नए मालिक, पुराना चाल – कर्मचारियों की कटौती और होटल की गजब कहानी
आपने कभी सुना है कि किसी होटल ने पैसे बचाने के लिए अपने आदमियों की पूरी फौज ही निकाल दी हो? जी हां, यह कोई फिल्मी सीन नहीं है, बल्कि एक सच्ची घटना है। सोचिए, आप एक होटल में काम कर रहे हैं, मेहनत कर रहे हैं, बदलाव के वक्त दूसरों को ट्रेनिंग दे रहे हैं और अचानक आपको कहा जाता है – या तो 'ऑन कॉल' हो जाओ या नौकरी छोड़ दो! भैया, ऐसा झटका तो बिजली का भी नहीं लगता जितना इन नए मालिकों ने अपने कर्मचारियों को दे दिया।
होटल का नया मालिक, नई चालें
कहानी कुछ यूं है – एक बड़े शहर के बीचोंबीच 170 कमरों वाला होटल, जहां नई मालिक मंडली आई और आते ही ‘लक्ष्मी बचाओ’ अभियान शुरू कर दिया। पुराने कर्मचारियों की आधी फौज छांट दी गई, बचे-खुचे लोग डरे-सहमे से काम कर रहे थे। पोस्ट लिखने वाले (आईए, इनका नाम राहुल मान लेते हैं) ने बताया कि उसे हाल ही में रखा गया था, लेकिन सिस्टम बदलने पर सबको ट्रेनिंग देने की जिम्मेदारी उसी के सिर मढ़ दी गई।
अब जैसे ही होटल का ऑफ-सीजन आया, मालिकों ने फरमान जारी कर दिया – फ्रंट डेस्क पर कुल मिलाकर सिर्फ 18 घंटे का काम बंटेगा, वो भी चार कर्मचारियों में। यानी जिनको पूरी नौकरी चाहिए थी, उनके हिस्से आया हफ्ते में बस दो-तीन दिन, और जो सबसे नया है (राहुल), उसके लिए – सिफर! आखिर में मुँह पर सीधा बोल दिया – या तो 'ऑन कॉल' रहो, या नौकरी छोड़ दो।
कर्मचारियों की हालत – “न नौ मन तेल होगा, न राधा नाचेगी”
अब भइया, इतने कम घंटों में तो होटल चलाना वैसे ही मुश्किल है, जैसे बिना आटे के रोटियां बनाना! एक कमेंट में किसी ने गिनती करके बताया कि 24 घंटे की शिफ्ट को चार-पाँच लोग मिलकर ही चला सकते हैं, तो 18 घंटे में चार लोगों को बांटना मतलब – या तो जादू करो या फिर सबका जीना हराम कर दो।
कई लोगों ने सलाह दी कि ऐसा होटल जल्दी ही बंद होने वाला है। "ये मालिक लोग तो होटल को जमीन में गाड़ देंगे," एक भाई साहब ने मजाक में लिखा। कई लोगों ने कहा कि नौकरी छूटना खराब जरूर लगता है, लेकिन ऐसे माहौल में रहना और भी बड़ा सिरदर्द है। "बिल्ली के भाग्य से छीका टूटना" – यानी राहुल के लिए ये नौकरी छोड़ना शायद अच्छा ही होगा, क्योंकि ऐसे मालिकों के नीचे कोई खुशी से नहीं टिकता।
मालिकों की सोच या कर्मचारियों का शोषण?
हमारे देश में भी कई बार देखा गया है कि जब कोई कंपनी या दुकान नया मालिक ले लेता है, तो सबसे पहले खर्चा कम करने के नाम पर कर्मचारियों की छंटनी शुरू हो जाती है। मगर ये भी सच है कि ऐसे फैसलों से न केवल कर्मचारियों का मनोबल गिरता है, बल्कि होटल जैसी जगहों पर ग्राहक सेवा भी रसातल में चली जाती है।
एक और कमेंट में बताया गया – "अरे भाई, होटल वाले सोचते हैं कि पैसे बचा लेंगे, लेकिन ग्राहक अगर बुरी सर्विस पाएंगे तो फिर रिव्यू में तो बैंड ही बजा देंगे।" मतलब, जितना पैसा बचाओगे, उससे कहीं ज्यादा नुकसान ब्रांड की इज्जत और ग्राहकों के भरोसे का होगा। हमारे यहाँ भी 'मुँह देखी' मार्केटिंग बहुत चलती है। ग्राहक ने एक बार बुरा बोल दिया, तो 'मुँह-मुँह फैलते देर नहीं लगती'।
क्या है हल? नौकरी जाए तो क्या करें?
बहुत से पाठकों ने सलाह दी – "कंपनियों की मर्जी से निकाले गए कर्मचारी बेरोजगारी भत्ता (unemployment benefit) का दावा कर सकते हैं।" अमेरिका में तो ये आम बात है, मगर भारत में भी कई बार कर्मचारियों को कानूनी सहारा मिल जाता है। और वैसे भी, ऐसे माहौल में टिकना किसी 'झाँसी की रानी' बनने से कम नहीं।
एक पाठक ने हल्के-फुल्के अंदाज में लिखा – "भाई, जो हुआ अच्छा हुआ, अब लॉटरी टिकट खरीद लो, क्या पता किस्मत पलट जाए!" वहीं कुछ लोगों ने ये भी कहा, "जल्दी ही वहां के बचे-खुचे कर्मचारी भी भाग खड़े होंगे, मालिक खुद होटल बेचने पर मजबूर हो जाएगा।"
हमारे देश में भी यही हाल?
अगर आप कभी किसी होटल, मॉल या दफ्तर में काम कर चुके हैं, तो ये कहानी कुछ जानी-पहचानी सी लगेगी। भारत में भी जब मंदी आती है या नया प्रबंधन आता है, तो अक्सर कर्मचारियों की छंटनी, काम के घंटों में कटौती और मनमर्जी के फैसले देखने को मिल जाते हैं। फर्क बस इतना है कि यहां लोग अक्सर चुपचाप सह लेते हैं, क्योंकि "नौकरी करनी है तो मालिक की सुननी पड़ेगी" वाली सोच घर कर जाती है।
निष्कर्ष – क्या आप ऐसी जगह काम करना चाहेंगे?
कहानी से ये साफ है कि जो मालिक अपने कर्मचारियों को सिर्फ खर्चा समझते हैं, वो देर-सवेर खुद ही फँस जाते हैं। काम करने वालों की इज्जत जरूरी है, नहीं तो "ना रहेगा बांस, ना बजेगी बांसुरी"।
अगर आपके साथ कभी ऐसा हुआ है, तो डरिए मत – जमाना बदल रहा है, और मेहनत का मोल हर जगह मिलेगा। आप क्या सोचते हैं? क्या आपको भी कभी ऐसे 'मालिकों' का सामना करना पड़ा है? अपने अनुभव नीचे कमेंट में ज़रूर साझा करें!
धन्यवाद, और अगली बार ऐसी ही रोचक कहानियों के लिए जुड़े रहिए!
मूल रेडिट पोस्ट: New ownership terminates employees for saving money