पानी वाले पार्क में ‘करन’ की छुट्टी! जब बच्चों ने दिखाई छोटी सी बदमाशी
गर्मी की छुट्टियों का नाम सुनते ही हर बच्चे के चेहरे पर मुस्कान आ जाती है, और अगर कहीं वाटरपार्क जाने का मौका मिल जाए तो क्या ही कहने! लेकिन सोचिए, अगर खेल के मैदान में कोई ‘करन’ (यानी अपनी मनमर्जी चलाने वाली आंटी) आ जाए, तो बच्चों का क्या हाल हो सकता है? आज हम लेकर आए हैं ऐसी ही एक मज़ेदार और चुटीली ‘पेटी रिवेंज’ की कहानी, जिसमें बच्चों ने खेल-खेल में ही बड़ों को मात दे दी।
वाटरपार्क का जश्न और ‘करन’ की चालाकी
यह किस्सा यूरोप के एक बड़े सार्वजनिक स्विमिंग पूल की है, जहां गर्मी में परिवारों के लिए ‘पूल ओलंपिक्स’ का आयोजन हुआ था। अब हमारे भारत में तो मोहल्ले की गली में क्रिकेट या कबड्डी होती है, मगर वहाँ पानी में अजब-गजब खेल! हर टीम में 5 सदस्य—हमारी कहानी की टीम में दो 12 साल की लड़कियाँ, दो 11 साल के लड़के और एक माँजी थीं। पहले कुछ खेल हुए, सबने बहुत मज़ा लिया और फिर आया सेमीफाइनल राउंड—जिसमें एक सदस्य को तैरते हुए रबर फ्लेमिंगो (फ्लोटिंग टॉय) पर बैठना था, बाकी टीम उसे खींचते हुए पूल के एक किनारे से दूसरे किनारे तक ले जाते।
अब यहाँ मज़ा तब आया जब सबको पता चला कि एक लेन (pool lane) दूसरी से तेज़ है। हमारे बच्चों ने समझदारी दिखाते हुए तेज़ लेन पकड़ ली, लेकिन तभी आईं ‘करन’—अपनी टीम, पति और दो किशोर बेटों के साथ। उन्होंने बच्चों के हाथ से फ्लेमिंगो छीन लिया, और आयोजक—जो कि कॉलेज के विद्यार्थी थे—कुछ देख ही नहीं पाए। बच्चों के लिए बड़ों से भिड़ना आसान नहीं, सो करन की टीम ने जैसे-तैसे ये राउंड कब्ज़े में कर लिया।
बच्चों की मायूसी और माँ की चुटीली सलाह
रेस के बाद बेटा बहुत दुखी और गुस्से में था—जैसे हमारे यहाँ गलियों में क्रिकेट में कोई बड़ा बच्चा बैट छीन ले तो छोटे बच्चे का दिल टूट जाता है। वही हाल यहाँ भी था। बेटा न्याय न मिलने से हताश था। पर माँ ने भी क्या कमाल की सलाह दी—"अगर मेरी जगह तुम होते, तो करन का मज़ा किरकिरा कर देते!" बस, बेटे की आँखों में चमक आ गई, और दोस्तों के साथ मिलकर उसने अगली रणनीति बना ली।
फाइनल राउंड: ‘पानी-पानी’ हुई करन
फाइनल राउंड में प्रतियोगियों को पूल के पार जाकर चीज़ें इकट्ठा करनी थीं, और आयोजकों ने बाकी बच्चों को पानी वाली बंदूकें (water guns) थमा दीं—यानी पूरा महौल हो गया था होली के मैदान जैसा! अब बेटा और उसका दोस्त फोकस किए बैठे थे—उनका एक ही टारगेट था, करन आंटी! जैसे ही रेस शुरू हुई, दोनों ने करन आंटी पर पानी की बौछार कर दी। करन जैसे ही बाहर भागीं, बेटे ने ‘हेडशॉट!’ बोलकर दोस्त को इशारा किया—पूरा माहौल खिलखिला उठा। करन पूरी तरह थक गईं, और रेस भी हार गईं!
यहाँ माँ ने भी थोड़ा देसी तड़का लगाया—जैसे गलियों में दौड़ में आगे निकलने वाले को रोकने के लिए कोई सामने आ जाए, वैसे ही जब करन बाहर दौड़ीं, माँ बार-बार उनके रास्ते में आ गईं। करन इधर-उधर बचती रहीं, पर माँ भी ‘बिल्कुल अनजाने में’ रास्ता बदलती रहीं। आखिरकार करन कुछ सेकंड्स पीछे रह गईं—और जीती बच्चों की टीम!
‘पेटी रिवेंज’ पर कम्युनिटी के मज़ेदार तंज
रेडिट की कम्युनिटी भी इस किस्से पर खूब हंसी। एक यूज़र बोले—"बिल्कुल परफेक्ट लेवल की बदमाशी थी, क्या बात है!" (Perfect level of petty, well done!)। एक और ने चुटकी ली—"वो छोटा सा शरारती बच्चा!" (That little squirt!)। एक अन्य ने लिखा—"अद्भुत है कि आपने अपने भाई को फिर से खेल में मज़ा दिला दिया!" (Awesome how you helped your brother get back to enjoying the fun!)। और किसी ने तो ‘रेवेंज सर्वड स्विमिंगली’ तक कह दिया—यानि जैसे हमारे यहाँ कहते हैं, न्याय पानी में डूबते-डूबते मिल गया!
क्या सीखा: कभी-कभी छोटी बदमाशी भी ज़रूरी है!
इस किस्से से यही सिखने को मिलता है—कभी-कभी, जब कोई ‘करन’ बन जाए, तो छोटी सी चतुराई और टीमवर्क से बड़े से बड़े को भी मज़ा चखा सकते हैं। बच्चों की मासूमियत और माँ की चालाकी ने मिलकर पूरा खेल ही पलट दिया। और सबसे बड़ी बात—मज़ा तभी है जब खेल में न्याय हो, वरना ‘पेटी रिवेंज’ का तड़का लगाना बनता है!
अंत में – आपकी क्या राय है?
क्या आपके साथ कभी ऐसा हुआ है, जब किसी ने आपके हक़ का मौका छीन लिया हो? या आपने कभी ऐसी ‘पेटी रिवेंज’ ली हो? अपनी मज़ेदार यादें नीचे कमेंट में ज़रूर साझा करें। और हाँ, याद रखिए—कभी-कभी, छोटी सी बदमाशी भी दिल को बड़ी खुशी दे जाती है!
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मूल रेडिट पोस्ट: Fun in the waterpark