देर से बुकिंग करने वालों के लिए कुर्सियाँ बचा कर रखें? होटल वालों की दुविधा!
क्या आपने कभी सोचा है कि होटल या रेस्टोरेंट में देर से बुकिंग करने पर भी आपको VIP ट्रीटमेंट मिलना चाहिए? अगर हाँ, तो जनाब, आप अकेले नहीं हैं! हमारी आज की कहानी एक ऐसे ही साहब की है, जिनकी फरमाइश सुनकर होटल कर्मचारियों की तो जैसे दिमागी घंटी ही बज गई।
जरा सोचिए, आप महीनों पहले होटल रूम और रेस्टोरेंट की बुकिंग कर लें, और फिर कोई अंतिम समय पर आकर उम्मीद करे कि उसके लिए भी वही स्पेशल टेबल बची हो? भारत में तो इसे कहते हैं – "आम के आम, गुठलियों के दाम!"
देर से आने वाले मेहमान और उनकी उम्मीदें
होटलों में काम करने वाले लोग अक्सर कहते हैं – "ग्राहक भगवान हैं", पर कभी-कभी ये भगवान ऐसी-ऐसी मांगें कर बैठते हैं कि स्टाफ का सिर ही घूम जाए। Reddit पर एक मजेदार किस्सा वायरल हुआ, जिसमें एक कस्टमर होटल के कॉल सेंटर पर फोन कर पूछता है – "क्या वाकई रेस्टोरेंट में कोई भी स्लॉट खाली नहीं है? पक्का चेक करिए... कोई छुपा हुआ टाइम तो नहीं, जो सिर्फ आपको दिखता हो?"
अब बेचारे कॉल सेंटर वाले ने जितनी बार माफी मांगी, उतनी बार ग्राहक की उम्मीदें बढ़ती गईं। ग्राहक बोले – "अगर होटल वालों को पता है कि कोई देर से बुक करेगा, तो उन्हें कुछ टेबल बचा कर रखनी चाहिए।"
यह बात सुनकर तो कॉल सेंटर वाले के दिमाग में जैसे 'ब्लू स्क्रीन' ही आ गया! अब कहिए, क्या कभी किसी शादी-ब्याह या अपने घर के फंक्शन में मेहमानों के लिए प्लेटें छुपा कर रखी जाती हैं – 'अरे, ये प्लेट तो सिर्फ उन्हीं के लिए है, जो सबसे आखिर में आएंगे!'
'शॉर्टकट' खोजने वाले ग्राहक और उनका तर्क
हमारे समाज में ऐसे लोग हर जगह मिल जाएंगे – दुकानदार से पूछेंगे, "भैया, आखिरी वाला माल दिखाओ", या "गोडाउन में छुपा के रखा है क्या?" Reddit के ही एक कमेंट में किसी ने खूब लिखा – "यह रेस्टोरेंट की बुकिंग भी वही है, जैसे दुकान के पीछे स्टॉक। अगर आप सीक्रेट कोड बोलेंगे, तो छुपा हुआ माल मिल जाएगा!"
ऐसे ग्राहकों को लगता है, जैसे होटल में कोई गुप्त कमरा है, जिसमें VIP टेबल और रूम छुपा कर रखे गए हैं। और अगर वो सही तरीका पूछें, तो स्टाफ जादू से सबकुछ निकाल देगा।
बिज़नेस लॉजिक और 'मुख्य किरदार' सिंड्रोम
कई लोगों को लगता है कि होटल सिर्फ उन्हीं की सुविधा के लिए बना है। एक यूज़र ने बढ़िया लिखा – "इन लोगों को 'मुख्य किरदार सिंड्रोम' है – इन्हें लगता है कि पूरी दुनिया इनके इर्द-गिर्द घूमती है।"
हकीकत यह है कि होटल या रेस्टोरेंट एक बिज़नेस है, भाई! वहां 'पहले आओ, पहले पाओ' चलता है। अगर होटल वाले सिर्फ इस उम्मीद में सीटें खाली रखें कि कोई देर से आएगा, तो उनका नुकसान ही होगा। एक कमेंट में किसी ने कहा – "आप असली कस्टमर को मना कर देंगे, ताकि शायद कोई भविष्य में बुक करे? ये कोई लॉजिक है!"
दूसरी तरफ, एक सज्जन ने लिखा – "यही वजह है कि आजकल लोग पहले ही बुकिंग कर लेते हैं, ताकि उन्हें मनचाहा स्लॉट मिले।" और ये बात सौ फीसदी सच है – चाहे आप मुंबई के पॉश होटल में बुकिंग करें या दिल्ली के किसी फेमस रेस्टोरेंट में, बिना तैयारी के आने वालों के लिए हमेशा 'जो बचा-खुचा' है, वही मिलेगा।
भारतीय संदर्भ: शादी, तीज-त्यौहार और 'जुगाड़'
सोचिए, आपके घर में शादी है। आपने हलवाई, बैंड, पंडित – सबकी एडवांस बुकिंग कर ली। अचानक कोई दूर का रिश्तेदार आखिरी दिन फोन करके बोले – "भाई, मेरे लिए भी एक VIP रूम और अलग खाना बचा कर रखना!" आप क्या करेंगे? यही हाल होटल और रेस्टोरेंट्स का भी है।
याद रखिए – जुगाड़ हर जगह नहीं चलता! होटल वाले कोई जादूगर नहीं हैं कि अचानक आपके लिए सीट निकाल दें। हाँ, कभी-कभार अगर किस्मत अच्छी हो, तो कोई कैंसिलेशन मिल जाए, लेकिन उसके लिए नाराज़ होना या अजीब तर्क देना – "आपको तो सीटें बचा कर रखनी चाहिए थी", ये थोड़ी न चलेगा!
निष्कर्ष: समय पर बुकिंग करें, स्टाफ को परेशान न करें!
आखिर में, यही कहना चाहेंगे – समय पर बुकिंग करें, और अगर देर से बुकिंग की है, तो जो भी उपलब्ध है, उसी में खुश रहें। होटल स्टाफ भी इंसान हैं, उनके पास कोई गुप्त खजाना या जादू की छड़ी नहीं है।
आपका क्या अनुभव है? क्या आपने भी कभी ऐसे ग्राहक या मेहमान देखे हैं जो आखिरी वक्त में VIP ट्रीटमेंट की उम्मीद करते हैं? नीचे कमेंट करें और अपनी कहानी साझा करें!
मूल रेडिट पोस्ट: we should hold back availability in case we get late bookers... riiiight