पार्किंग के बहाने, मुफ्त की चाह: होटल रिसेप्शन पर एक मज़ेदार किस्सा
होटल में काम करने वालों की ज़िंदगी वैसे ही हर दिन नई-नई कहानियों से भरी रहती है। कभी कोई मेहमान अपने कमरे की तकिया को लेकर शिकायत करता है तो कोई AC की आवाज़ से परेशान हो जाता है। लेकिन हाल ही में एक होटल रिसेप्शनिस्ट के साथ हुआ किस्सा कुछ अलग ही था—जहाँ पार्किंग के बहाने, मुफ्त की चाह को देखकर हँसी भी आ गई और हैरानी भी!
शिकायत की शुरुआत: बर्फ़ की चादर, शिकायती मेहमान और "शाइनी रॉक" की तलाश
कहानी शुरू होती है एक सर्द सुबह से, जब होटल के रिसेप्शनिस्ट (जिन्होंने हाल ही में जॉइन किया है) अपनी ड्यूटी पर थे। बाहर बर्फ़ गिर रही थी, पार्किंग में सफ़ेदी ही सफ़ेदी थी—जैसा कि उत्तर भारत या हिमालयी इलाकों में अक्सर देखने को मिलता है। होटल के एक-तिहाई कमरे तो वैसे भी मरम्मत के चलते बंद थे, इसलिए पार्किंग में जगह की किल्लत नहीं थी।
तभी सीसीटीवी पर दो मेहमान (मान लें GG1 और GG2) सीढ़ियों से नीचे आते दिखे। GG1 पूरे जोश में शिकायत लेकर आया, GG2 उसकी हर बात पर ‘हाँ में हाँ’ मिलाने के लिए तैयार था—बिल्कुल वैसे जैसे हिंदी फिल्मों में हीरो के पीछे-पीछे चलता उसका दोस्त!
GG1 ने आते ही शिकायत की, "इतने दिन से बर्फ़ नहीं गिरी, फिर भी आपकी पार्किंग इतनी खराब क्यों है? मुझे तो गाड़ी पार्क करने में ही मुश्किल हो गई। और आपके shiny rock (शानदार पत्थर वाली) पार्किंग की जगह तो बिल्कुल गायब है!" इतना कहकर वो धमकी भी देता है, "शायद मुझे रिफंड लेकर कहीं और जाना पड़ेगा।"
अब रिसेप्शनिस्ट भी हैरान! भाई, बर्फ़ तो अभी भी गिर रही है, और जनाब ऊपर जाकर सारा सामान भी सेट कर आए हैं, फिर भी अब पार्किंग की शिकायत लेकर आए हैं? ये तो वही बात हो गई—"खीर खाने के बाद कटोरी में कीड़ा ढूंढना!"
जुगलबंदी का कमाल: एक बोले, दूसरा दोहराए
GG1 की शिकायत खत्म भी नहीं होती, तभी GG2 तोते की तरह वही बातें दोहराने लगा—"हाँ, बिल्कुल! पार्किंग साफ़ नहीं है, plow (बर्फ साफ़ करने वाली मशीन) को बोलना चाहिए था!"
यहाँ पर एक पाठक ने बड़े मज़ेदार ढंग से कमेंट किया—"GG2 तो जैसे तोता बन गया, एक बोले, दूसरा तुरंत दोहराए!" हिंदी कहावत ‘साथी हाथ बढ़ाना’ तो सुना ही होगा, लेकिन यहाँ तो ‘साथी बात दोहराना’ चल रहा था।
रिसेप्शनिस्ट ने भी बड़ी समझदारी से जवाब दिया—"सर, क्या आपको भी एक फिज़िकल चाबी चाहिए?" GG2 ने तुरंत ‘हाँ’ में हामी भर दी। लेकिन GG1 ने फिर वही शिकायती सुर पकड़ा—"देखिए, मुझे पता है पार्किंग आपकी जिम्मेदारी नहीं है, लेकिन फिर भी कुछ किया जा सकता था।"
मुफ्त की चाह: छूट की खेती, कल की शिकायत आज बोना
होटल इंडस्ट्री में ये आम बात है कि कुछ मेहमान हर बात में कमियां निकालते हैं—मकसद होता है मुफ्त में कोई फायदा लेना। एक पाठक ने कमेंट किया, "ये लोग साफ़-साफ़ छूट के लिए जमीन तैयार कर रहे हैं, आखिरी दिन छूट या डिस्काउंट की मांग करेंगे।"
रिसेप्शनिस्ट का जवाब भी कमाल का था—"ऐसे लोगों को मैं फ्री पेन दे देता हूँ, जैसे सांत्वना पुरस्कार—‘लो भैया, कोशिश की तो सही, ये रहा पेन!’"
एक और पाठक ने व्यंग्य करते हुए लिखा—"कभी-कभी तो ऐसे लोग शिकायत की शुरुआत में ही बताते हैं, ‘छोटी सी बात है...’, और फिर checkout के समय लंबी चौड़ी रामकहानी शुरू कर देते हैं।"
हमारी संस्कृति में "शिकायत" का रंग
भारतीय समाज में भी ऐसे लोग मिल ही जाते हैं—कोई शादी में खाना ठंडा बताता है, कोई ट्रेन में सीट गंदी होने की शिकायत करता है, और कई बार तो लोग बस इसलिए शिकायत करते हैं कि कहीं मुफ्त में मिठाई, पानी या डिस्काउंट न मिल जाए!
यहाँ GG1 और GG2 की जोड़ी भी कुछ वैसी ही लगी—"न रहेगा बांस, न बजेगी बाँसुरी!" जब असली समस्या थी नहीं, तो पार्किंग का बहाना ही बना लिया।
निष्कर्ष: हँसी में बदल गई शिकायत
अंत में, रिसेप्शनिस्ट ने भी इसे दिल पर नहीं लिया और अपनी कहानी Reddit पर सभी के साथ बाँट दी। पाठकों ने भी खूब हँसी उड़ाई—"ऐसे मेहमानों के लिए एक ऐप होना चाहिए—जहाँ वे अपनी शिकायतों की रेटिंग दें, और रिसेप्शनिस्ट उन्हें ‘समय बर्बाद करने’ का एक तारा दे सकें!"
शिकायत करना कोई बुरी बात नहीं, लेकिन जब मकसद सिर्फ मुफ्त में फायदा उठाना हो, तो वो मजाक बन जाता है।
आपकी राय क्या है?
क्या आपने कभी ऐसा कोई वाकया देखा या झेला है, जहाँ लोग बेवजह शिकायत कर सिर्फ छूट या फ्री का सामान लेना चाहते हों? अपने अनुभव हमारे साथ जरूर साझा करें, और इस मजेदार किस्से पर अपनी प्रतिक्रिया नीचे कमेंट में लिखना न भूलें!
मूल रेडिट पोस्ट: Parking lot patrol