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दोस्त का बदला: बदमाश की ड्राइंग फेंकी, फुटबॉल टीम से निकाला गया!

हाई स्कूल का छात्र स्कूल का काम फेंकता है, जिससे विफलता और टीम में जगह खो जाती है।
एक महत्वपूर्ण क्षण में, एक छात्र अपने स्कूल के काम को फेंकने के परिणामों से जूझता है, जो अंततः उसके अंक और टीम में बने रहने के अवसर को प्रभावित करता है। यह कहानी एक हाई स्कूल की ड्राफ्टिंग कक्षा में विकल्पों और पछतावे की unfolds होती है, जहां हर बारीकी मायने रखती है।

स्कूल की यादों में सबसे रंगीन पन्ने अक्सर शरारतों और बदले की कहानियों से ही भरे होते हैं। कभी-कभी ये बदले इतने मासूम और सटीक होते हैं कि बरसों बाद भी सुनकर मुस्कान आ जाए। आज की कहानी भी कुछ ऐसी ही है—जहाँ एक दोस्त ने अपने दोस्त के साथ हुई बदमाशी का हिसाब इतनी चालाकी से चुकता किया कि बदमाश को खुद भी समझ न आया कि उसके साथ हुआ क्या!

स्कूल की क्लास में इज्ज़त के छक्के

ये किस्सा एक अमेरिकन स्कूल का है, लेकिन अपने यहाँ भी ऐसा कुछ हर मोहल्ले या स्कूल में हो ही जाता है। वहाँ की एक ड्राफ्टिंग (तकनीकी चित्रकारी) क्लास थी, जिसमें बच्चों को लाइन की सफाई, अक्षर लिखने की सुंदरता, इत्यादि पर नंबर मिलते थे। क्लास में एक लड़का था—हम उसे 'किप' कहेंगे, क्योंकि असली नाम बताना ठीक नहीं। किप एक नंबर का बदमाश था, जो हमारे नायक के दोस्त को हमेशा तंग करता था। लेकिन हमारे नायक ने, जो खुद भी फुटबॉल टीम में था, अपने दोस्त का हमेशा साथ निभाया।

अब किप पढ़ाई में वैसे ही ढीला था, लेकिन ड्राफ्टिंग में तो उसकी हालत खस्ता थी। जब उसे पता चला कि अगर वो इस सब्जेक्ट में फेल हो गया, तो उसे स्कूल की सॉकर (यहाँ समझ लीजिए, स्कूल फुटबॉल) टीम से बाहर कर दिया जाएगा, तो उसके होश उड़ गए। आखिरकार, टीचर ने दया दिखाते हुए उसे लंच टाइम और आफ्टर स्कूल एक्स्ट्रा टाइम दिया कि वो अपनी सारी ड्रॉइंग्स पूरी कर सके।

बदमाश की मेहनत का अंत: 'बोलार्ड' में दफन!

कई दिनों की मेहनत के बाद, किप ने एक लंबा सा पुलिंदा तैयार किया—उसकी सारी ड्राफ्टिंग शीट्स। पूरे गर्व से उसने क्लास के बाहर रखी ट्रे में अपनी ड्रॉइंग्स जमा कीं। उस वक्त क्लास के बाहर अक्सर टीचर खड़े रहते थे, क्योंकि बच्चों की आपसी लड़ाईयाँ आम बात थीं।

लेकिन जैसे ही सब बच्चे बाहर निकले, हमारे नायक का दोस्त (जिसे किप हमेशा तंग करता था) सबसे आखिर में निकला। उसने एक सेकंड के लिए भी बिना हिचकिचाए, ट्रे से किप की सारी ड्रॉइंग्स उठा लीं और उन्हें एक पाइप (जिसे यहाँ 'बोलार्ड' कहते हैं—ये वो लोहे के पाइप होते हैं जो बिल्डिंग में गाड़े जाते हैं ताकि गाड़ियाँ टकराएँ नहीं) में डाल दिया। बिना एक शब्द बोले, वह अपने बैंड हॉल की ओर निकल गया। सोचिए, क्या सटीक बदला था!

