नए कर्मचारियों की बातें सुनकर होटल मैनेजर का सिर घूम गया!
कर्मचारी ढूंढ़ना आजकल किसी खजाने की खोज से कम नहीं! कभी-कभी तो लगता है कि इंटरव्यू में सामने जो बैठा है, वो सच बोल रहा है या कहानी गढ़ रहा है, ये समझना ज्योतिष का काम है। होटल इंडस्ट्री में तो ये समस्या और भी बड़ी है, जहाँ हर किसी से उम्मीद की जाती है कि वो मेहमानों को घर जैसा सुकून देगा। मगर नए कर्मचारियों के कारनामे सुनकर लगता है – ‘न नौ मन तेल होगा, न राधा नाचेगी’!
काम के नाम पर नाटक: आजकल के नए कर्मचारियों की असली कहानी
सोचिए, आपने किसी को फुल टाइम पोस्ट पर रखा, पूरी ट्रेनिंग दी, और दो महीने बाद वो आपको बताता है – “मैं इन-इन दिनों ही आ पाऊँगा, बाकी दिन मेरा टाइम फुल है।” अब बताइए, क्या होटल में शिफ्ट का कोई गणेश उत्सव चल रहा है जो सबकी मर्जी से चलेगा? एक वरिष्ठ मैनेजर (जिन्होंने Reddit पर अपना दर्द साझा किया) बताते हैं, “हमने कितनों को फुल टाइम में रखा, मगर दो महीने में ही उनके बहाने शुरू हो जाते हैं। कोई कहता है टायर पंचर हो गया, कोई कहता है घर में बर्थडे है।” मज़े की बात ये कि जिनका टायर पंचर हुआ, वो ठीक दो घंटे बाद ऑफिस पहुँचती हैं, एकदम ताजगी के साथ – न कोई पसीना, न कोई धूल! अब बताइए, ऐसे कर्मचारियों पर कौन भरोसा करे?
झूठ का पुलिंदा: रेज़्युमे और रेफरेंस का खेल
हमारे देश में भी ‘सिफारिश’ का बोलबाला हमेशा से रहा है। मगर यहाँ तो नया स्टाइल चल पड़ा है – फर्जी रेफरेंस! Reddit पोस्ट में मैनेजर बताते हैं कि कैसे एक लड़की ने अपने परिवार वालों को ही रेफरेंस बना दिया। जब असली जगह फोन लगाया गया, तो पता चला – “हमारे यहाँ ऐसी कोई लड़की आई ही नहीं!” ऐसा लगा जैसे सीरियल ‘CID’ की टीम जाँच में लग गई हो। मज़ाक की बात अलग, मगर ये झूठ होटल की छवि और पुराने, मेहनती कर्मचारियों की मेहनत दोनों पर पानी फेर देता है।
पुरानी पीढ़ी बनाम नई पीढ़ी: मेहनत की बदली परिभाषा?
हमारे दादाजी कहते थे – “मेहनत का फल मीठा होता है।” मगर आजकल के युवाओं का नारा है – “जितनी मिले, उतनी मेहनत करो। बाकी टाइम मस्त रहो।” Reddit के एक कमेंट में किसी ने लिखा, “आजकल के नए कर्मचारी काम को सीरियसली नहीं लेते। उन्हें तो बस सेल्फी खींचनी है, इंस्टा पर डालना है, और छुट्टी का बहाना ढूँढना है।” एक और कमेंट में कहा गया – “कोरोना के बाद लोगों को समझ आ गया है कि बड़ा आदमी तो और अमीर बन रहा है, हम चाहे जितनी मेहनत करें, हमारे हिस्से में वही पुराना संघर्ष है। तो फिर क्यों जान खपाएँ?”
ये बात सही भी है – जब मेहनत का फल मिलता ही नहीं, तो उत्साह भी कम हो जाता है। मगर क्या इसका मतलब ये है कि झूठ बोलना, दूसरों को धोखा देना सही है? पुरानी टीम के लोगों का दर्द भी समझ में आता है, जो 12-14 घंटे की शिफ्ट काटकर भी ड्यूटी निभाते हैं, और नए लोग बार-बार ‘बीमार’ होने का बहाना बना लेते हैं।
समस्या कहाँ है: कंपनी या कर्मचारी?
अब सवाल उठता है – गलती किसकी है? Reddit पोस्ट के लेखक साफ़ कहते हैं – “हमारी कंपनी यूनियन में है, अच्छे वेतन, छुट्टियाँ, मेडिकल सब कुछ मिलता है। समस्या पैसे की नहीं, बल्कि काम के प्रति ईमानदारी की है।” कई लोग मानते हैं कि अगर शुरुआत में ही कड़ी जाँच-पड़ताल हो, तो फर्जी लोग पकड़े जा सकते हैं। एक कमेंट में किसी ने लिखा – “अब वो जमाना गया जब कोई भी आकर नौकरी पा लेता था। अब ज़रूरी है कि सही आदमी को, सही जगह पर मौका मिले।”
वहीं कुछ लोग कहते हैं – “कम वेतन दोगे, तो कम मेहनत वाले लोग ही आएँगे।” हमारे यहाँ भी कहावत है – ‘जैसी करनी, वैसी भरनी।’ अगर कंपनी सिर्फ़ पैसे बचाने के चक्कर में है, तो अच्छे कर्मचारी कहाँ से मिलेंगे? मगर इस कहानी में तो वेतन भी अच्छा है, फिर भी झूठे, लापरवाह लोग क्यों आ रहे हैं?
हल क्या है? – ईमानदार बातचीत और कड़ी छंटनी
माना कि आजकल की युवा पीढ़ी के पास विकल्प ज्यादा हैं – स्टार्टअप, फ्रीलांसिंग, गिग इकॉनमी वगैरह। मगर किसी भी नौकरी में ईमानदारी और ज़िम्मेदारी जरूरी है। शायद अब कंपनियों को चाहिए कि इंटरव्यू में सिर्फ़ कागज़ देखकर न चुनें, बल्कि असली काम दिखवाएँ – जैसे हमारे यहाँ ‘प्रैक्टिकल टेस्ट’ या ‘ट्रायल पीरियड’। साथ ही, पुराने कर्मचारियों को सम्मान दें, जिससे नई टीम भी प्रेरित हो।
एक बात और – नौकरी चाहे होटल की हो या किसी दफ्तर की, ‘कामचोरी’ और ‘झूठ’ का कोई इलाज नहीं, सिवाय सख्ती और पारदर्शिता के। और हाँ, नए लोगों को भी सोचना चाहिए – “कर्मचारी बनना है या सिरदर्द?”
निष्कर्ष: आपकी राय क्या है?
तो मित्रों, होटल मैनेजर की ये कहानी सिर्फ़ उनकी नहीं, बल्कि हर उस इंसान की है जो अपने काम को दिल से करता है और उम्मीद करता है कि टीम भी वैसे ही साथ दे। क्या आपके साथ भी ऐसा हुआ है? क्या आजकल के नए कर्मचारी सचमुच लापरवाह हो गए हैं, या फिर जमाना ही बदल गया है? अपने विचार नीचे कमेंट में जरूर बताइए, और अगर कहानी पसंद आई हो तो शेयर करना न भूलें!
मूल रेडिट पोस्ट: Fed up with new hires