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जब HR की ट्रेनिंग ने दिला दिया एक्स्ट्रा वेतन: नियमों की चालाकी से मिली जीत

एक किराना स्टोर के कर्मचारी की 3D कार्टून चित्रण, जो एचआर प्रशिक्षण के बाद अतिरिक्त वेतन प्राप्त कर रहा है।
यह जीवंत कार्टून-3D चित्रण उस क्षण को दर्शाता है जब एक कर्मचारी एचआर प्रशिक्षण से लाभ उठाते हुए अप्रत्याशित अतिरिक्त वेतन प्राप्त करता है। यह कार्यस्थल में श्रम कानूनों को समझने के महत्व को बेहतरीन तरीके से पेश करता है!

क्या आपने कभी ऑफिस के नियमों का ऐसा फायदा उठाया है कि बॉस भी हैरान रह जाएँ? ऑफिस में अक्सर ऐसा होता है कि नियम-कायदे सिर्फ दिखावे के लिए बनाए जाते हैं, असल में उन पर कोई ध्यान नहीं देता। लेकिन जब कोई कर्मचारी उन्हीं नियमों की सच्ची पालना करने लगे, तो बड़े-बड़ों के पसीने छूट जाते हैं! आज की कहानी कुछ ऐसी ही है—एक बड़े ग्रोसरी स्टोर में काम करने वाले कर्मचारी की, जिसने HR की ट्रेनिंग को इतनी ईमानदारी से निभाया कि खुद HR वाले भी सोच में पड़ गए।

नियमों का अक्षरशः पालन—जब 'कानून की किताब' ही हथियार बन गई

इस कहानी के नायक ने पहले एक ब्रूपब और फिर सिनेमा हॉल में मैनेजर की जिम्मेदारी संभाली थी, यानी लेबर लॉ (श्रम कानून) की अच्छी-खासी समझ रखते थे। अब वे एक बड़े ग्रोसरी चैन में डिपार्टमेंट मैनेजर थे। एक दिन HR ने सब लीडर्स के लिए 'कॉल-आउट' की ट्रेनिंग रखी, जिसमें यह बताया गया कि अगर कोई कर्मचारी मैनेजर को सिर्फ टेक्स्ट करके छुट्टी की सूचना दे, तो क्या करना चाहिए।

HR ने पूछा, "अगर कोई आपको टेक्स्ट करे तो?"
कर्मचारी बोले, "इग्नोर कर दो।"
HR ने टोका, "नहीं, आपको उन्हें कॉल-आउट लाइन पर कॉल करने के लिए कहना है, नाम, कर्मचारी ID और शिफ्ट की जानकारी छोड़ने को बोलना है।"
कर्मचारी ने फौरन पूछा, "क्या यह ज़रूरी है?"
HR ने कहा, "बिलकुल!"
कर्मचारी ने चालाकी से जवाब दिया, "तो क्या आप यह सब हमें मेल कर देंगे?"
HR ने कहा, "हाँ," और मेल भी कर दी।

देखा जाए तो भारत में भी अक्सर अधिकारी मौखिक निर्देश देते रहते हैं, लेकिन जब लिखित में देने को कहो, तो या तो बात बदल जाती है या फिर चुप्पी छा जाती है। एक Reddit कमेंट में किसी ने लिखा, "अगर कोई आपसे कहे कि इसे लिखकर दो, तो दो बार सोच लो कि आपने क्या कहा है!"—बिल्कुल सच्ची बात है।

छुट्टी के दिन भी काम? पैसा तो बनता है!

तीन महीने बाद, एक नया कर्मचारी किसी तरह मैनेजर का नंबर निकालकर उन्हें छुट्टी के लिए टेक्स्ट कर देता है। मैनेजर तुरंत नियम के मुताबिक जवाब देते हैं—"कॉल-आउट लाइन पर कॉल करो और सब जानकारी छोड़ो।" अब, ये घटना बुधवार की थी और वो उनका इकलौता छुट्टी का दिन था। नियमानुसार, अगर कोई कर्मचारी छुट्टी के दिन भी एक मिनट काम करता है, तो कंपनी को पूरा एक घंटा वेतन देना पड़ता है। और जब लगातार सात दिन काम हो जाए, तो सातवें दिन का वेतन डेढ़ गुना (टाइम एंड ए हाफ) देना पड़ता है।

