विषय पर बढ़ें

टेक्निकल सपोर्ट को उन्हीं की भाषा में जवाब, जब इरिटेटिंग वॉइस मैसेज बने बूमरैंग!

नए ERP सिस्टम के लिए असहयोगी सपोर्ट से निराश IT प्रबंधक की एनिमे-शैली की चित्रण।
इस जीवंत एनिमे चित्रण में, हमारा IT प्रबंधक नए ERP सिस्टम से मिले निराशाजनक वॉइस मैसेज सपोर्ट का सामना करने के लिए रचनात्मक तरीके खोजता है। जानें कैसे हास्य और धैर्य ग्राहक सेवा में बदलाव ला सकते हैं!

अगर आप भी ऑफिस में काम करते हैं और टेक्निकल सपोर्ट से कभी पाला पड़ा है, तो ये कहानी आपके दिल को छू जाएगी! सोचिए, आपके पास एक नई ERP (Enterprise Resource Planning) सिस्टम है – तकनीक तो बढ़िया, लेकिन सपोर्ट टीम का रवैया ऐसा कि "मुँह में घी–शक्कर" की बजाय "कानों में तेल" डालने का मन कर जाए! सपोर्ट टीम हर बार वॉइस मैसेज भेजती है, वो भी ऐसे कि आपकी एकाग्रता का कबाड़ा कर दें।

अब हमारे नायक हैं – एक 35 वर्षीय IT मैनेजर, छोटे से पारिवारिक व्यापार में। उन्होंने नया ERP लगाया, सब कुछ बढ़िया चल रहा था, लेकिन जब दिक्कत आई और सपोर्ट टीम से मदद मांगी, तो हर बार जवाब आया – वॉइस मैसेज में!

जब सपोर्ट की 'आवाज़' बन गई सिरदर्द

सोचिए, ऑफिस में काम का टाइम है, सामने एक्सेल शीट खुली है, बॉस की कॉल भी आ सकती है, और उसी वक्त सपोर्ट टीम का वॉइस नोट – "सर, आप ऐसा करिए, फिर वैसा करिए..."। अब ये कोई व्हाट्सएप ग्रुप नहीं जहां रिश्तेदारों के ऑडियो सुनने में मजा आए, ये तो काम का मामला है!

हमारे IT मैनेजर कई बार-स्पष्टता से बोल चुके थे, "भाईसाहब, कृपया लिखकर बताइए। मैं सुन नहीं सकता (या यूं कहें – सुनना नहीं चाहता)!" लेकिन सपोर्ट टीम के कान पर जूं भी नहीं रेंगी।

जब सब्र का बांध टूटा – 'जैसे को तैसा' वाला जवाब

एक दिन तो हद ही हो गई। पॉइंट ऑफ सेल सिस्टम और लोकल सर्वर में कनेक्शन का झोल था, पूरा ऑफिस रुका पड़ा। IT मैनेजर ने सपोर्ट को फिर संपर्क किया, फिर वही – वॉइस मैसेज! अब उनके सब्र का प्याला छलक गया।

उन्होंने सपोर्ट टीम से रिमोट एक्सेस आईडी मांगी थी, तो IT मैनेजर ने भी उसी अंदाज में – वॉइस मैसेज में आईडी भेज दी। फिर पासवर्ड भी वॉइस में! पासवर्ड भी कोई 'राम123' जैसा नहीं, बल्कि लंबा-चौड़ा, ऊपरी–निचली केस, नंबर और स्पेशल कैरेक्टर से भरा हुआ।

अब सपोर्ट टीम के होश उड़ गए! अचानक से सारा संवाद टेक्स्ट में आने लगा। स्क्रीनशॉट चाहिए, तो IT मैनेजर ने सोचा था – क्यों न स्क्रीनशॉट की 15 मिनट लंबी ऑडियो डिस्क्रिप्शन भेज दूं? जैसे – "स्क्रीन के टॉप लेफ्ट में विंडोज़ का लोगो है, उसके बगल में घड़ी, नीचे टास्कबार..."। एक कमेंट में तो किसी ने मजाक में कहा – "हर पिक्सेल का रंग, उसकी हेक्स वैल्यू तक बता डालो!"

