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नो फोन पॉलिसी' पर भिड़ंत: जब बॉस की सख्ती उन्हीं पर भारी पड़ गई

कार्य के दौरान डेस्क पर बैठे एक निराश IT सपोर्ट कर्मचारी, फोन कॉल्स को अनसुना कर रहा है।
इस गतिशील एनिमे-शैली की चित्रण में, हम एक दृढ़ IT सपोर्ट कर्मचारी को देखते हैं जो नए प्रबंधक की सख्त फोन नीति के बावजूद उत्पादकता को प्राथमिकता दे रहा है।

आजकल के ऑफिस में मोबाइल फोन रखना कोई बड़ी बात नहीं है। खासकर IT सेक्टर में, जहां कभी भी सर्वर डाउन हो सकता है या ऑफिस के बाहर से भी किसी की कॉल आ सकती है। लेकिन सोचिए, अगर अचानक आपका बॉस सख्त नियम बना दे कि "काम के समय मोबाइल फोन रखना सख्त मना है, कोई बहाना नहीं चलेगा!" — तो क्या होगा?

यही हुआ एक मझोले IT कंपनी में, जहां सबकुछ आराम से चल रहा था, जब तक कि नया मैनेजर नहीं आया। इस कहानी में रोमांच, हंसी और 'जैसा करोगे वैसा भरोगे' वाला ट्विस्ट सबकुछ है!

ऑफिस की सख्ती और "नो फोन" का फरमान

आपने अक्सर सुना होगा, "नया मैनेजर आया है, अब सब बदल जाएगा!" यहाँ भी वही हुआ। एक दिन मैनेजर ने देखा कि एक कर्मचारी डेस्क पर बैठकर फोन पर टेक्स्ट पढ़ रहा है। बस, फिर क्या था! गुस्से में तमतमाते हुए पूरे ऑफिस में ईमेल चला गया — "अब से कोई भी पर्सनल फोन डेस्क पर नहीं रहेगा। सब लोग अपने फोन गाड़ी या लॉकर में रखेंगे। काम के घंटों में कोई अपवाद नहीं, वरना कार्रवाई होगी।"

अब हमारे IT कर्मचारी भाई सोच में पड़ गए। 'भैया, जब घर में किसी की तबीयत खराब हो या कोई जरूरी कॉल आए तो क्या करें? लेकिन बॉस का हुक्म है तो मानना पड़ेगा।'

नियम का पलटा: जब खुद के जाल में फंसा बॉस

यहाँ कहानी में असली मजा तब आया जब उसी मैनेजर की 'नो फोन' पॉलिसी उसके लिए ही मुसीबत बन गई!

दरअसल, मैनेजर खुद तीन दिन वर्क फ्रॉम होम करता था। जब भी कोई बड़ा सर्वर इश्यू आता, चाहे वीकेंड हो या ऑफिस टाइम के बाद, सबको अपने पर्सनल फोन पर ही कॉल करता था। कंपनी ने कोई ऑफिसियल मोबाइल दिया ही नहीं था!

एक शुक्रवार को शाम 4:45 बजे सर्वर में बड़ा इश्यू आ गया। हमारे IT कर्मचारी ने देखा भी, लेकिन उसके पास फोन तो गाड़ी में था — बॉस की पॉलिसी के मुताबिक! उसने चुपचाप अपना काम खत्म किया, 5 बजे ऑफिस से निकला, और 5:15 पर गाड़ी में जाकर फोन देखा। उधर, बॉस के 17 मिस्ड कॉल्स और ढेर सारे घबराए हुए मैसेज!

फोन मिलाने पर बॉस आगबबूला — "तुमने कॉल क्यों नहीं उठाया?"

