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नए साल की होटल फ्रंट डेस्क बिंगो: पुलिस, बिखरा लॉबी और चोरी का माल!

नए साल की शुरुआत में बेघर लोगों के कारण होटल के लॉबी में अव्यवस्था।
होटल के लॉबी की एक जीवंत तस्वीर, जहां दो बेघर मेहमानों के साथ अनपेक्षित अव्यवस्था का सामना करना पड़ा। नए साल की स्वागत काउंटर बिंगो में आपका स्वागत है, जहां हर बदलाव पर नए आश्चर्य हैं!

नया साल हर किसी के लिए नई उम्मीदें और ताजगी लेकर आता है, लेकिन होटल वालों के लिए ये अक्सर सिरदर्द और हंगामे का पैकेज भी साथ लाता है। सोचिए, जब आप सुबह-सुबह सोते-सोते अचानक बॉस का कॉल सुनें, और पता चले कि होटल में ऐसी फिल्मी कहानी चल रही है, जिसके बारे में आप सिर्फ टीवी पर सुनते थे।

मेरे साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। नए साल की सुबह, बॉस ने तीन घंटे पहले फोन करके बुला लिया—"जल्दी आओ, होटल में कुछ गड़बड़ हो गई है!" अब हमारी तो सुबह ही बन गई।

होटल लॉबी में ‘महाभारत’ का मंजर

रात को दो बेघर लोग, जिनकी शक्ल-सूरत शायद किसी शराबी मेहमान से कम नहीं रही होगी, होटल के अंदर घुस आए। इनका तरीका भी बड़ा देसी था—शराबी मेहमानों के पीछे-पीछे चुपचाप घुस गए, और लॉबी की सोफाओं को अपना बिस्तर बना लिया। अब जब कोई मेहमान या कर्मचारी नहीं देख रहा था, इन्होंने तो लॉबी की ऐसी-तैसी कर दी। सोफे गंदे, चीज़ें बिखरी हुईं, और ऊपर से काँच भी तोड़ डाला।

एक कमेंट करने वाले ने बड़ा सही सवाल पूछा - "अरे भाई, रात भर होटल का कोई कर्मचारी कहां था?" दरअसल, नए साल की रात जैसे मौकों पर कौन मेहमान है, कौन नही, फर्क कर पाना ही मुश्किल होता है। हमारे यहाँ भी, अक्सर शादी-ब्याह या त्योहारों में, बारातियों और मेहमानों की भीड़ में कोई भी अंदर घुस सकता है—जैसे गली-मोहल्ले की शादी में फ्री का खाना खाने वाले ‘गेटक्रेशर’!

पुलिस आई, चोर गए, और मैं बस देखता रह गया

बॉस ने तो मुझे जल्दी बुला लिया, लेकिन पुलिस मुझसे भी पहले पहुँच गई। बेघर लोगों को बाहर निकाल कर पुलिस निकल ली, और मैं बस उनकी ‘कहानियाँ’ सुनता रह गया। अब तक तो लगा कि मामला खत्म, लेकिन असली ड्रामा तो अभी बाकी था।

लंच के बाद जब दुबारा अपनी ड्यूटी पर लौटा, तो देखा कि मेरा लैपटॉप चार्जर गायब! मन में वही कहावत घूम गई—"घर का जोगी जोगड़ा, आन गाँव का सिद्ध!" यानी अपने ही होटल में अपनी चीज़ें सुरक्षित नहीं। बाद में पता चला, वही लोग फिर से आए थे, लेकिन इस बार अंदर घुस नहीं पाए, तो बाहर के वेस्टिब्यूल में ही उत्पात मचाया। वहीं एक बैग पड़ा मिला, जिसमें मेरा चोरी हुआ चार्जर भी था।

यहाँ एक पाठक ने सलाह दी—"भई, वो चार्जर तो अच्छे से साफ कर लेना!" बात भी सही है, कभी-कभी हमारे यहाँ भी रेल या बस स्टैंड से मिली चीज़ें, वापिस घर लाने से पहले ‘गंगाजल’ से धोना पड़ता है।

होटल की रातें: नए साल का ‘बिंगो’ गेम

कमेंट्स पढ़कर लगा, होटल में काम करना भी किसी ‘बिंगो’ गेम से कम नहीं। कोई मेहमान पार्टी में बेहोश हो जाता है, तो कोई अपनी ही रूम भूल जाता है। एक कमेंट में लिखा था—"हमारे यहाँ एक महिला मेहमान इतनी कन्फ्यूज थी कि चार बार उसे बताना पड़ा कि उसका कमरा कौन सा है!"

यह तो वैसा ही हुआ, जैसे गाँव की शादी में बारातियों को बार-बार पूछना पड़े, ‘मामा जी का घर किधर है?’ किसी और ने लिखा—"आधी पहली शिफ्ट वाले तो छुट्टी पर चले गए थे, बच्चों ने प्रैंक कॉल शुरू कर दी, और कुछ लोग बाथरूम में बेहोश पड़े थे।"

होटल का फ्रंट डेस्क, खासकर नए साल की रात, किसी मेला या हाट जैसा हो जाता है—हर तरह के लोग, हर रंग की कहानी!

सबक और हंसी दोनों

इस पूरी घटना में सबसे मजेदार बात ये रही कि जिन दो लोगों ने इतनी तबाही मचाई, उनका एक बार भी दीदार नहीं हो पाया। चोरी भी हुई, पुलिस भी आई, सामान भी मिल गया, और मैं बस ‘कहानी’ का हिस्सा बन गया।

वैसे, एक पाठक ने तो मजाक में यहाँ तक लिख दिया—"उन लोगों के लिए भी बैग में कुछ छोड़ आओ, जैसी करनी वैसी भरनी!" अब ये तो मजाक है, मगर असल जिंदगी में होटल वालों को हर वक्त सतर्क रहना पड़ता है।

और एक पाठक ने बढ़िया बात बोली—"नया साल होटल वालों के लिए सिर्फ कैलेंडर नहीं बदलता, कहानियों का पिटारा भी खोल देता है।" सच कहें तो, हर होटल वाला अपनी ड्यूटी पर रोज़ एक नई कहानी लेकर घर लौटता है—कभी हंसाने वाली, कभी सिर पकड़ने वाली।

अंत में: आप भी सुनाएं अपनी कहानी!

क्या आपके साथ भी कभी ऐसा अजीबो-गरीब वाकया हुआ है? होटल, ऑफिस या अपने मोहल्ले में कोई फिल्मी घटना? नीचे कमेंट में जरूर साझा करें। और हाँ, अगली बार होटल जाएं तो अपना सामान संभाल कर रखें—क्योंकि कौन कब किसका ‘चार्जर’ ले जाए, क्या पता!

नया साल मुबारक हो, और भगवान करे आपकी सुबहें होटल के फ्रंट डेस्क जितनी ड्रामेबाज़ न हों!


मूल रेडिट पोस्ट: New Year’s Front Desk Bingo: Police, Trashed Lobby, and Stolen Stuff