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नया मैनेजमेंट, पुराने दुख: होटल के फ्रंट डेस्क की कहानी!

लॉबी में खड़ा निराश फ्रंट डेस्क एजन्ट, प्रबंधन के नए पेशेवर नियमों पर सवाल उठाता हुआ।
एक व्यस्त होटल की लॉबी में, एक फ्रंट डेस्क एजन्ट नए अजीब नियमों पर विचार करता है। यह फोटो यथार्थवादी छवि उन कई लोगों की तनाव और भ्रम को दर्शाती है जो अनावश्यक कार्यस्थल परिवर्तनों से गुजरते हैं।

क्या आपने कभी सोचा है कि होटल के फ्रंट डेस्क पर खड़े व्यक्ति के मन में क्या चलता है? हम अक्सर मुस्कुराते हुए स्वागत करने वाले इन कर्मचारियों की प्रोफेशनलिज्म की तारीफ करते हैं, लेकिन उनके पीछे की कहानी को कम ही लोग जानते हैं। आज हम आपको एक ऐसे ही फ्रंट डेस्क एजेंट की आपबीती सुनाने जा रहे हैं, जिसने नए मैनेजमेंट के आने के बाद अपने कामकाजी जीवन में ऐसे तजुर्बे किए कि हर हिंदुस्तानी कर्मचारी को अपना दर्द याद आ जाएगा।

नए मैनेजमेंट के "लाजवाब" नियम: खड़े रहो, हंसते रहो, पर कॉफी मत पियो!

जिस तरह हमारे देश में ऑफिस बदलते ही नई पॉलिसियाँ और फरमान जारी हो जाते हैं, वैसा ही कुछ इस होटल में हुआ। नए मैनेजमेंट ने आते ही कुछ ऐसे नियम बना दिए कि पुराने कर्मचारियों के चेहरे उतर गए। जैसे कि—

1. कुर्सी पर बैठना मना है!

अब भला बताइए, जिस देश में स्टेशन मास्टर से लेकर बैंक क्लर्क तक घंटों कुर्सी पर बैठकर काम करते हैं, वहाँ होटल के फ्रंट डेस्क पर खड़े कर्मचारी से कहना कि "पूरी शिफ्ट खड़े रहो, बैठना मत", कहाँ की इंसानियत है? एक यूज़र ने तो कमेंट में सुझाव दिया कि अगर मैनेजमेंट को कुर्सी से इतनी परेशानी है, तो एक रात GM के ऑफिस से सारी कुर्सियाँ ही गायब कर दो, फिर पूछो मज़ा आया या नहीं!

एक और मज़ेदार बात—किसी ने सलाह दी कि डॉक्टर का सर्टिफिकेट ले आओ, फिर देखो कैसे बैठने देते हैं! कनाडा के एक होटल कर्मचारी ने बताया कि डॉक्टर की चिट्ठी लाकर उसने कुर्सी का हक भी पा लिया और अब उसे कोई टोक नहीं सकता। भारत में भी अक्सर सरकारी दफ्तरों में "मेडिकल रेस्ट" का जुगाड़ चलता है, क्यों?

2. मेहमान भगवान, चाहे गुस्से वाला ही क्यों न हो

होटल वालों का फ़ंडा सीधा है—पैसा आया, भगवान आया! चाहे गेस्ट ने पिछली बार गाली ही क्यों न दी हो, अगर उनका कार्ड क्लियर हो गया तो मुस्कराइए और चाबी पकड़ाइए। यह तो वैसा ही हुआ जैसे मोहल्ले के किराना वाले को उधार देने के बाद भी रोज़ सलाम करना पड़ता है। एक कमेंट में किसी ने लिखा—"अगर गेस्ट तुम्हारे ऊपर चिल्ला सकता है, तो तुम भी मैनेजर पर चिल्ला सकते हो!" लेकिन सच्चाई यही है कि नौकरी की मजबूरी में सब सहना पड़ता है।

