विषय पर बढ़ें

ठंडे मुर्गे का महासंग्राम: जब जेफ़ को होटल से हमेशा के लिए निकाला गया

थैंक्सगिविंग से पहले, बर्फीले मुर्गे के साथ जेफ की कार्टून-3D चित्रण, हंसी और हलचल में घिरा।
इस मजेदार कार्टून-3D दृश्य में, हम जेफ और उसके प्रसिद्ध बर्फीले मुर्गे को देखते हैं, जो थैंक्सगिविंग की एक दुर्घटना का कारण बना, जो आज भी तीन साल बाद हमारे कार्यालय में हंसी लाता है!

अगर आपको लगता है कि होटल का रिसेप्शनिस्ट बनना मतलब सिर्फ मुस्कुराना और चाबी देना है, तो जनाब, आप गलत हैं! यहाँ हर दिन एक नई फिल्म चलती है – कभी किसी की शादी की जुगाड़, तो कभी किसी की गुम हुई चप्पल की तलाश। पर आज मैं आपको सुनाने जा रहा हूँ उस किस्से की बात, जो तीन साल बाद भी हमारे होटल स्टाफ के लिए थैंक्सगिविंग का सबसे बड़ा हास्यपर्व बन गया है – यानी ‘ठंडे मुर्गे का महासंग्राम’!

कहानी की शुरुआत: थैंक्सगिविंग की पूर्व संध्या और जेफ़ की एंट्री

रात के दस बजे थे, होटल में शांति छाई हुई थी। हम सबने सोचा, बस अब चाय पीकर घर निकलते हैं। तभी दरवाजे से एक लंबी जुल्फों वाला, थोड़ा खोया-सा और थोड़ा संदिग्ध व्यक्ति अंदर आता है – जिसे हम आगे चलकर ‘जेफ़’ कहेंगे। उसके साथ गाड़ी में एक कुत्ता भी था (जो आगे चलकर रहस्य बन जाएगा)।

जेफ़ को सबसे सस्ता कमरा चाहिए था – थैंक्सगिविंग की रात होने के बावजूद, भगवान का दिया एक कमरा बचा था, वही उसे दे दिया। देर हो चुकी थी, तो हमने पालतू जानवर की फीस भी माफ कर दी। सबको लगा – चलो, काम खत्म, अब ताला लगाओ और निकलो।

पर किस्मत को तो कुछ और ही मंज़ूर था।

होटल में मची अफरा-तफरी: सुबह का तूफान और पहला ट्विस्ट

अगली सुबह होटल का माहौल बिल्कुल भारतीय शादी के मंडप जैसा था – हर तरफ अफरा-तफरी, फोन की घंटियाँ, गेस्ट कमरों की अदला-बदली और सफाई का झमेला। हमारी डेस्क पर काम करने वाली भोली-भाली ‘हिप्पी गर्ल’ अपने घर का बना लाल मिर्ची का सॉस सबको खिला रही थी, पर होटल के हालात देख उसकी हालत पतली हो गई। दूसरी स्टाफर ने अपने नए Uggs जूते पहन रखे थे और साफ-साफ कह दिया – “मैं पोछा नहीं लगाऊंगी, जूते खराब हो जाएंगे।”

इसी बीच मैं रिज़र्वेशन देख रहा था कि अचानक ध्यान गया – किसी कमरे की पेमेंट ही नहीं है! और अंदाजा लगाइए, वो कौन – जी हाँ, जेफ़! हिप्पी गर्ल बोली, “उसने मुझे डराया, तो मैंने उसे बस दूसरी जगह भेज दिया, पेमेंट बाद में देखेंगे।” खैर, फीस वगैरह जोड़कर मामला सुलटा दिया। लगा अब सब सेट है।

लेकिन कहानी तो अब शुरू हुई थी!

मुर्गा प्रकट हुआ: होटल का किचन और जेफ़ का विचित्र आग्रह

रात के पौने नौ बजे मेरे पास कॉल आती है – “दीदी, जेफ़ वापस आ गया है… पर इस बार उसके हाथ में कोई सामान है।”

मैंने पूछा, “क्या है – तला हुआ चिकन?”