अगले दिन क्लास में—बदमाश की आँखों में आँसू!

अगली सुबह क्लास का माहौल बिल्कुल अलग था। किप रोता हुआ टीचर से कह रहा था—"सर, मैंने सब काम किया था, सच में!" लेकिन टीचर का जवाब था—"मुझे तुमसे बहुत उम्मीद थी, लेकिन तुमने फिर धोखा दिया।" किप फुटबॉल टीम से बाहर कर दिया गया, और सीजन भर उसका खेलना बंद! लेकिन आखिर में, उसे पास कर दिया गया—शायद बदमाश का मन थोड़ा पिघल गया होगा।

यहाँ एक कमेंट करने वाले ने बढ़िया लिखा—"बदमाशों को उनके कर्म का फल जरूर मिलता है। अगर तुम किसी को कमज़ोर समझकर तंग करते हो, तो भविष्य में वही तुम्हें सबसे बड़ा सबक सिखा सकता है।" (यहाँ अपने देसी मुहावरे में कहें तो, 'जैसी करनी, वैसी भरनी!')

पाठकों की राय और हमारी चर्चा

इस कहानी पर Reddit पर खूब चर्चा हुई। एक यूजर ने लिखा, "मेरे साथ भी एक बार बदमाश ने मेरा प्रोजेक्ट चुरा लिया था, लेकिन आज जब मैं पीछे मुड़कर देखता हूँ तो सोचता हूँ, वो लोग आज भी हार गए, और मैं अपनी लाइफ में आगे बढ़ गया।"

एक और कमेंट करने वाले ने बड़े गहरे अंदाज़ में लिखा—"स्कूल के रिपोर्ट कार्ड या टीचर्स की राय, बड़ों की दुनिया में कोई मायने नहीं रखती। असली खुशी है जब परिवार खुश हो, बच्चे मुस्कुराएँ और कुत्ता पूँछ हिलाए!" क्या बात है! अपने यहाँ भी तो माँ-बाप अकसर कहते हैं, "पढ़ाई-लिखाई ज़रूरी है, लेकिन इंसान अच्छा बनना सबसे ज़रूरी!"

कुछ लोगों ने चुटकी ली—"बोलार्ड को पाइप कहते हैं, लेकिन असली मज़ा बदमाश की ड्रॉइंग्स डूबाने में था!" किसी ने तो यहाँ तक कह दिया—"जो दूसरों को सताए, उसके लिए तो ये छोटी सी सज़ा है, असली सज़ा तो तब मिलती है जब वो अकेले बैठे-बैठे अपनी ग़लती पर पछताता है।"

बदला, दोस्ती और स्कूल की यादें

यह कहानी हमें दो बातें सिखाती है—एक, बदमाशी किसी के लिए भी अच्छी नहीं होती; और दो, सच्चे दोस्त हमेशा आपके साथ खड़े रहते हैं। इस छोटे से बदले ने न सिर्फ एक बदमाश को सबक सिखाया, बल्कि दोस्ती की अहमियत भी दिखा दी। वैसे भी, स्कूल की शरारतें और बदले की ये कहानियाँ ही तो बाद में सबसे ज़्यादा याद आती हैं!

तो अगली बार जब आपको कोई सताए, याद रखिए—बदला हमेशा बड़ा और ज़ोरदार नहीं होता, कभी-कभी चुपचाप किया गया छोटा सा काम भी जिंदगी भर का सबक बन जाता है।

आपके स्कूल के दिनों में भी कोई ऐसी मज़ेदार बदले की कहानी हुई है? कमेंट में ज़रूर साझा कीजिए, क्योंकि अपनी यादों को बाँटना भी तो एक तरह की मिठाई है—सबको स्वाद आ जाता है!


मूल रेडिट पोस्ट: Threw Away His School Work - He Failed and Lost His Pot on the Team