पहली बार नाइट ऑडिट की ड्यूटी: भूतिया होटल, अजीब मेहमान और वो जादुई सूर्योदय!
अगर आपको लगता है कि होटल में रिसेप्शन की नौकरी सिर्फ मुस्कुराने और चाबी देने-लेने तक सीमित है, तो जनाब, आप बहुत बड़ी गलतफहमी में हैं! खासकर जब बात आती है नाइट ऑडिट यानी रात की शिफ्ट की। बाहर सब सो रहे होते हैं, और आप होटल के फ्रंट डेस्क पर अकेले जागते रहते हैं—बिलकुल वैसे ही जैसे बॉलीवुड की किसी हॉरर फिल्म में चौकीदार रात में तगड़ी ड्यूटी बजाता है।
तो आज मैं आपको सुनाने चला हूँ एक Reddit यूज़र की असली कहानी, जिसे पहली बार होटल की नाइट ऑडिट शिफ्ट करनी पड़ी। शुरू में लगा कि सब ठीक रहेगा, लेकिन जैसे-जैसे रात बढ़ी, किस्से ऊपर किस्सा बनते गए—कहीं भूतिया रेस्टोरेंट, कहीं अजीब मेहमान, और आखिर में वो शानदार सूर्योदय!
रात की शुरुआत: नींद थी दूर, चाय थी पास
हमारे कहानीकार ने कभी नाइट ऑडिट की ड्यूटी नहीं की थी। उस दिन उनके होटल का असली नाइट ऑडिटर अचानक छुट्टी पर चला गया, और मैनेजर भी शहर से बाहर। अब मजबूरी में ये बीड़ा हमारे नायक के सिर आ गया।
शुरूआत में सब अच्छा—सारे गेस्ट चेक-इन हो चुके, होटल के दरवाज़े लॉक, और हमारे साहब अकेले रिसेप्शन पर चाय की चुस्की के साथ। सोच रहे थे, "क्या बात है, शांति ही शांति!"
होटल की 'भूतिया' टेक्नोलॉजी: जब अपने आप जल उठी रेस्टोरेंट की लाइट
अचानक सिस्टम में एक और आखिरी चेक-इन दिखा। होटल के दरवाज़े तो लॉक थे, तो सोचना पड़ा—अब यह मेहमान कैसे आएगा? इसी इंतज़ार में बैठे थे कि रेस्टोरेंट की लाइट अपने आप जल उठी!
अब ज़रा सोचिए, अंधेरी रात में अकेले होटल में बैठे हैं, और बिना किसी वजह के तेज़ रोशनी! दिल तो बैठ ही गया। ऊपर से, एक मिनट पहले किसी के कदमों की आहट भी सुनाई दी थी। मन में तुरंत ख्याल आया—"कहीं कोई भूत-वूत तो नहीं?"
फिर पता चला कि रात के बारह बजते ही होटल का ऑटोमेटेड सिस्टम लाइट ऑन कर देता है, उसे लगता है कि अब दोपहर हो गई है! अब टेक्नोलॉजी भी हमें डराने लगे तो क्या कहें! कम्युनिटी में किसी ने मज़ाक में लिखा—"हमारे होटल में भी ऐसे ही सिस्टम की वजह से रजिस्टर अपने आप खुल जाते हैं, और एक बार तो सब लाइट बंद होते ही हॉलीवुड सिंगर की आवाज़ भी बज उठी थी!"
असली डर: भूत नहीं, मेहमान!
आखिरकार आखिरी मेहमान आया, चेक-इन हुआ और साहब ने सोचा अब राहत मिल गई। लेकिन किस्मत को तो कुछ और ही मंज़ूर था। एक गेस्ट, जो पहले से ही होटल में था, सिगरेट पीकर वापस आया और बड़े अजीब ढंग से "गुड ईवनिंग" बोला। फिर accent पर बात करने लगा, और बोला—"बहुत गर्मी है, आप बस बोलते रहिए।"
उनकी आँखों और हावभाव से ऐसा लग रहा था, जैसे कोई दरावना सस्पेंस शुरू हो गया हो! हमारे नायक ने फुर्ती से खुद को बिज़ी दिखाया और पीछे के ऑफिस में चले गए।
थोड़ी देर बाद वही गेस्ट फिर आया, बोला—"मेरी चाबी लिफ्ट में काम नहीं कर रही, आप साथ चलेंगे?" अब तो सीधा 'ना' कर दिया। उन्हें बताया कैसे कार्ड टैप करना है—और अरे! उसकी चाबी एकदम सही चल रही थी।
कमेंट्स में एक अनुभवी नाइट ऑडिटर ने लिखा—"सच कहूँ तो भूत से ज़्यादा डर असली लोगों से है।" किसी और ने मज़ेदार अंदाज में जोड़ा—"मर चुके लोग कम से कम आपके कान तो नहीं उमेठेंगे!"
