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ट्रक वॉश की मशीन: 30 साल से न कभी सोई, न कभी थकी!

एक ट्रक धोने का दृश्य, जिसमें वितरण केंद्र पर एक ऊबाऊ कंप्यूटर डैशबोर्ड दिख रहा है।
ट्रक धोने वाले कंप्यूटर की मजेदार कहानी में गोता लगाएँ, जो अब और ऊब नहीं सहन कर सका। यह सिनेमाई छवि एक प्रमुख वितरण कंपनी में मेरे साथी के सुरक्षा दिनों की हास्यपूर्ण गाथा के लिए मंच तैयार करती है। पूरी कहानी के लिए जुड़े रहें!

कभी-कभी तकनीक इतनी गजब कर जाती है कि उसे देख खुद भगवान भी हैरान हो जाएँ! आज हम आपको ऐसी ही एक कहानी सुनाने जा रहे हैं, जिसमें न कोई हाइटेक मशीन है, न कोई नया सॉफ्टवेयर—बल्कि है एक बूढ़ा सा कम्प्यूटर, जो पिछले 30 साल से ट्रक वॉश की सेवा में लगा है, और मज़े की बात ये कि आज तक बंद तक नहीं हुआ!

सोचिए, आपके ऑफिस की चायवाली केतली भी हफ्ते में एक बार तो धोई जाती है, पर ये मशीन तो जैसे अमरत्व का वरदान लेकर आई है। चलिए, जानते हैं इस कम्प्यूटर की अनसुनी कहानी, जो हज़ारों ट्रकों की धुलाई का गवाह रहा है—और खुद बोरियत में भी कभी थका नहीं!

मशीन की कहानी: पुराना है पर दिल से जवान

ये किस्सा है एक नामचीन वितरण कंपनी के ट्रक वॉश स्टेशन का, जहाँ सुरक्षा गार्ड साहब (जिन्होंने ये कहानी सुनाई) रविवार की सुबह-सुबह ड्यूटी पर तैनात रहते थे। वहाँ की वॉशिंग मशीन, यानी असली हीरो, 90 के दशक के Windows 95 पर चलने वाला एक कम्प्यूटर है। जी हाँ, वही Windows 95—जिसे आज शायद Only 90s Kids Remember का मेम बना दिया गया है!

इस मशीन के बारे में एक सुरक्षा गार्ड ने कहा, "इसे मत छूना, कभी-कभी ये गुस्सा भी हो जाती है!" अब बताइए, हमारे देश में तो बूढ़े कंप्यूटर को छूने से वैसे भी डर लगता है, कहीं फाइलें गुम न हो जाएँ या सिस्टम हैंग न हो जाए। यहाँ तो बाकायदा वार्निंग भी मिल रही थी!

क्यों नहीं बदलते ऐसी मशीनें? पुराना सोना है या सिरदर्द?

कई पाठकों को ये बात अजीब लगी—इतना पुराना सिस्टम अब तक क्यों चला रहे हैं? एक कमेंट में बताया गया कि बड़ी-बड़ी इंडस्ट्रीज़ में करोड़ों के मशीनें होती हैं, जिनकी पूरी जान इसी पुराने हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर पर टिकी होती है। नया सिस्टम लाओ तो ड्राइवर काम न करें, पुराने पार्ट्स ईबे जैसी वेबसाइट से खरीदो, और कभी-कभी तो इंजीनियर को खुद ही तार जोड़ने पड़ जाते हैं।

हमारे देसी बुलेट मोटरसाइकिल की तरह—पुरानी है, पर जब तक चल रही है, छेड़ो मत! एक अनुभवी तकनीशियन ने कहा, "इन मशीनों के खास इंटरफेस बोर्ड मिलना आजकल मुश्किल है, और नया बोर्ड बनवाने जाओ तो लाखों-करोड़ों का खर्च!" तो भाई, जब तक पुराना जुगाड़ काम कर रहा है, क्यों सिरदर्द मोल लें?

तकनीक का जुगाड़: कभी-कभी न छेड़ना ही बेहतर

एक और पाठक ने लिखा, "अगर किसी तरह ये सिस्टम आज तक नहीं क्रैश हुआ है, तो भगवान का नाम लेकर उसे वैसे ही चलने दो!" भई, हमारे यहाँ भी कई दफ्तरों में पुरानी एक्सेल फाइलें हैं, जिन्हें कोई खोलने की हिमाकत नहीं करता—कहीं फॉर्मूला बिगड़ गया तो सारा हिसाब गड़बड़!

एक और कमेंट में Windows 95 के एक फेमस बग का जिक्र आया—49 दिनों के बाद सिस्टम क्रैश हो जाता था! अब सोचिए, 30 साल से चल रहे इस सिस्टम को कितनी बार "रीसेट" करना पड़ा होगा? या फिर सचमुच, जैसे भगवान के मंदिर में कोई सफाई नहीं करता, वैसे ही इस मशीन को भी सबने छोड़ दिया हो!

पुरानी तकनीक का जादू: सीखने लायक बातें

इस कहानी में छुपा है एक बड़ा पाठ—हर नई चीज़ जरूरी नहीं कि पुरानी से बेहतर हो! कई बार पुरानी तकनीक, अपने जुगाड़, सादगी और भरोसे के कारण सालों तक बिना थके काम करती है। जैसे हमारे यहाँ पुराने रेडियो, टेपरिकॉर्डर या पंखे—न तो बंद होते हैं, न ही जल्दी रिप्लेस!

एक अनुभवी पाठक ने बताया कि एक बार किसी ने नई मशीन बनवाई, लेकिन पुराना सॉफ्टवेयर उस पर चला ही नहीं, और हजारों का नुक़सान हो गया। आखिरकार, कबाड़खाने से पुराने पार्ट्स निकालकर ही जुगाड़ करना पड़ा। यही तो है देसी जुगाड़ की असली ताकत—जो न अमेरिका का सिलिकॉन वैली सिखा सकता है, न कोई विदेशी कंपनी!

निष्कर्ष: कबाड़ में भी है कमाल!

तो मित्रों, अगली बार जब आप अपने ऑफिस या मोहल्ले में कोई पुराना कम्प्यूटर देखें, तो उसे मज़ाक में मत उड़ाइए। क्या पता, वही किसी बड़े सिस्टम की रीढ़ हो—और उसके चलते ही सबका काम चल रहा हो! और हाँ, अगर कोई बोले "इसे मत छूना, ये गुस्सा हो जाती है," तो मान लीजिए—बुजुर्गों की बातों में हमेशा समझदारी होती है।

क्या आपके पास भी ऐसी कोई मज़ेदार तकनीकी जुगाड़ या पुरानी मशीन की कहानी है? नीचे कमेंट में ज़रूर बताइए! और अगर आपको ये किस्सा पसंद आया हो, तो अपने दोस्तों के साथ शेयर करना मत भूलिए—क्योंकि पुरानी चीज़ों की कद्र करना भी एक 'आर्ट' है!


मूल रेडिट पोस्ट: Truck wash computer too bored to die, news at 11.