कम्युनिटी की हंसी–मजाक: 'पासवर्ड का जादू' और 'सपोर्ट की बोलती बंद'

इस कहानी पर Reddit कम्युनिटी के लोग हंसी नहीं रोक पाए! एक यूज़र ने लिखा – "स्क्रीनशॉट मांगते ही ऑडियो में 10 मिनट का स्क्रीन डिस्क्रिप्शन देना चाहिए था।" तो दूसरे ने सुझाव दिया – "स्क्रीनशॉट को .wav फाइल में बदलकर भेज दो, या URL को 'एच टी टी पी डॉट स्लैश स्लैश...' करके डिक्टेट करो!"

किसी ने पासवर्ड को ऑडियो में बताने का दृश्य ऐसे सुनाया – "पासवर्ड में पी है, बड़ा ए, दो एस, बड़ा डब्ल्यू, ओ, आर, छोटा डी, वन – ये नंबर है, टू – ये शब्द है, ट्री – मतलब पेड़ वाला ट्री..."। पढ़कर ही दिमाग घूम जाए, सुनना तो सपोर्ट टीम का ही काम है!

एक और यूज़र ने दिलचस्प बात कही – "जैसे ही सपोर्ट टीम के खुद के काम में देरी हुई, उन्होंने आवाज़ छोड़कर लिखना शुरू कर दिया। असली सीख तो तब मिलती है, जब किसी की खुद की चप्पल में कंकड़ घुसता है।"

वॉइस मैसेज: ऑफिस के लिए 'रिश्तेदारों के जोक्स' जैसा

बहुत से लोगों ने माना कि वॉइस मैसेज ऑफिस में वैसे ही खटकते हैं जैसे शादी में डीजे पर 'बबलू डांस' – सबकी पसंद नहीं, और काम तो बिल्कुल नहीं चलता! एक यूज़र ने लिखा – "वॉइस मैसेज टेक्स्ट का सबसे खराब हिस्सा (फौरन जवाब नहीं), और फोन कॉल की परेशानी (किसी की बकबक सुनना) – दोनों मिला देता है।"

हां, पर्सनल चैट, दोस्तों के बीच या जब कोई ड्राइव कर रहा हो, तब वॉइस मैसेज ठीक है। लेकिन ऑफिस में? जी नहीं, यहां तो "काम का मामला है, भैया! सीधा–सीधा बोलो, लिखो और काम निपटाओ।"

क्या भारत में भी ऐसा होता है?

जरा अपनी कंपनी में सोचिए – कभी किसी ने आपको ऐसा वॉइस नोट भेजा है जिसे सुनकर मन किया हो – "भैया, ये सारा लिखकर भेज दो!" या आपको भी कभी किसी सपोर्ट टीम का 'आवाज वाला आतंक' झेलना पड़ा हो?

भारत में तो ऊपर से ये समस्या और बढ़ जाती है – कभी शोर-शराबा, कभी नेटवर्क का झोल, कभी डेस्क के बगल में बैठा कोई 'टी टाइम' की आवाज़ में डिस्टर्ब कर देता है। ऐसे में टेक्स्ट ही भला!

निष्कर्ष: दूसरों की परेशानी, जब खुद पर आए तो समझ में आती है

इस IT मैनेजर की कहानी से ये सीख मिलती है – कभी-कभी सामने वाले को उसी की भाषा में जवाब देना जरूरी हो जाता है। सपोर्ट टीम को जब खुद के काम में रुकावट आई, तब जाकर समझ में आया – "सुनना आसान नहीं, लिखना ही बेहतर!"

तो अगली बार अगर कोई आपको बार-बार वॉइस मैसेज भेजे, तो सोचिए – क्या उन्हें भी थोड़ा उनकी ही दवा चखाई जाए?

आपका क्या अनुभव रहा है वॉइस मैसेज या सपोर्ट टीम के साथ? नीचे कमेंट में जरूर शेयर करें – आपकी कहानी भी किसी के चेहरे पर मुस्कान ला सकती है!


मूल रेडिट पोस्ट: Support kept using voice messages, so I gave them a taste of their own medicine