नींद हराम, काम तमाम—फिर आया जादुई सूर्योदय
रात जैसे-तैसे कट रही थी, नींद तो कुर्सी पर बैठकर आती नहीं थी, और डर के मारे झपकी भी नहीं ले सकते। कई अनुभवी नाइट ऑडिटर का कहना है—"झपकी लेना सबसे बड़ा दुश्मन है; अगर एक बार सो गए तो शिफ्ट गई हाथ से!"
इसलिए हमारे नायक ने सोचा—चलो, सुबह के काम शुरू कर देते हैं। कमरे असाइन करना, चार्ज लगाना वगैरह।
और फिर आया उस रात का सबसे खूबसूरत पल—रूफटॉप पर जाकर सूर्योदय देखना। कहते हैं, जितनी डरावनी रात थी, उतना ही सुकूनभरा था वो सूरज का उगना। Reddit कम्युनिटी में किसी ने दिल से लिखा—"आप तो नाइट ऑडिट की 'हार्ड मोड' शिफ्ट करके भी सूर्योदय का अचीवमेंट अनलॉक कर आए!"
होटल की नाइट शिफ्ट: हिम्मत, हंसी और हॉरर का तड़का
इस कहानी से एक बात तो पक्की समझ आ जाती है—होटल की नाइट ऑडिट सिर्फ बुकिंग और बिलिंग नहीं, बल्कि जिगर का काम है! कई लोगों ने साझा किया कि सालों बाद भी भूतिया घटनाएँ आम हैं, लेकिन असली सिरदर्द तो जीवित मेहमान ही हैं।
एक अनुभवी ने लिखा—"अगर होटल वाले सुरक्षा में पैसे लगाएँ तो कई प्रॉब्लम्स खुदबखुद सुलझ जाएँगी, लेकिन भारत में भी ऐसा अक्सर नहीं होता।" वहीं किसी और ने सलाह दी—"रात डेढ़ बजे के बाद अगर कोई रूम से कॉल करता है, तो समझ लीजिए, कुछ अच्छा नहीं होने वाला!"
कुछ पुराने नाइट ऑडिटर तो कहते हैं कि अब भूत भी डराना छोड़ चुके हैं, क्योंकि इन्हें डरना आता ही नहीं! जैसे हमारे यहाँ की दादी-नानी की कहानियों में भूत भी गाँव के बुजुर्ग से डरते हैं।
निष्कर्ष: आप भी कभी नाइट ऑडिट करेंगे?
तो भई, Reddit के OP ने तो अपने पहले अनुभव को 1/10 नंबर दिए—वो एक अंक भी सिर्फ सूर्योदय के लिए! लेकिन इस एक रात में जो सिखा, वो शायद सालों की नौकरी में नहीं मिलता।
अगर आप भी कभी होटल या किसी ऑफिस की रात की शिफ्ट में काम करें तो याद रखिए—भूत से कम डरिए, असली लोगों से ज़्यादा! और जिस दिन सूर्योदय देखने का मौका मिले, समझिए सारी डरावनी रात का मेहनताना मिल गया!
क्या आपके साथ भी कभी ऐसी डरावनी या मज़ेदार नाइट शिफ्ट का अनुभव हुआ है? कमेंट में ज़रूर सुनाइए—क्योंकि हर नाइट ऑडिटर की एक अपनी 'भूतिया' कहानी होती है!
मूल रेडिट पोस्ट: My first time doing night audit – ghosts in restaurant, creepy guest… and sunrise