पहली नौकरी का कड़वा सच: जब सहकर्मी ही बन जाएं सिरदर्द
हर कोई अपनी पहली नौकरी को लेकर बहुत सपने देखता है—नई जगह, नए लोग, और ढेर सारी उम्मीदें। लेकिन सोचिए, अगर आपके अपने ही सहकर्मी आपकी ज़िंदगी का सबसे बड़ा सिरदर्द बन जाएं, तो? होटल इंडस्ट्री में पहली जॉब करने वाली एक लड़की की कहानी है, जहां गेस्ट नहीं बल्कि स्टाफ ही असली चुनौती बन गए!
हमारे यहाँ अक्सर लोग कहते हैं, "काम से नहीं, लोगों से भागना पड़ता है।" इस कहानी में तो ये कहावत सोलह आने सच साबित हो गई।
होटल का महाभारत: जब हाउसकीपिंग ही लगे डरावनी
सबसे पहले तो, हाउसकीपिंग स्टाफ का जिक्र जरूरी है। पोस्ट लिखने वाली बहनजी पूछती हैं—"ये हाउसकीपिंग वाले हमेशा ऐसे क्यों चिल्लाते हैं, जैसे मैंने उनकी बिरयानी छीन ली हो?" भारत में भी अक्सर सफाईकर्मी सीधा बोलने के लिए जाने जाते हैं, लेकिन यहाँ तो फोन उठाते ही कान के पर्दे फट जाएं!
एक कमेंट में किसी ने खूब मजाकिया अंदाज में लिखा—"हाउसकीपिंग वाले गुस्से में नहीं, अपने हालात से परेशान हैं। होटल असल में एक पाताल लोक है, जिसमें सब मूर्खों के बीच फँसे हैं।" सच में, जब हर तरफ जरेड, ऑस्टिन और यूजीन जैसे लोग हों, तो भला कोई भी चुप कैसे रह सकता है?
जरेड, यूजीन और ऑफिस की राजनीति
अब आते हैं असली मसालेदार हिस्से पर—सहकर्मियों की टोली! जरेड नाम का एक आदमी, जो हमेशा बेहूदा बातें करता, दूसरों पर काम डालता, और सबसे बड़ी बात—कभी वक्त पर नहीं आता! जिस बहन को ये कहानी मिली, उससे पूछता—"तुम्हारा बॉयफ्रेंड और तुम कहाँ-कहाँ घूमते हो?" और हद तो तब हो गई जब उसने कहा, "मुझे तो नैचुरल लड़कियाँ पसंद हैं।" भाई, ये कौन-सी नौकरी है जहाँ आदमी अपनी पसंद-नापसंद सबके सामने खोल रहा है?
यूजीन की तो दास्तान ही अलग है। पहले आफिस में दोस्ती, फिर वॉट्सऐप पर फ्लर्टिंग, और जब लड़की ने भाव नहीं दिया, तो उसने बर्गर किंग की कीमत के लिए 'ज़ेले' रिक्वेस्ट भेज दी! एक कमेंट में किसी ने कहा, "अगर किसी आदमी की इज्जत बर्गर की कीमत से भी कम है, तो उसे गर्लफ्रेंड नहीं, बल्कि फाइनेंशियल एडवाइज़र की जरूरत है!" सच में, ऐसी हरकतें बॉलीवुड के कॉमेडी विलेन भी शरमा जाएं।
गॉसिप क्वीन, झूठे डाक्टरी सर्टिफिकेट और ऑफिस का असली रंग
किस्सा यहीं खत्म नहीं होता। कसी नाम की सहकर्मी—हर वक्त बीमार, हर वक्त गिला-शिकवा, और नई-नई अफवाहें फैलाने में माहिर। ऊपर से उनके बॉयफ्रेंड ने तो हद ही कर दी, "मुझे ब्राउन लोग पसंद नहीं, मैं डर जाता हूँ।" ऐसे लोगों के साथ काम करना, जैसे किसी सास-बहू सीरियल में फँसना!
दूसरी तरफ गॉलम, जो छुट्टी के लिए नकली डॉक्टर की पर्ची लाता, कभी टाईम पर नहीं आता। ऑफिस की मीटिंग हो या शिफ्ट—हमेशा देर से! और जरेड के साथ मिलकर माहौल को और जहरीला बना देता। सब मिलाकर, यहाँ हर कोई एक-दूसरे की बुराई करने में लगा था। किसी ने कमेंट में लिखा, "इतना टॉक्सिक माहौल तो सास-बहू के झगड़ों में भी नहीं होता!"
सीख और सावधानी: ऑफिस की दोस्ती में फँसना मत
सबसे बड़ी सीख—ऑफिस में कोई दोस्त नहीं होता! यूजीन और ज़ैन जैसे लोग बाहर घुमाने ले जाएंगे, फिर मैसेज करके 'हुक अप' का ऑफर देंगे। और जब आप मना कर देंगे, तो ब्लॉक करना ही पड़ता है। कहानी सुनाने वाली ने तो दोनों को दो-दो बार ब्लॉक किया!
कमेंट्स में एक और बड़ी सच्चाई सामने आई—"जब तक खुद पर बुरा बर्ताव नहीं होता, हमें अहसास ही नहीं होता कि माहौल कितना खराब है।" यही वजह है कि इंडिया में भी बहुत-सी लड़कियाँ ऑफिस बदलती रहती हैं, क्योंकि सहकर्मी ही सबसे बड़ी परीक्षा बन जाते हैं।
निष्कर्ष: हर ऑफिस में बुरे लोग होते हैं, पर खुद की इज्जत सबसे ऊपर
इस पूरी कहानी का सबसे बड़ा सबक यही है—चाहे होटल हो या कोई भी ऑफिस, अपनी इज्जत और हदें तय रखना जरूरी है। अगर काम की जगह ज़हरीली हो, तो वहाँ टिके रहना खुद के साथ नाइंसाफी है। और हाँ, सपनों का परफेक्ट जॉब शायद न मिले, पर खुद को मजबूत रखना, सही लोगों को पहचानना और बुरे लोगों को ब्लॉक करना सीख जाएं—यही असली तरक्की है!
आपका क्या अनुभव रहा है अपनी पहली नौकरी में? क्या आपके ऑफिस में भी ऐसे 'जरेड' या 'यूजीन' टाइप के लोग थे? कमेंट में ज़रूर बताइए और इस कहानी को अपने दोस्तों के साथ शेयर कीजिए—शायद उनकी भी यादें ताजा हो जाएं!
मूल रेडिट पोस्ट: Biggest reason I left my first job…the staff