तो इस एक टेक्स्ट के जवाब में, कर्मचारी ने टाइमकीपर से एक घंटे का वेतन डलवाया। साथ ही, सातवें दिन की शिफ्ट डेढ़ गुना वेतन पर चली गई। कुल मिलाकर $200 एक्स्ट्रा मिल गए! भारत में भी कई बार ओवरटाइम या छुट्टी के दिन काम करने का पैसा मांगना पड़ता है, लेकिन यहाँ तो नियम का ऐसा इस्तेमाल—वाह!

HR का गुस्सा और कानून की जीत

कंपनी को जब यह पता चला कि एक टेक्स्ट के कारण कर्मचारी को $200 ज्यादा मिल गए, तो HR ने बुलाकर 'सिस्टम का दुरुपयोग' कहकर नोटिस देने की धमकी दी। मगर हमारे नायक ने HR की वही मेल दिखा दी, जिसमें हर स्टेप लिखा था। उन्होंने साफ कहा, "मेरा समय मेरी ज़िंदगी है, एक मिनट भी काम करूँगा तो उसका पैसा लूँगा। अगर सज़ा दोगे तो कोर्ट में मिलेंगे, और वहाँ तुम्हें और बड़ा मुआवज़ा देना पड़ेगा।"

HR चुप हो गए, बोले—"डायरेक्टर से बात करके बताते हैं।" और फिर कभी कुछ नहीं कहा। हफ्ते भर बाद एक नया मेल आया—अब कोई भी मैनेजर को छुट्टी के दिन टेक्स्ट नहीं करेगा, और अगर बहुत जरूरी हुआ, तो स्टोर से कॉल आएगी। यानी नियमों के चक्कर में HR खुद फँस गए!

एक मज़ेदार कमेंट था—"अगर सामने वाला गलती कर रहा है, तो बीच में मत टोकिए। कंपनी के लीगल डिपार्टमेंट को ही सब सँभालने दीजिए!"—बिल्कुल वैसे ही जैसे बॉलीवुड फिल्मों में हीरो कानून की किताब लेकर विलेन को चौंका देता है।

सबक: काम का सम्मान, नियमों की समझ

इस कहानी से जो सबसे बड़ा सबक मिलता है, वो ये कि—

  1. अपने काम और समय का सम्मान कीजिए।
  2. जो भी निर्देश मिले, उन्हें लिखित में माँगिए।
  3. नियमों की जानकारी होना बहुत जरूरी है—ये आपको न केवल न्याय दिला सकता है, बल्कि एक्स्ट्रा फायदा भी दे सकता है!
  4. और सबसे जरूरी, कभी-कभी 'कानून की किताब' सबसे बड़ा हथियार बन जाती है।

एक कमेंट में किसी ने लिखा—"मैं कभी भी अपने निजी नंबर से ऑफिस वालों से बात नहीं करता, सिर्फ ऑफिस के समय में ही उपलब्ध रहता हूँ।" यह बात यहाँ भी लागू होती है—काम और निजी जीवन की सीमाएँ ज़रूरी हैं।

निष्कर्ष: आपकी कहानी क्या है?

तो दोस्तो, कभी आपके साथ भी ऐसा हुआ है कि ऑफिस के नियमों को ठीक से निभाने पर उल्टा फायदा मिल गया हो? या फिर आपको भी कभी छुट्टी के दिन काम करने के पैसे के लिए लड़ना पड़ा हो? अपनी कहानी हमें ज़रूर बताइए कमेंट में! और हाँ, अगली बार HR या बॉस कोई नया नियम बताए, तो एक बार जरूर कहिए—"इसे लिखकर भेज दीजिए!"

क्योंकि जैसा एक कमेंट में कहा गया, "एक मिनट भी काम, तो पूरा वेतन—और वो भी नियम के साथ!"

आपके अनुभव क्या कहते हैं? साझा कीजिए, चर्चा कीजिए—क्योंकि काम के नियमों की सच्चाई, कभी-कभी बहुत मज़ेदार हो जाती है!


मूल रेडिट पोस्ट: HR training leads to me getting paid extra.