नया साल, पुराना झमेला: एक छोटे होटल के रिसेप्शन पर बिताई गई दिल दहला देने वाली रातें
नया साल, नई उम्मीदें! लेकिन सोचिए, जब आप अपना साल होटल के रिसेप्शन पर शुरू करते हैं और आपके सामने रोज़मर्रा की एक-से-एक फिल्मी घटनाएं घटती हैं—तो क्या हो? विदेशों में रिसेप्शनिस्ट होना भी किसी बॉलीवुड थ्रिलर से कम नहीं! आज मैं आपको सुनाने जा रहा हूँ एक ऐसे ही होटल रिसेप्शनिस्ट की कहानी, जिसने नए साल की रात को जो कुछ देखा-सुना, वो शायद आप अपने मोहल्ले के चौकीदार से भी सुनना पसंद न करें।
जब बिजली गई, सब्र आ गया
सोचिए, नए साल की रात—पूरा होटल मेहमानों से भरा हुआ, हर कोई जश्न के मूड में। तभी अचानक 9:30 बजे बिजली गुल! वजह? होटल के पास ही एक गाड़ी बिजली के खंभे से टकरा गई और पूरा इलाका अंधेरे में डूब गया। ऊपर से बारिश मानो श्रीदेवी की 'मौसम का जादू' गा रही हो—अंधेरा, पानी और होटल का स्टाफ बेचारा परेशान। वैसे हैरानी की बात ये रही कि ज्यादातर मेहमान बहुत धैर्यवान निकले, बस एक जनाब थे जो बार-बार अपनी बत्ती जलाए रख रहे थे—मतलब, वो बार-बार पूछ रहे थे कि रुकने की अवधि कैसे बढ़ाएं, जब बिजली ही नहीं है!
शिकायतों की बौछार से लेकर 'माचिस' तक
बिजली आई तो लगा अब शांति मिलेगी, लेकिन किस्मत को तो अभी असली मजा आना बाकी था। एक साहब होटल में घुसकर चिल्लाने लगे कि उन्हें दो हफ्ते पहले बिना रुके ही बिल पकड़ाया गया। रिसेप्शनिस्ट ने समझाया कि ये मामला मैनेजर के समय ही सुलझेगा, लेकिन साहब तो मानो जिद्दी बच्चे—कह दिया, "मुझे अभी यहीं जवाब चाहिए!" बोले—"पुलिस बुलाओ तो भी हटूंगा नहीं!" पुलिस आई, साहब पुलिस को भी अपनी रामकहानी सुनाने लगे, लेकिन कानून के डंडे के आगे सबकी अकड़ ढीली हो ही जाती है।
फिर दो घंटे बाद, एक महिला खिड़की पर आई और बोली—"मेरा बॉयफ्रेंड ने मुझ पर हाथ उठा दिया, मोबाइल छीन लिया, क्या आप पुलिस बुला सकते हैं?" रिसेप्शनिस्ट ने फिर 911 फोन मिलाया। पुलिस आई, दोनों पक्षों की कहानी अलग-अलग, नतीजा—दोनों को एंबुलेंस से अलग-अलग भेज दिया गया। यहां 'सास-बहू' के झगड़े भी इतने रोमांचक नहीं होते होंगे!
बाथटब का ढक्कन और 'मर्दानी' का रूप
अगली रात का किस्सा भी कम नहीं! एक मेहमान रात को खिड़की फोड़-फोड़कर चिल्लाने लगा कि बाथटब में ढक्कन नहीं है, नहाना है। मुआवजा मांगने लगा और ऐसा गुस्सा जैसे कानपुर का बच्चा खिलौना लेकर न माने। रिसेप्शनिस्ट ने पुलिस की धमकी दी तो जनाब शांत हो गए, लेकिन अगले दिन पता चला कि बाथटब में ढक्कन मौजूद था! जनाब तो गैस स्टेशन जाकर 911 पर भी शिकायत कर आए, पुलिस ने हँसी में टाल दिया—"भैया, अब और क्या करोगे?"
फिर ये जनाब होटल के गज़ीबो के पास स्टोव पर 'खाना' बनाने लगे, साथ में कुछ अनजान लोग भी। जब GM ने मना किया तो साहब ने छुरी दिखा दी! पुलिस आई, तलाशी हुई, छुरी नहीं मिली, लेकिन होटल से बाहर करवा दिया गया। फिर भी साहब अपना सामान धीरे-धीरे निकालते रहे, टैक्सी इंतजार में खड़ी, रिसेप्शनिस्ट फिर पुलिस बुलाने को मजबूर। आखिरकार साहब गालियां देते हुए विदा हुए, लेकिन टैक्सी से कुछ दूर जाकर ही उतर गए—अब पूरे शहर के लिए ओपन चैलेंज!
होटल की 'नाइट ड्यूटी' : कभी बोरिंग, कभी डरावनी
एक कमेंट में किसी ने लिखा—"रात की शिफ्ट में 90% बोरियत, 9% सिरदर्दी और 1% शुद्ध डर होता है!" यही इस होटल रिसेप्शनिस्ट की कहानी है—अधिकतर रातें यूट्यूब या टीवी पर निकल जाती हैं, और जब कुछ होता है तो ऐसा कि सारा साल याद रह जाए। एक और पाठक ने मजाक में कहा—"कम से कम अब तो साल भर के लिए टेंशन खत्म, अब आगे सब ठीक ही रहेगा!"
एक और कमेंट ने तो सीधे-सीधे कहा, "अगर आपने नए साल की रात झेल ली, तो आप कहीं भी सर्वाइव कर सकते हैं!" सच है, हमारे यहां तो कहावत है—"पहली बार सांप देखकर डरना जरूरी है, बाकी फिर आदत बन जाती है!"
अंत में: होटलवाले भी इंसान हैं!
इस पूरी कहानी में हंसी भी है, डर भी, और जिंदगी की सच्चाई भी। हमारे यहां होटल रिसेप्शनिस्ट को अक्सर छोटे-मोटे कामों का कर्मचारी समझ लिया जाता है, लेकिन असल में वो 'रात के चौकीदार' भी होते हैं, 'सामाजिक कार्यकर्ता' भी और कभी-कभी तो 'पुलिसवाले' का रोल भी निभाते हैं। इस कहानी ने दिखाया कि होटल की डेस्क के पीछे भी एक दिल धड़कता है, जो हर स्थिति का सामना करता है—चाहे बिजली चली जाए, या कोई परेशान मेहमान छुरी लेकर आ जाए।
तो अगली बार जब आप किसी होटल में ठहरें, रिसेप्शन पर 'नमस्ते' कहकर मुस्कुरा दीजिए—शायद वो आपका दिन और उनका भी थोड़ा बेहतर बना दे।
आपके पास भी ऐसी कोई मजेदार या अजीब होटल कहानी है? नीचे कमेंट में जरूर बताइए! और अगर आपको ये किस्सा पसंद आया हो, तो शेयर करना न भूलें—क्योंकि असली जिंदगी की कहानियां, फिल्मों से कहीं ज्यादा दिलचस्प होती हैं!
मूल रेडिट पोस्ट: Happy New Year to us