3. कर्मचारियों के लिए कॉफी पर पाबंदी

अब ज़रा सोचिए, हमारे यहाँ ऑफिस में चाय-पानी के बिना काम ही नहीं चलता। लेकिन यहाँ तो होटल मैनेजमेंट ने कह दिया कि कर्मचारियों को होटल की कॉफी नहीं मिलेगी, महंगी पड़ती है! एक कमेंट ने तो इसका मज़ेदार जवाब दिया—"ठंडे एसी में जो पैसे बचेंगे, उससे अपनी कॉफी खुद खरीद लेना।"

4. एसी का तापमान—कर्मचारियों के बस में नहीं

गर्मी में बाहर से आने वाले मेहमानों को 'फ्रेश' फील करवाने के चक्कर में मैनेजमेंट ने एसी का रिमोट ही छीन लिया। अब बेचारे कर्मचारी दिनभर ठंड में ठिठुरते रहें! एक यूज़र ने सलाह दी—"स्वेटर पहन लो, पर मुस्कुराते रहो।"

5. मेहमान की खातिर, लॉजिक की छुट्टी

अगर किसी गेस्ट का कमरा खराब हो जाए, तो उसे दूसरा कमरा दो—भले ही होटल पूरा बुक हो! अब यहाँ तो जादूगर भी हार मान जाए। एक कमेंट में किसी ने व्यंग्य में लिखा—"अगली बार ऐसे गेस्ट को अपना कमरा दे देना, शायद मैनेजर खुश हो जाएगा!"

कर्मचारियों की हालत—'नौकरी के लिए कुछ भी करेगा'!

इन सब नियमों के बाद कर्मचारियों की हालत किसी बॉलीवुड के संघर्षशील हीरो जैसी हो गई है—"सपनों की नौकरी, लेकिन शर्तें अजीब!" कई यूज़र्स ने सलाह दी कि जितना जल्दी हो, नई नौकरी ढूंढो। एक ने तो कहा—"जब पुराने स्टाफ को परेशान किया जाता है, तो उसका मकसद है उन्हें भगा देना, ताकि सस्ते में नया स्टाफ आ सके।" भारत के कई निजी संस्थानों में भी यही हाल है—पहले पुराने लोगों की नाक में दम करो, फिर कम वेतन में नए लोग भर लो।

एक यूज़र ने कमेंट किया—"असली मेहमान नवाज़ी तो तब है जब स्टाफ खुश रहे। दुखी कर्मचारी, दुखी अतिथि!" और यह बात एकदम सही है। अगर स्टाफ का मन उखड़ा रहे, तो मेहमान भी जल्दी ही होटल बदल लेते हैं। हमारे यहाँ तो कहावत है—"घर का भेदी लंका ढाए", लेकिन यहाँ तो मैनेजमेंट खुद ही अपनी लंका ढा रहा है।

हंसी-मजाक और हल्के-फुल्के सुझाव

कुछ यूज़र्स ने मस्ती में सलाह दी—"फोल्डिंग स्टूल छुपाकर रख लो, जब कोई न देखे, बैठ लो!" तो किसी ने कहा—"अगर नियम बहुत तंग करें तो पूरी टीम एक साथ इस्तीफा दे दे, देखो मैनेजमेंट कैसे हाथ जोड़ता है।" किसी ने यह भी कहा कि बड़े ब्रांडेड होटल्स में ऐसी पाबंदियाँ कम ही होती हैं—वहाँ स्टाफ की इज्जत होती है।

निष्कर्ष: नौकरी में इज्जत ज़रूरी है, सिर्फ़ तन्ख्वाह नहीं

इस पूरी कहानी से साफ़ है—चाहे होटल हो या कोई भी ऑफिस, जब तक कर्मचारियों की इज्जत और सुविधा का ख्याल नहीं रखा जाएगा, काम में बरकत नहीं आ सकती। मेहमान का स्वागत जरूरी है, लेकिन अपने लोगों का ख्याल रखना उससे भी ज्यादा जरूरी है।

क्या आपके ऑफिस में भी कभी ऐसे अजीबोगरीब नियम बने हैं? या कोई मैनेजर आपको भी 'सरप्राइज' दे चुका है? नीचे कमेंट में अपनी कहानी ज़रूर साझा करें। और हाँ, अगली बार जब किसी होटल जाएं तो फ्रंट डेस्क वाले की मुस्कान के पीछे की सच्चाई ज़रूर याद रखें!


मूल रेडिट पोस्ट: My new management drives me nuts