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पहाड़ों के रिसॉर्ट में कमरे की तलाश: ना ग्राउंड फ्लोर, ना सुनसान – मेहमान की अनोखी फरमाइश!

हरे-भरे पहाड़ों के बीच फैले अलग-अलग भवनों के साथ एक पर्वतीय रिसॉर्ट का दृश्य, परिवारों के ठहरने के लिए उपयुक्त।
हमारे पर्वतीय रिसॉर्ट का魅力 अनुभव करें, जहाँ विशाल आवास आपका इंतजार कर रहे हैं! यह दृश्य हमारे 84 एकड़ के संपत्ति की सुंदरता को दर्शाता है, जो परिवारों के लिए शहर की हलचल से दूर रोमांच की खोज में आदर्श है।

रिसेप्शन डेस्क पर काम करना आसान बात नहीं है, खासकर जब मेहमानों की फरमाइशें रोज़ नई-नई हों। पहाड़ों में बसे किसी बड़े रिसॉर्ट में अगर आपको कमरा बुक करना हो, तो आप क्या चाहेंगे? शायद सुंदर नज़ारा, थोड़ा सुकून, या फिर बच्चों के साथ सुरक्षित माहौल। लेकिन हमारे आज के किस्से में एक मेहमान की मांगों ने रिसेप्शनिस्ट को भी सोच में डाल दिया – और फिर हंसी के ठहाके लगे!

कहानी की शुरुआत: "मुझे ग्राउंड फ्लोर नहीं चाहिए, पर सुनसान भी न हो!"

ये किस्सा Reddit के r/TalesFromTheFrontDesk पर u/FlyingPocketMercy नाम के यूज़र ने साझा किया। अमेरिका के पहाड़ी इलाके में 84 एकड़ में फैले एक रिसॉर्ट में काम करने वाले इस रिसेप्शनिस्ट के पास एक महिला अपने बच्चों के साथ आईं। स्टैंडर्ड प्रोसेस चला – कार्ड और आईडी की जांच, कमरा अलॉट करना। उन्हें पहला कमरा ग्राउंड फ्लोर पर मिला।

जैसे ही कमरा मिला, मेहमान ने कहा, "कोई ऊपरी मंज़िल वाला डबल क्वीन रूम है?" रिसेप्शनिस्ट ने बताया कि ज्यादातर क्वीन कमरे नीचे हैं, लेकिन किस्मत से एक आख़िरी कमरा बचा है – पिछली बिल्डिंग में, पहाड़ की तरफ़, थोड़ा सुनसान।

कमरा बदल दिया गया। सब ठीक। लेकिन बीस मिनट बाद वही मेहमान वापस आईं – "ये कमरा बहुत अंधेरा और सुनसान है, मुझे डर लग रहा है।" अब रिसेप्शनिस्ट भी सोच में पड़ गया – पहली मांग थी ऊपर का कमरा, अब सुनसान नहीं चाहिए? उन्हें समझाया गया कि मेन बिल्डिंग में कमरा मिलेगा, पर रेट ज़्यादा है। उन्होंने मना कर दिया।

फिर मेहमान ने रिसॉर्ट के नक्शे पर उंगली रख दी – "इन बिल्डिंग्स में कोई कमरा है?" रिसेप्शनिस्ट हैरान हो गया – "मैडम, ये तो पहाड़ में और भी सुनसान, अंधेरा इलाका है!" जवाब मिला – "अरे, मैं पहले रह चुकी हूँ, बहुत अच्छा लगा था!"

अब हमारे रिसेप्शनिस्ट को समझ नहीं आया कि मांग क्या थी – ऊपर का कमरा, पर ना सुनसान, फिर सुनसान बिल्डिंग में रहना पसंद! आख़िरकार, वही पहला कमरा पसंद आ गया और मामला खत्म।

मेहमानों की फरमाइशें – कभी खत्म नहीं होतीं!