कर्मचारी ने बड़ी मासूमियत से जवाब दिया, "सर, आपकी पॉलिसी थी — नो फोन ड्यूरिंग वर्किंग ऑवर्स! मैं तो नियम निभा रहा था, नहीं तो आप मुझे डांट देते।"

बॉस के पास बोलने के लिए कुछ बचा ही नहीं। सोमवार को नया ईमेल आया — "पर्सनल फोन इमरजेंसी के लिए डेस्क पर रख सकते हैं।" यानी सब फिर से पुराने ढर्रे पर!

"जैसा करोगे, वैसा भरोगे" — कम्युनिटी की चटपटी प्रतिक्रिया

रेडिट पर इस किस्से ने खूब धमाल मचाया। एक यूज़र ने कहा, "अगर मैं होता तो सीधा घर चला जाता, फोन तभी देखता!" दूसरे ने जोड़ा, "मैं तो फोन गाड़ी में रखने के बजाय घर ही छोड़ आता, चोरी का भी डर रहता।"

एक और मजेदार कमेंट था, "भैया, अगर आप चाहते हो कि हम इमरजेंसी में भी फोन उठाएं, तो कंपनी फोन दो या ऑन-कॉल भत्ता दो।" यह बात सच भी है — भारत में भी कई IT कंपनियां साइबर सिक्योरिटी या सर्वर इश्यू के लिए ऑन-कॉल अलाउंस देती हैं, और कंपनी फोन भी देती हैं ताकि कर्मचारी और निजी ज़िंदगी अलग रह सके।

कुछ ने तो ऑफिस की पॉलिसी पर तंज कसते हुए लिखा, "मैनेजर तो ऐसा निकला जैसे किसी चीज़ को मैनेज करने के नाम पर उल्टा खुद ही फंस गया!" एक सज्जन ने लिखा, "अगर ऑफिस के काम के लिए मेरा पर्सनल फोन चाहिए, तो पहले उसका बिल भी कंपनी भरे!"

यहाँ तक कि किसी ने अपने अनुभव शेयर किए कि कैसे मैनेजर ने जबरदस्ती फोन पर कंपनी का सॉफ्टवेयर लगवाने की कोशिश की, तो उसने मना कर दिया — "सर, या तो कंपनी फोन दो, या मेरे फोन को छेड़ना बंद करो!"

भारतीय कार्य-संस्कृति में संदेश

हमारे यहाँ भी अक्सर बॉस 'डिसिप्लिन' के नाम पर ऐसे नियम बना देते हैं, जिनका असर खुद उन पर ही उल्टा पड़ जाता है। ये किस्सा दिखाता है कि नियम बनाते वक्त जमीन से जुड़े रहना चाहिए। कर्मचारी कोई मशीन नहीं, इंसान है — उसकी भी फैमिली है, उसकी भी इमरजेंसी हो सकती है।

साथ ही, आज के डिजिटल युग में, जब ज़रूरत पड़ी तो वही फोन चाहिए होता है — चाहे ऑफिस के लिए, चाहे घर के लिए। इसलिए, संतुलन और समझदारी से नियम बनाना ही बेहतर है।

निष्कर्ष: आपकी राय क्या है?

तो दोस्तों, इस किस्से से हमें यही सीख मिलती है — जब भी कोई नया नियम बने, तो ज़रा सोच-समझकर बनाएं, वरना 'चिड़िया चुग गई खेत' वाली कहावत सच हो जाती है!

क्या आपके ऑफिस में कभी ऐसा कुछ हुआ है? क्या आपके बॉस ने भी कभी उल्टे-पुल्टे नियम बनाए हैं? या आप ही वो बॉस हैं, जो अब सोच रहे हैं — "अरे, मैंने भी तो ऐसा किया था!" अपनी राय और मजेदार किस्से कमेंट में जरूर शेयर करें।

पढ़ने के लिए धन्यवाद — ऑफिस की दुनिया की और भी कहानियों के लिए जुड़े रहिए!


मूल रेडिट पोस्ट: Manager said 'no phones during work hours, period.' So I stopped answering his calls.