पुराने बॉस की चालाकी पर पड़ा भारी – कैसे एक छोटी सी बदले की भावना ने सजा दिलवाई
कभी-कभी ज़िंदगी ऐसे मोड़ पर ले आती है जब इंसान को अपने पुराने दर्द और गुस्से का हिसाब चुकता करने का मौका मिल जाता है। ये कहानी भी ऐसी ही है – जिसमें एक कर्मचारी ने अपने पुराने बॉस की चालाकी पर ऐसा तगड़ा जवाब दिया कि पूरा मुहल्ला तालियां बजाने लगा! अगर आपने कभी किसी बेहूदा या ज़ालिम बॉस के तानों का सामना किया है, तो ये किस्सा आपको दिल से मज़ा देगा।
बॉस की धांधली, कर्मचारी की चालाकी
हमारे किस्से के नायक पहले एक साइन बोर्ड बनाने वाली दुकान में काम करते थे। पुराने ज़माने के बॉस की तरह ये भी बड़े तानाशाह, ज़िद्दी और कर्मचारियों को हमेशा नीचा दिखाने वाले थे। ऑफिस का माहौल ऐसा था जैसे हर छह महीने में लोग बोरिया-बिस्तर बांध कर भाग निकलते। एक दिन, कुछ ऐसा हुआ कि नायक ने unsafe (असुरक्षित) काम करने से मना कर दिया, तो बॉस ने धमकी दी – या तो काम करो या निकलो! भाई साहब भी स्वाभिमानी थे, नौकरी छोड़ दी और बॉस की शिकायत भी कर दी।
इतिहास की गलियों में बदला
समय बीत गया। नायक अब एक नई दुकान में खुश थे, पर किस्मत को कुछ और मंज़ूर था। एक दिन, वो अपने शहर के पुराने हिस्से में (जिसे हम ‘हेरिटेज जोन’ कहते हैं) घूमने गए। ये इलाका वैसा ही है जैसे हमारे देश में लाल किला या चांदनी चौक – पुराने ज़माने की इमारतें, हर कोने में इतिहास की खुशबू।
इसी दौरान उन्होंने देखा – पुराने ऑफिस की वैन खड़ी है और कर्मचारी एक ऐतिहासिक इमारत की दीवार में ड्रिल कर रहा है और उस पर साइन बोर्ड लगा रहा है। सोचिए, जैसे कोई पुरानी हवेली की दीवार पर विज्ञापन चिपका दे! मज़े की बात, ये बोर्ड एक हाथ से बनी पुरानी पेंटिंग को ढंक रहा था, जिसमें उस जगह की कहानी थी। और ये सब सिर्फ़ एक टॉफी की दुकान के समर सेल के लिए!
कानून की लाठी – जिसे समझ ना आए, उसकी शामत
हमारे यहां भी नगर निगम या पुरातत्व विभाग की तरह, वहां हेरिटेज कमेटी होती है, जो हर बदलाव की मंजूरी देती है। नायक को पता था कि बिना परमिशन ये सब गैरकानूनी है। उन्होंने तुरंत फोटो खींची, ध्यान रखा कि कर्मचारी का चेहरा न आए, और साइन शॉप की वैन के साथ सबूत इकट्ठा कर ईमेल से हेरिटेज सोसाइटी को भेज दिया।
अब असली फिल्मी मोड़ आया। शुक्रवार को नए ऑफिस में बॉस ने आते ही पूछा – "सुना क्या? पुराने साइन शॉप वालों ने हेरिटेज बिल्डिंग को नुकसान पहुंचाया, उन पर जुर्माना भी लग गया। अब तो बड़ी मुश्किल में हैं!" नायक ने चुपचाप फोन निकाला, फोटो और ईमेल दिखा दी। बॉस हंस पड़े – "क्या बात है, शाबाश! सही बदला लिया!"
कम्युनिटी की राय – तालियों और चुटकुलों की बारिश
Reddit के कमेंट्स तो जैसे अपने ही मोहल्ले की चटपटी गप्पें लग रहे थे। एक यूज़र ने लिखा – "बिल्कुल सही बदला लिया, और साथ में समाज की सेवा भी हो गई!" कोई बोला – "वाह! कमाल कर दिया!" एक और कमेंट में मिर्च-मसाला था – "अच्छा हुआ, खुद ही फंदा अपने गले में डाल लिया!"
कुछ लोगों ने अपने अनुभव भी बांटे – एक ने बताया कि उनका भी एक पुराना बॉस जेल गया, और जब भी वो उसकी याद करते हैं, तो हंसी नहीं रुकती। एक महिला ने लिखा – "औरत होना ही मुश्किल है, ऐसे बॉस तो और भी मुश्किल बना देते हैं।" किसी ने मज़ेदार अंदाज में कहा – "हेरिटेज कमेटी के सामने तो बड़े-बड़े सूरमा भी पानी मांगते हैं!"
सीख – पुराने जख्मों का मीठा बदला
कहानी का असली मज़ा तो तब आया जब नायक के नए बॉस ने भी ठहाका लगाया – "अगर मेरे साथ भी ऐसा करना पड़े तो कर लेना, लेकिन मैं तो अपनी टीम का ख्याल रखता हूं।" यही फर्क है अच्छे और घटिया बॉस में!
हमारे यहां भी दफ्तरों में अकसर ऐसा होता है – बॉस अपनी गलती किसी और पर डाल देते हैं या स्टाफ का हौसला तोड़ते हैं। लेकिन जब कर्म का चक्कर चलता है, तो गुनहगार को उसकी सजा जरूर मिलती है – चाहे वो सोशल मीडिया पर हो या किसी सरकारी विभाग में।
आपके अनुभव?
क्या आपने कभी अपने ऑफिस में ऐसा कोई किस्सा झेला है? क्या कभी किसी बॉस की बदमाशी का मीठा बदला लिया है? नीचे कमेंट में जरूर बताएं – आपकी कहानी किसी और को हिम्मत दे सकती है!
अगर आपको ये मजेदार किस्सा पसंद आया हो, तो अपने दोस्तों के साथ शेयर करें और ऐसे और प्यारे किस्सों के लिए जुड़े रहें। आखिरकार, सच्चा बदला वही है जिसमें थोड़ा मजा, थोड़ा तड़का और समाज की भलाई भी हो!
मूल रेडिट पोस्ट: Got my old Boss in trouble and fined.