जलती सिगरेट और मुस्तांग: जब कूड़ा सड़क पर फेंकने वाले को मिला तगड़ा सबक
आपने कभी सड़क पर चलते हुए देखा है कि कोई अपना कूड़ा सरेआम फेंक देता है? चाहे वो चिप्स का पैकेट हो या जलती सिगरेट की बट, ऐसे लोग मानो खुद को शेरसमझते हों। लेकिन क्या हो, जब ऐसे किसी "शेर" को कोई आम आदमी ही उसके अंदाज में जवाब दे दे? आज की कहानी बिल्कुल ऐसी ही है – थोड़ा सा मसालेदार, थोड़ी सी सीख, और भरपूर मनोरंजन!
सीन सेट होता है: सब्ज़ियों की थैली, नई मुस्तांग और जलती सिगरेट
सोचिए – आप बाज़ार से ढेर सारी सब्ज़ियां लेकर अपने घर की ओर चले जा रहे हैं। थैलियां दोनों हाथों में भरी हैं और मन में बस यही जल्दी होती है कि घर पहुंचकर थोड़ा आराम मिलेगा। तभी, आपके सामने से एक दम चमचमाती काली Ford Mustang गुज़रती है – बिल्कुल नई, जैसे अभी शोरूम से निकली हो। आंखों में चमक आती है, लेकिन अगले ही पल सब बिगड़ जाता है।
गाड़ी वाला, जो शायद खुद को बॉलीवुड का विलेन समझ रहा था, अपनी खिड़की से जलती हुई सिगरेट की बट सड़क पर फेंक देता है। अरे भैया! सिगरेट पीना आपकी पसंद, लेकिन उसका कूड़ा तो सड़क का नहीं, डस्टबिन का है न! यही लापरवाही आग की तरह फैली रहती है – न सिर्फ सड़कों को गंदा करती है, बल्कि कभी भी बड़ा हादसा कर सकती है। उस वक्त हमारे नायक का खून खौल उठा।
बदला: मौका मिला और सिगरेट पहुंच गई सही जगह!
कहते हैं, 'भगवान के घर देर है, अंधेर नहीं'। जैसे-जैसे Mustang वाला आगे बढ़ा, वो हमारे नायक के पड़ोसी के घर के सामने रुका – डिलीवरी बॉय बनकर खाना देने आया था। और गाड़ी का ड्राइवर साइड खुला रह गया। बस, यहीं किस्मत ने साथ दिया!
पंद्रह सेकेंड का सुनहरा मौका था। जनाब ने अपनी सब्ज़ियां नीचे रखीं, सड़क पर पड़ी जलती बट उठाई, और चुपचाप Mustang की खुली ड्राइवर सीट पर फेंक दी – बिना कुछ बोले। न कोई टोका-टाकी, न कोई बहस। बस, 'जो बोया, वही पाया' वाला हिसाब। आस-पास कोई ताली तो नहीं बजी, लेकिन बदले की संतुष्टि अपने आप में शानदार थी।
कम्युनिटी की राय: सीख, हंसी और गुस्सा – सबकुछ
रेडिट की दुनिया में ऐसी कहानियां खूब चर्चा पकड़ती हैं। एक यूज़र ने बड़ी ही मज़ेदार बात कही – "पता नहीं उसकी बट ने उसकी बट को जलाया या नहीं!" यानी जिस बट (सिगरेट की) को उसने सड़क पर फेंका, वही कहीं उसकी गाड़ी की सीट या खुद को न जला दे!
एक और यूज़र ने गुस्से में लिखा – "मैं खुद स्मोकर था, लेकिन ऐसे लोग जो बट सड़क पर फेंकते हैं, उनसे बड़ी गंदगी कोई नहीं। भाई, पॉकेट में डाल दो, डिब्बा रखो, कितना मुश्किल है?" कई पुराने स्मोकर्स ने भी माना कि ये आदत वाकई बुरी है – "मैंने अपने बैग में छोटा सा ऐशट्रे रखा था, 25 साल तक – इतनी बड़ी बात थोड़ी है!"
यहां तक कि एक ने तो मज़ाक में कहा – "पुराने ज़माने में लोग सिनेमा हॉल में भी कूड़ा ऐसे ही फेंक देते थे। क्या सफाई वाले को रोज़गार देने के लिए?" अब तो ऐसा सोचना भी अजीब लगेगा।
एक और टिप मिली – "कभी भी जलती बट डस्टबिन में मत डालो! भले ही ठंडी लग रही हो, उसमें आग सुलगती रह जाती है।" एक यूज़र ने तो किस्सा सुनाया कि उनके किरायेदार के दोस्त ने प्लास्टिक के कूड़ेदान में जलती बट फेंकी, दो घंटे बाद कूड़ेदान पिघल गया और कार का टायर भी! शुक्र है पड़ोसी ने आग देख ली, वरना बड़ा नुकसान हो जाता।
भारत में भी है ये समस्या – और हल भी
हमारे देश में तो सड़क पर कूड़ा फेंकना जैसे एक 'राइट' मान लिया गया है। पान की पीक हो या सिगरेट की बट, लोग सोचते हैं – "चलो छोड़ो, सब ऐसे ही करते हैं।" लेकिन जरा सोचिए, ये छोटी-छोटी लापरवाहियां नालियों को जाम कर देती हैं, पर्यावरण को बर्बाद करती हैं, और कभी-कभी तो आग भी लगा सकती हैं – जैसे पहाड़ों पर हर साल होता है।
कई शहरों में अब नियम सख्त हो रहे हैं, चालान भी कटते हैं – लेकिन जब तक खुद में जिम्मेदारी नहीं आएगी, सफाई सपना ही रहेगी। स्मोकर्स के लिए छोटे पॉकेट ऐशट्रे, पुराने डिब्बे या बोतल में थोड़ा पानी – ये सब नुस्खे अपनाए जा सकते हैं। और हां, सिगरेट पीना आपकी मर्जी – लेकिन उसकी बट डस्टबिन में डालिए, सड़क पर नहीं!
निष्कर्ष: बदला छोटा था, पर सबक बड़ा!
कहानी का असली मज़ा यही है – कभी-कभी छोटा सा बदला भी बड़ा असर छोड़ जाता है। नायक ने कोई बड़ी लड़ाई नहीं की, बस मौके का फायदा उठाया और उसी अंदाज में जवाब दे दिया। वो कहावत है न – "जैसी करनी, वैसी भरनी।" अगली बार जब कोई सड़क पर कूड़ा फेंके, तो याद रखिए – सफाई सिर्फ सरकारी जिम्मेदारी नहीं, हमारी भी है।
आपका क्या कहना है? क्या आप भी कभी ऐसे किसी 'कूड़ा प्रेमी' को सबक सिखाना चाहेंगे? या आपके पास कोई ऐसी मज़ेदार घटना है? कमेंट में जरूर बताइए, और सफाई का संदेश आगे फैलाइए। क्योंकि – "स्वच्छ भारत, स्वस्थ भारत!"
मूल रेडिट पोस्ट: Cigarette butts go in the trash, not the street.