अगर आपने होटल या रिसॉर्ट में काम किया है, तो आपको पता होगा – मेहमानों की मांगें कभी-कभी इतनी अजीब होती हैं कि आप हंस पड़े बिना रह नहीं सकते। एक कमेंट में d4sbwitu नाम के सदस्य ने लिखा कि एक महिला ने "शांत और ऊपरी मंजिल का कमरा" मांगा, क्योंकि पहली मंजिल पर डर लगता है। जब सुनसान कॉर्नर रूम दिया गया, तो शिकायत – "यहां अंधेरा है, कोई छुप सकता है!" रिसेप्शनिस्ट सोच रहा था, "कहां छुपेगा भाई? दीवार में घुस जाएगा क्या?"

ऐसी ही एक और कहानी NervousGate7902 ने सुनाई – बार-बार अपग्रेड मांगने वाले मेहमान, जिनका पिछली बार ऑफ-सीजन में अपग्रेड हो गया था, मगर इस बार भीड़ में नहीं मिला तो शिकायतें शुरू!

भारत में ऐसी फरमाइशें खूब देखने को मिलती हैं – "कमरा रोड साइड न हो, बालकनी भी हो, और पड़ोस में कोई न हो, लेकिन बिलकुल अकेले भी न रहें!" होटल वाले कभी-कभी तो सिर पकड़ लेते हैं।

रिसेप्शनिस्ट की मुश्किलें: "ना घर का, ना घाट का!"

रिसेप्शनिस्ट की हालत भारतीय "दो नावों में सवार" जैसी हो जाती है। उधर ग्राहक की फरमाइशें बदलती रहती हैं, इधर कमरों की उपलब्धता भी अपनी जगह। Reddit पर mesembryanthemum ने लिखा – "हमारे होटल में केवल दो मंजिलें थीं, फिर भी लोग कहते – इससे ऊपर वाला कमरा चाहिए!" जैसे भारतीय शादी में बारातियों के लिए AC डिनर मांगना, मगर बिजली कट जाए तो सबको गुस्सा!

कई बार तो रिसेप्शनिस्ट को लगता है, काश कमरे जादू से बदल पाते, जैसे पुरानी हिंदी फिल्मों में हीरोइन पल भर में नए कपड़े पहन लेती थी!

हँसी-मज़ाक और सीख

इस पूरी कहानी में सबसे मज़ेदार बात यह रही कि मेहमान बहुत प्यारी थीं, बस उनकी फरमाइशें विरोधाभासी थीं। Reddit पर एक कमेंट Overtlytired-_- ने लिखा, "मुझे वो मीम याद आ गया जहाँ कोई शांति का साइन दिखाता है और फिर अचानक गायब हो जाता है!" यानी, मांग पूरी करो तो नई मांग, वो भी न मिले तो पुरानी मांग पर लौट आओ।

हमारे देश में भी अक्सर लोग होटल में पहुंचकर, कमरा पसंद न आए तो कह देते हैं – "अरे भैया, कोई और कमरा दिखाइए ना, यहाँ तो हवा कम लग रही है!" होटल वाले समझाते-समझाते थक जाते हैं। कभी-कभी तो मेहमान खुद भी हँस पड़ते हैं, "चलिए वही कमरा दे दीजिए जो पहले था!"

निष्कर्ष: आपकी सबसे मज़ेदार होटल वाली याद?

तो दोस्तों, होटल या रिसॉर्ट में काम करना जितना चुनौतीपूर्ण है, उतना ही रोचक भी। हर दिन नई कहानियाँ, नए लोग, और उनकी अनोखी मांगें – कभी हँसी, कभी सिरदर्द, लेकिन यादें ज़रूर बन जाती हैं।

क्या आपके साथ भी कभी ऐसी कोई मज़ेदार या अजीब होटल-रिसॉर्ट की घटना हुई है? अपने अनुभव कमेंट में ज़रूर साझा करें। अगले सफर पर जाते समय, होटल वाले की मेहनत का भी ध्यान रखें – और कभी-कभी खुद भी मुस्कुरा लें!

आख़िरकार, हर मेहमान प्यारा होता है, चाहे उसकी फरमाइशें कितनी भी उल्टी-पुल्टी क्यों न हों!


मूल रेडिट पोस्ट: I want a room that is not on the ground and not secluded!