ही भूल गए!

अब इंजीनियरिंग विभाग के कर्मचारी फावड़े लेकर उनके साथ पार्किंग में पहुँचे। सामने देखो तो उनकी SUV के आगे करीब 20 इंच की बर्फ थी। लेकिन SUV ऐसी थी कि आराम से निकल सकती थी। फिर भी कर्मचारी पूरी मेहनत से बर्फ साफ करके रास्ता बना देते हैं, चारों टायर के आगे तक रास्ता साफ कर दिया।

पर मज़ा तो तब आया जब साहब बोले, “क्या कोई खाली जगह है जहाँ मैं गाड़ी वापस ले जाकर साफ कर सकूँ?” भाईसाहब, गाड़ी पहले से ही उलटी खड़ी थी—बस बर्फ झाड़िए और निकल जाइए! फिर भी बड़े इत्मीनान से उन्होंने गाड़ी निकाली और बिना किसी दिक्कत के चले गए। कर्मचारी एक-दूसरे को देखकर मुस्कुराए—“क्या अजीब लोग हैं!”

“शिकायत करो, मुफ्त पाओ!” – मेहमानों की नई आदत

इस किस्से के बाद Reddit पर बहस छिड़ गई। एक यूज़र ने लिखा, “ऐसे लोगों को मुफ्त में छूट देना गलत है, इससे तो लोग और ज्यादा शिकायत करके मुफ्त की चीजें लेने लगेंगे।” (कुछ-कुछ वैसे जैसे भारत में सेल्फी लेने के बाद होटल में “कुछ डिस्काउंट तो दो!” कहने वाले ग्राहक!)

एक और कमेंट में कहा गया, “कुछ लोग खुद को इतना हकदार समझते हैं कि ज़रा सी परेशानी भी हो जाए तो जैसे दुनिया खत्म हो गई।” ये बात अपने यहाँ भी कितनी सच है—कोई ट्रेन लेट हो जाए, कोई पकोड़े ठंडे मिल जाएँ, तो लोग सोशल मीडिया पर हल्ला मचा देते हैं।

किसी ने चुटकी ली—“मुझे तो ये पढ़कर ही बेवकूफी महसूस हो रही है!” वहीं एक और ने कहा, “ऐसे लोग बिल्कुल अलग ग्रह से आए हैं, जहाँ दिमाग की ज़रूरत ही नहीं।”

बर्फबारी में होटल वालों की असली परीक्षा

इस पूरी घटना में सबसे दिलचस्प बात यह रही कि होटल के कर्मचारी, जो खुद बर्फ में फँसे थे, फिर भी हर ग्राहक की मदद कर रहे थे। एक कमेंट में मज़ेदार किस्सा आया—किसी ने लिखा कि उनके साथियों ने बर्फ हटाने के लिए पिज़्ज़ा का डिब्बा इस्तेमाल किया था, क्योंकि होटल में फावड़े ही नहीं थे! यह जुगाड़ भारत के लोगों को बहुत पसंद आएगा—हमारे यहाँ भी तो पंखा न चले तो अख़बार से हवा कर लेते हैं।

कुछ लोग कहते हैं कि बड़े-बड़े आलीशान होटल या वैलेट पार्किंग वाले रिसॉर्ट में शायद गाड़ी साफ करने की सुविधा मिल जाए, लेकिन आमतौर पर किसी भी मिड-रेंज या बजट होटल में ऐसी उम्मीद करना बेमानी है। जैसे यहाँ धर्मशाला या लॉज में कोई मेहमान कमरे की झाड़ू खुद उठा ले, तो मालिक उसे सेलिब्रिटी मान लेगा!

निष्कर्ष: असली मेहमान वही जो हालात समझे

इस कहानी से एक बात तो साफ है—किसी भी सेवा क्षेत्र में काम करने वालों को हर तरह के ग्राहक मिलते हैं। कभी-कभी लोग अपनी छोटी सी परेशानी को इतना बड़ा बना देते हैं कि खुद भी हँसी आ जाए। होटल वालों की मेहनत और जुगाड़ की प्रशंसा करनी चाहिए, क्योंकि उनका काम सिर्फ चादर बदलना या चाय लाना नहीं, बल्कि हर मुसीबत में मेहमान की मदद करना भी है।

अगर आप भी कभी बर्फबारी में फँस जाएँ, तो होटल वालों से उम्मीदें ज़रूर करें, लेकिन थोड़ा धैर्य और समझदारी भी दिखाएँ। क्या पता, अगली बार आप खुद भी पिज़्ज़ा के डिब्बे से बर्फ हटाते नजर आएँ!

आपका इस किस्से पर क्या कहना है? क्या आपके साथ कभी ऐसा कोई अजीब अनुभव हुआ है? कमेंट में जरूर बताइए!


मूल रेडिट पोस्ट: Snow Removal