पांच सितारा होटल में दक्षिण से आया अजनबी: एक जुगाड़ू मेहमान की कहानी
कहते हैं दुनिया में हर किसी का अपना अंदाज है, और होटल के रिसेप्शन पर तो रोज़ तरह-तरह के किरदार मिल ही जाते हैं। मगर आज जो किस्सा मैं सुनाने जा रहा हूँ, वो न केवल अजीब है, बल्कि बड़े मजेदार अंदाज में इंसान की जुगाड़ू सोच को भी दिखाता है। सोचिए, अगर आपके होटल में कोई मेहमान बिना बुकिंग के आए, महंगी दावत उड़ाए और फिर मुस्कुराते हुए बोले – "पुलिस बुला लीजिए, मैं तो यहीं बैठा हूँ!"...
अब शुरू होती है असली कहानी, जिसमें है ब्रिटेन के एक 5 स्टार होटल का माहौल, एक अजनबी मेहमान, और उसकी जुगाड़ू दिमाग़ का जलवा।
होटल में आया अनोखा मेहमान – बातों का बादशाह
रात का वक्त था, होटल की लॉबी में हल्की-हल्की रौनक। तभी एक सज्जन दाखिल हुए, जिनका अंदाज पहली ही नजर में थोड़ा हटकर लगा। बातचीत में वो कभी अपने तीन-तीन PHD की चर्चा करते, कभी किसी रहस्यमयी साजिश (conspiracy theory) पर लंबी-लंबी फेंकते। होटल स्टाफ को लगा, साहब शायद ऑटिज़्म स्पेक्ट्रम के किसी कोने पर होंगे, लेकिन जरा भी नुकसानदेह नहीं, बस अलग से।
जनाब ने 3 कोर्स का बढ़िया खाना और महंगी वाइन ऑर्डर की। खाना बड़े ठाठ से खाया, वेटर को मुस्कुरा कर देखा, और जब बिल आया – £150 से ऊपर का! – तो कह दिया, "मेरे पास तो पैसे हैं ही नहीं।"
होटल स्टाफ की परेशानी और मेहमान की मासूमियत
अब बताइए, हमारे यहां तो अगर कोई ढाबे पर भी उधारी कर जाए, तो मालिक उसके पीछे दौड़ता है। यहां पांच सितारा होटल में मामला फंस गया। मैनेजर आए, समझाया, धमकाया – "भैया, पैसे दो, वरना पुलिस आएगी।" मगर साहब बड़े ठंडे दिमाग से बोले, "कोई बात नहीं, पुलिस बुला लीजिए, मैं यहीं बैठा हूँ।"
पुलिस आई, तो जनाब ने बड़े सलीके से नाम-पता बताया। कोई हंगामा, कोई बदतमीज़ी नहीं। पुलिस ने जांच की, तो पता चला – ये साहब तो 150 मील दूर एक ऐसे शेल्टर्ड होम से हैं, जहां विशेष ज़रूरतों वाले लोग रहते हैं। सुबह से गायब थे, और उनकी मिसिंग रिपोर्ट भी दर्ज हो चुकी थी।
जुगाड़ का लेवल: एक्सपर्ट!
सोचिए, जनाब ने क्या चाल चली! आराम से स्टेशन से बस पकड़ी, नए शहर आए, 5 स्टार होटल में लजीज खाना खाया, वाइन का मजा लिया और आखिर में खुद ही कहा, "अब घर जाना है, पुलिस बुला लीजिए!" पुलिस आई, उन्हें मेंटल हेल्थ एक्ट के तहत सुरक्षित घर भेज दिया गया।
कई पाठकों को ये किस्सा सुनकर ओ.हेनरी की कहानी 'द कॉप एंड द एन्थम' याद आ गई – जिसमें एक गरीब सर्दी से बचने के लिए जेल जाने का जुड़ाड़ करता है। एक कमेंट में तो किसी ने लिखा, "ये तो जीनियस है! पागलपन का मतलब ये नहीं कि दिमाग कमज़ोर हो।"
एक और पाठक को अमेरिका का एक किस्सा याद आया – वहां एक बेघर आदमी इसी तरह महंगे होटल-रेस्तरां में खाना खाकर खुद को गिरफ़्तार करवाता था, ताकि ठंड में उसे जेल में रहना मिले।
कुछ और लोगों ने कहा – "साहब ने बस अच्छा खाना खाना चाहा, उम्मीद है होटल वाले इसे टैक्स में एडजस्ट कर लेंगे।"
और एक ने तो मजेदार बात कही – "England में eccentric लोग तो हमेशा से रंग जमा कर रखते हैं, यही तो इसकी खूबसूरती है!"
समाज, संवेदनशीलता और हमारी सोच
हमारे देश में भी ऐसे कई लोग हैं जो अपनी ज़रूरतें बताने में झिझकते नहीं, कभी रेलवे स्टेशन पर, कभी बस में, कभी किसी होटल में। पर यहां समाज अक्सर या तो मज़ाक उड़ाता है, या पुलिस का डर दिखाता है। विदेशों में थोड़ा फर्क है – वहां ऐसे मामलों को संवेदनशीलता से संभाला जाता है। यहां भी हमें सीखने की जरूरत है कि हर अजीबोगरीब हरकत के पीछे कोई मजबूरी, कोई मन की बात छुपी हो सकती है।
इस कहानी में होटल स्टाफ ने भी संयम दिखाया, पुलिस ने भी इंसानियत, और सबसे बड़ी बात – उस मेहमान की मासूम जुगाड़ को सलाम!
क्या आप भी कभी ऐसे जुगाड़ू किरदार से मिले हैं?
कहानी का मजा यहीं खत्म नहीं होता। अब आपकी बारी! क्या आपके साथ भी कभी किसी होटल, बस, या ट्रेन में ऐसा कोई वाकया हुआ है? या किसी ऐसे जुगाड़ू इंसान से मुलाकात हुई हो, जिसने ज़िंदगी को अपने ही अंदाज में जिया हो?
नीचे कमेंट में जरूर बताइए – आपकी बातों में भी शायद कोई नई कहानी छुपी हो!
याद रखिए, दुनिया में हर किरदार कुछ सिखा जाता है – बस नज़र चाहिए देखने की।
मूल रेडिट पोस्ट: The Stranger from The South