दुकान में 'केविन' का कमाल: बिना पहचान पत्र के शराब खरीदने की जुगाड़
किराना/कन्वीनियंस स्टोर्स में काम करने वालों को कौन-कौन से कारनामे देखने को नहीं मिलते! रोज़ कोई न कोई ग्राहक ऐसा आता है जो अपनी चालाकियों से दुकानदार को मात देने की फिराक में रहता है। आज की कहानी भी ऐसी ही एक जुगाड़ू ग्राहक की है, जिसे पश्चिमी देशों में 'केविन' कहते हैं—यानि ऐसा व्यक्ति, जो आम समझदारी से भी कोसों दूर हो!
पहली चाल: ध्यान भटकाने की कोशिश
करीब एक हफ्ता पहले की बात है। दुकान पर एक लड़का और उसकी प्रेमिका आए। लड़की ने मुझसे बड़े विश्वास से पूछा—"भैया, पीछे स्टोर में देख लीजिए, क्या सेल्सियस एनर्जी ड्रिंक है?" इधर मैं पीछे गया, उधर उसका साथी बीयर कूलर की ओर बढ़ चला। एनर्जी ड्रिंक तो थी नहीं, सो वापस आकर लड़की को मना कर दिया। पर इतने में मेरी नजरें बहुमूल्य चीज़ पर गईं—लड़का चुपचाप दो डिब्बे ट्विस्टेड टी के उठाकर सीधे बाहर निकल गया! लड़की भी थोड़ी देर बाद हवा हो गई।
तुरंत समझ में आ गया कि यहाँ दोनों की मिलीभगत थी—लड़की ने बातों में उलझाया, ताकि लड़का आराम से चोरी कर सके। उस दिन तो दोनों की जुगलबंदी काम कर गई, लेकिन किस्मत हर बार साथ नहीं देती!
दोबारा वही फंदा, मगर इस बार दुकानदार चौकन्ना
कुछ दिन बाद वही जोड़ी फिर दुकान में आ धमकी। लड़की फिर वही पुराना पैंतरा—"पीछे देखिए, सेल्सियस है क्या?" मगर मैं अब नया-नवेला नहीं था। इस बार मैंने लड़की को तुरंत ताड़ लिया और सख्ती से कहा—"आप बाहर जाएं।" बेचैन लड़की बाहर चली गई।
उधर लड़का फिर बीयर कूलर से ट्विस्टेड टी के पैक लेकर बाहर निकलने ही वाला था कि मैंने टोक दिया—"भैया, आइए काउंटर पर, बिल बना देता हूँ।" झेंपता हुआ लड़का काउंटर तक आया।
पहचान पत्र के बिना शराब? भैया, ये इंडिया नहीं!
अब असली मज़ा यहीं से शुरू हुआ। जैसे ही मैंने उससे पहचान पत्र (ID) मांगा, लड़का ऐसे चौंका जैसे मैंने उससे उसकी कुंडली मांग ली हो! बोला, "ID नहीं है, फिर भी दे दो ना।" मैंने समझाया—"भैया, ये दुकान की ही नहीं, कानून की भी मजबूरी है। उम्र का सबूत बिना शराब बेचना सख्त मना है।"
फिर तो जनाब तरह-तरह के बहाने बनाने लगे—"अरे, मैं तो बड़ा हूँ!", "इतना क्या होता है!", "कितनी बार दिखाया है!" मगर मैं टस से मस नहीं हुआ। आखिर में उसने एक और ड्रामा किया— बोला, "लाओ, पैक मैं वापिस रख देता हूँ!" (अरे भैया, तुम्हारे अभिनय से तो फिल्मफेयर अवॉर्ड भी शरमा जाए!) मैंने मुस्कुरा कर जवाब दिया—"छोड़िए, मैं ही रख दूँगा।" बेचारा बड़ी मायूसी के साथ बाहर चला गया।
Reddit कम्युनिटी की राय: 'केविन' या कुछ और?
इस कहानी को पढ़कर Reddit की जनता भी खूब हँसी—एक यूजर ने लिखा, "इतनी चालाकी तो असली केविन में होती नहीं, ये तो पूरा चालू मालूम पड़ता है!" (कुछ वैसा ही जैसे हमारे यहाँ कोई बोले—'ये तो बड़ा घाघ है!') खुद कहानी सुनाने वाली बहनजी ने भी हामी भरते हुए कहा—"चालाक तो है, मगर बेवकूफी में भी कम नहीं!"
एक और यूजर ने चुटकी ली—"ये असली 'केविन' जैसा नहीं, मगर जब उसने बोला 'मैं खुद वापस रख देता हूँ', तब उसकी बेवकूफी झलक गई।" (यानी, 'ऊपर से स्मार्ट बनने की कोशिश, लेकिन असल में मूर्खता की हद!') एक सज्जन ने लिखा—"असली केविन तो नासमझ होते हैं, ये तो जानबूझकर चोरी कर रहा था। फिर भी मूर्खता तो है ही!"
भारतीय नजरिए से: 'जुगाड़' बनाम 'ईमानदारी'
सोचिए, हमारे यहाँ भी कितने लोग 'जुगाड़' लगाकर कानून को चकमा देने की कोशिश करते हैं! पर जैसे माता जी कहती हैं—"ईमानदारी का फल मीठा होता है, चोरी-चकारी का नहीं।" इस कहानी में भी दुकानदार की सतर्कता ने जुगाड़ू 'केविन' को उसकी औकात दिखा दी।
दुकान में आने वाले ऐसे ग्राहक हर जगह होते हैं—कभी नकली नोट, कभी बिना बिल के सामान मांगना, तो कभी 'भैया, थोड़ा और कम कर दो!' पर जो दुकानदारी में सच्चाई और नियमों का साथ देता है, वही असली विजेता होता है।
निष्कर्ष: सतर्क रहो, मज़े लो!
तो भाइयों और बहनों, अगली बार कोई ग्राहक आपको 'केविन' जैसे पैंतरे दिखाए, तो मुस्कुराइए, सतर्क रहिए, और कानून का पालन कीजिए। वैसे भी, ऐसे मज़ेदार किस्सों के बिना दुकानदारी में मज़ा ही क्या!
क्या आपके साथ भी कभी किसी ग्राहक ने ऐसा 'जुगाड़' आज़माया है? या कोई और अजीब घटना हुई हो? नीचे कमेंट में जरूर बताइए और इस कहानी को दोस्तों के साथ शेयर कीजिए—क्योंकि हँसी बाँटने से बढ़ती है!
मूल रेडिट पोस्ट: A guy who feigned being shocked that I can't sell alcohol without an ID