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बदबूदार बदला: जब चड ने शरारत की और मिला गंध बम का जवाब

कैंपिंग यात्रा के दौरान एक शरारती लड़के द्वारा फार्ट बम की शरारत की योजना बनाते हुए 3D कार्टून चित्रण।
इस चंचल 3D कार्टून दृश्य में, युवा चचेरे भाई-बहन एक क्लासिक शरारत की तैयारी कर रहे हैं, जो परिवार के कैंपिंग यात्राओं की शरारती यादें ताजा करती हैं।

बचपन के दिन, भाई-बहनों की तकरार, और गर्मियों की कैंपिंग – इन सबका अपना एक अलग ही मजा होता है। लेकिन जब शरारतें हद पार कर जाएं, तो बदला लेना भी उतना ही जरूरी हो जाता है! आज मैं आपको सुनाने जा रहा हूँ एक ऐसी कहानी, जिसमें एक छोटे भाई पर हुए जुल्म का बदला लिया गया… वो भी बड़े खास अंदाज में – 'फार्ट बम' से!

जब चड ने की हद से ज्यादा शरारत

तो जनाब, किस्सा कुछ यूं है – सारी फैमिली जंगल में कैंपिंग करने गई थी। ज़्यादातर सब लोग टेंट में सो रहे थे। हमारे नायक और उनके कुख्यात कज़िन 'चड' की उम्र करीब 12 साल थी, जबकि छोटा भाई था 8 साल का। अब भाई-बहनों में थोड़ी बहुत नोकझोंक तो चलती रहती है, लेकिन चड साहब तो हद ही पार कर गए – उन्होंने छोटे भाई को उठाकर कूड़े के डिब्बे में ठूंस दिया!

अब सोचिए, छोटे भाई की क्या हालत हुई होगी! हमारे नायक बेचारे उसे बाहर निकालने पहुंचे, तभी कुछ रिश्तेदारों ने शोर सुना और उल्टा उन्हीं पर चिल्ला पड़े कि, "तुम अपने भाई को कूड़ेदान में क्यों डाल रहे हो?" लाख सफाई देने के बाद भी किसी ने उनकी बात पर यकीन नहीं किया। मतलब, फिल्मी सीन जैसे हालात!

शरारती का शिकार, अब बदला तो बनता है!

अब जब इंसाफ की उम्मीद टूट जाए, तो भाई-भाई की जोड़ी ने तय किया – इसका तोड़ निकाला जाए। अब यहां हमारे देसी बच्चों की तरह, ये दोनो भी चालाक निकले! उनके पास था 'फार्ट बम' – अब ये कोई आम बम नहीं, बल्कि एक ऐसी पैकेट जिसमें सिरका और बेकिंग सोडा मिलाकर ऐसी बदबू बनाई जाती है कि सांस लेना भी मुश्किल हो जाए। असली 'गंध बम'!

सुबह-सुबह दोनों जाग गए, चुपके से चड के टेंट के पास पहुंचे, ज़िप में हल्की सी जगह बनाई और फार्ट बम को फोड़कर भीतर डाल दिया। और फिर भाग लिए… भाईसाहब, टेंट में ऐसी दुर्गंध फैली कि चड का सारा अकड़ धरा का धरा रह गया!

बदले की खुशबू – या यों कहें बदबू!

अब आप सोच रहे होंगे कि आगे क्या हुआ? असली मजा तो तब आया जब चड साहब का टेंट पूरी कैंपिंग के दौरान बदबू से गूंजता रहा। और मजे की बात – हमारे नायक को फिर से डांट पड़ी (इस बार बदबू फैलाने के लिए), लेकिन खुद उन्होंने माना – "भले ही मुझे और डांट पड़ी, लेकिन ये बदला लेना पूरी तरह वorth था!"

रेडिट पर एक पाठक ने लिखा, "जिसने अपने छोटे भाई को कूड़ेदान में ठूंस दिया, उसके लिए तो ये बदला बनता ही था!" एक और कमेंट में किसी ने लिखा, "मेरे पापा बचपन में कहते थे – जब डांट तो वैसे भी पड़नी है, तो बदला जोरदार होना चाहिए!" वाह, क्या बात है। हमारे यहां भी तो कहते हैं, "जो होना है सो होगा, तो काम बड़ा कर!"

कुछ पाठकों ने और भी मजेदार सुझाव दिए – जैसे किसी ने कहा, "अगर और बदला लेना हो तो उसे स्वीडिश फिश कैंडी दे दो – उससे भी बड़ी गैस बनती है!" तो कोई बोला – "फार्ट स्प्रे या फूलगोभी खाकर टेंट में सो जाना चाहिए था, असली देसी बदला!"

परिवार, शरारतें और मासूम बदले

इस पूरी कहानी में एक बात साफ है – चाहे पश्चिमी देश हों या हमारा भारत, भाई-बहन की लड़ाइयों और शरारतों का मजा ही अलग है। कभी छोटे भाई-बहन को गलत फंसाया जाता है, तो कभी किसी की शरारत का जवाब गजब तरीके से दिया जाता है। इस कहानी में भी, जब बड़े लोगों ने यकीन नहीं किया, तो बच्चों ने खुद ही इंसाफ कर लिया – वो भी बिना हाथापाई, सिर्फ़ थोड़ी सी 'बदबू' से!

कई पाठकों ने सहानुभूति दिखाते हुए लिखा – "परिवार वालों को बच्चों की बात सुननी चाहिए थी, वरना बच्चों को खुद ही अपना न्याय करना पड़ता है।" तो वहीं एक ने चुटकी ली – "चड अब टेंट में लटकता रह गया, और बदबू के मारे उसका हाल बेहाल!"

अंत में – आपकी शरारत याद है?

दोस्तों, बचपन की ये बदमाशी और मासूम बदले हम सबकी यादों में कहीं न कहीं बसे रहते हैं। किस्सा चाहे फार्ट बम का हो या अपनी चाची के बग़ीचे में आम चुराने का, ये यादें ही ज़िंदगी में मुस्कान लाती हैं। क्या आपके साथ भी कभी ऐसा कुछ हुआ है? या आपने भी कभी अपने भाई-बहन से मजेदार बदला लिया है? कमेंट में जरूर बताइए – किस्सा सुनाने और सुनने का मजा ही कुछ और है!

आइए, बचपन की इन शरारतों को जी लें, और अगर कभी कोई छोटा भाई कूड़ेदान में फंस जाए, तो फार्ट बम जैसी जुगाड़ जरूर आजमाएं – लेकिन ध्यान रहे, मम्मी के सामने न पकड़े जाएं!


मूल रेडिट पोस्ट: Fart bomb revenge