जवाब मिला, “नहीं, पूरा कच्चा, बर्फ जैसा जमा हुआ मुर्गा।”

अब आप सोचिए, कोई भारतीय होटल में अचानक आकर पूछे – ‘दीदी, ये मुर्गा कैसे पकाऊँ?’ वो भी जब मुर्गा पत्थर जैसा जमा हुआ हो! हमने समझाया – “भैया, इसे पकाने से पहले पिघलाना पड़ता है। इतनी जल्दी नहीं होगा, रात हो गई है।” जेफ़ का चेहरा ऐसा हो गया जैसे हमने कह दिया हो – ‘सांता क्लॉज़ असली नहीं है।’

जेफ़ ने हमारा खाना भी ठुकरा दिया और कमरे में लौट गया। कुछ देर बाद फिर आया – “मुझे कमरा बदलना है, दूसरे में ओवन है।” हमने साफ मना कर दिया – “भैया, कमरा बदलो या नहीं, मुर्गा तो अभी भी जमा हुआ ही रहेगा!” अब जेफ़ ने हम पर भेदभाव का आरोप लगा दिया – मज़े की बात, हम भी गोरे, वो भी गोरा! किस किस्म का भेदभाव, कोई समझ नहीं पाया। खैर, किसी तरह उसे कमरे में भेजा और होटल बंद किया।

महासंग्राम का क्लाइमेक्स: पुलिस, मुर्गा और जेफ़ का ‘डू नॉट रिटर्न’

अगले दिन जेफ़ फिर से प्रकट हुआ – होटल के लॉन में चक्कर लगाता, स्टाफ को घूरता, खुद से बड़बड़ाता – “मुर्गा… मुर्गा…”। उसने बिना पैसे दिए रुकने की जिद पकड़ ली। 11 बजे का चेकआउट निकल गया, जेफ़ अड़ा रहा। आख़िरकार, हमने अपना देसी तरीका अपनाया – बच्चों जैसी भाषा में समझाना शुरू किया, “जेफ़ भैया, चलिए, चलकर गेट तक चलते हैं, अच्छे बच्चे बनिए।”

जेफ़ कार के पास जाकर सोचने लगा – भागना है या कुछ और करना है? तभी पुलिस की गाड़ी आ गई। हमारे असिस्टेंट मैनेजर ने आखिरी वार किया – “अगर आपको नहीं जाना है, तो ये अंकल (पुलिसवाले) आपको मदद कर देंगे।”

जेफ़ ने हार मान ली, कार में बैठ गया, पुलिस ने बात की और जेफ़ को विदा कर दिया। हमने उसे ‘डू नॉट रिटर्न’ (यानी दोबारा न आएँ) लिस्ट में डाल दिया – और नोट्स ऐसे कि कॉलेज का प्रोजेक्ट भी शरमा जाए!

मजेदार बात – कुत्ता कहाँ गया, कोई नहीं जानता। मुर्गा भी शायद कमरे में ही जमा हुआ छोड़ गया। आज भी जब ये किस्सा याद आता है, ठंडे मुर्गे की यादें हमारे होटल की ‘हॉरर-कॉमेडी’ बन गई हैं।

कम्युनिटी की राय: पाठकों की मजेदार टिप्पणियाँ

रेडिट पर इस कहानी ने जोरदार तहलका मचाया। एक पाठक ने लिखा – “मुझे लगता है, जेफ़ ने कुत्ते के बदले मुर्गा ट्रेड कर लिया!” (भैया, ये तो वही हुआ – ‘मांगो सोना, मिले प्याज’)। किसी ने पूछा – “क्या मुर्गा कमरे में ही रह गया?” ओपी (मूल लेखक) ने हँसते हुए जवाब दिया – “शायद, हाँ – वैसे ही जमा हुआ!” एक अन्य ने लिखा, “हर होटलवाले को बच्चों जैसी भाषा में समझाना आना चाहिए – ये जादू है!”

एक पाठक ने तो बॉलीवुड के पंच की तरह कहा, “शक्ल से ही गड़बड़ लग रहा था, मुर्गा तो बहाना था, असली मकसद होटल में हंगामा करना था!” और सबसे बड़ी चिंता – “कुत्ता कहाँ गया?” उस पर भी सबका सिर खुजाता रहा!

निष्कर्ष: क्या आपके साथ कभी ऐसा हुआ?

कहानियाँ तो बहुत होती हैं, पर कुछ किस्से ऐसे होते हैं जो सालों तक चुटकुला बन जाते हैं। जेफ़, उसका ठंडा मुर्गा और रहस्यमयी कुत्ता – हमारे होटल की यादों में अजर-अमर हो गए हैं। अगली बार जब आप होटल जाएँ और कोई अजीब मांग करे, तो याद रखिए – शायद वहाँ कोई नया जेफ़ तैयार बैठा हो!

क्या आपके साथ या आपके जानने वालों के साथ भी कभी ऐसा अजीब वाकया हुआ है? नीचे कमेंट में जरूर बताइए, और अगर मज़ा आया हो तो अपने दोस्तों के साथ ये किस्सा शेयर कीजिए। कौन जाने, अगली बार आपके होटल में कौन-सा ‘ठंडा मुर्गा’ घुस आए!


मूल रेडिट पोस्ट: The Great Frozen Chicken Standoff: Why Jeff Is Permanently Banned