बर्फीली रात, बिजनेस क्लास करेन और होटल स्टाफ की हिम्मत – एक अनसुनी कहानी
कहते हैं मुसीबत में इंसान की असली पहचान सामने आती है। किसी ने सही कहा – “अतिथि देवो भवः”, लेकिन जब अतिथि खुद को महाराज समझ बैठे, तो होटल वालों का क्या हाल होता है, कभी सोचा है? आज मैं ऐसी ही एक सच्ची कहानी लेकर आया हूँ, जिसमें कनाडा की हाड़ कंपा देने वाली बर्फीली रात, बिजनेस क्लास के घमंडी मेहमान (जिन्हें इंटरनेट पर प्यार से 'Karen' कहा जाता है), और एक होटल रिसेप्शनिस्ट की भिड़ंत देखने को मिलती है। कहानी पढ़कर आपको अपने मोहल्ले के उस रिश्तेदार की याद आ जाएगी, जो शादी में सिर्फ पकोड़े कम पड़ने पर हंगामा खड़ा कर देता है!
बर्फीले तूफ़ान की रात: जब हर कोई अपनी जान बचाए
कनाडा में ‘पोलर वोर्टेक्स’ यानी भयंकर बर्फीला तूफान – हिंदुस्तान के हिसाब से समझिए, जैसे दिल्ली में अचानक बरसात हो जाए और लोग छाता लेकर भी भीग जाएं, वैसे ही वहाँ सब बर्फ में फंस गए। ऐसे मौसम में, होटल स्टाफ की ड्यूटी पर जाना किसी रणभूमि में उतरने से कम नहीं। हमारे कहानी के नायक (जो Reddit पर u/MrFahrenheitttttt नाम से मशहूर हैं), घुटनों तक बर्फ में चलकर, बस पकड़कर, होटल पहुँचे – सोचिए, यहाँ तो लोग बर्फ में पैर रखते ही सेल्फी लेने लगते हैं!
शाम होते-होते एयरलाइन का फोन आया – “भैया, हमारे पैसेंजर फँस गए, आपके होटल में 75 कमरे बुक कर रहे हैं।” अब होटल स्टाफ के होश उड़ना लाजमी था। शुरू में लोग एक-एक कर आए, तो काम संभल गया। मगर असली तूफान तो रात के 2 बजे आया, जब पूरा बस भरकर ‘बिजनेस क्लास’ के मेहमान आ पहुँचे। सबकी उम्र 40-60 के बीच, एक-दो लाठी वाले, बाकी अपनी अकड़ में।
घमंड और बर्बादी – जब मेहमान खुद को राजा समझ बैठे
इन ‘करेन’ टाइप मेहमानों ने आते ही होटल स्टाफ को नौकर समझ लिया। एक साहब ने तो साफ़-साफ़ बोल दिया – “मेरे बैग्स लेकर आओ!” रिसेप्शन पर खड़े हमारे नायक ने बड़ी विनम्रता से समझाया, “भैया, मैं अकेला हूँ, पहले सबको लाइन में लगने दीजिए, फिर सामान की व्यवस्था होगी।” मगर साहब तो सुनने को तैयार ही नहीं।
यहाँ एक कमेंट याद आता है (u/Itavan ने लिखा), “आपकी सख्ती देखकर मजा आ गया – समय बर्बाद करोगे, तो एयरपोर्ट वापस भेज दूँगा!” सच है, कई बार स्टाफ को भी अपनी हद बतानी पड़ती है, वरना कुछ मेहमान सिर पर बैठ जाते हैं।
आखिरकार, जब रिसेप्शनिस्ट ने गुस्से में कहा, “यहाँ तूफ़ान है, आप लोग शरण लेने आए हो, छुट्टियाँ मनाने नहीं! मैं अकेला सबको देख रहा हूँ, जो कहूँ वो मानो वरना वापस जाओ,” तब सबकी बोलती बंद हो गई। एक महिला ने तो अपने साथ वाले को खींचकर पीछे कर दिया – ऐसे लोगों को देखकर कभी-कभी लगता है, बॉलीवुड के विलेन भी शरमा जाएं!
बैग-लुग्गे का झमेला और ठंडी में पसीना
अब आया असली मजा – इन बिजनेस क्लास मेहमानों के पास इतने बैग थे, जैसे पूरी अलमारी साथ ले आए हों! Reddit पर एक कमेंट (u/SkwrlTail) कहता है, “कुछ लोगों को हर मौके के लिए कपड़े चाहिए – मूड, मौसम, डिनर, सबके लिए। बाकी, जितना खुद उठाओ, वही सजा है।” एक और ने तो मजाक में लिखा, “मैं तो महीना भर एक छोटे बैग में निकाल सकता हूँ, पर ये लोग जैसे शादी ब्याह में आए हों।”
होटल स्टाफ के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द – बर्फीली रात में बस से 50-60 बैग उतारना! और मेहमान खड़े-खड़े बस चिल्ला रहे थे – “मेरा बैग लाओ, वो वाला लाओ!” कोई खुद मदद करने को तैयार नहीं। एक कमेंट (u/RoyallyOakie) ने तो साफ कहा, “मैं होता तो किसी का भी बैग न उठाता – खुद उठाओ और अपने कमरे में जाओ।” सोचिए, भारत में भी अगर रेलवे स्टेशन पर कुली न मिले, तो लोग क्या-क्या नहीं करते!
होटल स्टाफ की जीत और घमंड का अंत
आखिरकार, हमारे नायक और उनके साथी ने 45 मिनट में सबको चेक-इन कर दिया, बैग्स भी अंदर पहुंचा दिए। मजे की बात – 75 में से सिर्फ 35 कमरे ही भरे, लेकिन होटल ने पूरे 75 का पैसा एयरलाइन से वसूल लिया! एक समझदार कमेंट (u/NocturnalMisanthrope) ने लिखा, “उम्मीद है, आपने पोर्टेज चार्ज भी वसूला होगा!” और सही भी है, मेहनत का फल तो मिलना ही चाहिए।
इस पूरी घटना से एक बात साफ़ है – चाहे होटल हो, रेलवे स्टेशन या कोई दफ्तर, सम्मान दोनों तरफ़ से होना चाहिए। और, घमंड दिखाने वाले चाहे बिजनेस क्लास में आएं या शादी में मंच पर चढ़ जाएं, आखिर में अपनी जगह पर ही बैठाए जाते हैं।
अंत में – आप क्या सोचते हैं?
तो दोस्तो, क्या आपके साथ भी कभी ऐसा वाक्या हुआ है, जब ग्राहक या मेहमान ने हद पार कर दी हो? या फिर आप खुद कभी ऐसे हालात का सामना कर चुके हैं? नीचे कमेंट में जरूर बताइए! और हाँ, अगली बार होटल या किसी सर्विस प्रोवाइडर के पास जाएं, तो इंसानियत और सम्मान साथ ले जाना न भूलें – यही हमारी असली संस्कृति है।
पढ़ने के लिए धन्यवाद, अगली बार मिलेंगे ऐसी ही एक मजेदार, सच्ची और दिलचस्प कहानी के साथ!
मूल रेडिट पोस्ट: Polar Vortex night and a horde of Business class Karens