जब हार्वर्ड की डिग्री भी डिब्बा खोलने में हार गई: एक रूममेट की मजेदार कहानी
हमारे यहां अक्सर सुना जाता है — “डिग्री तो बस कागज का टुकड़ा है, असली हुनर तो काम में दिखता है।” लेकिन क्या हो जब किसी के पास दुनिया की सबसे नामी यूनिवर्सिटी, हार्वर्ड, की पीएचडी हो — और फिर भी वो एक मामूली डिब्बा खोलने वाला तक इस्तेमाल न कर पाए? जी हां, आज की कहानी है अमेरिका के एक घर की, जहां किरायेदार और डिब्बा दोनों ही मुश्किल में पड़ गए!
हार्वर्ड का गुरूर और डिब्बा खोलने वाला: रंगमंच तैयार है
कहानी है एक ऐसे मकान मालिक की, जो अपने घर के कमरों को दोस्तों या उनके जानकारों को किराए पर देता है। एक दिन उसके पास एक दोस्त के पूर्व पति के लिए रहम आ गया — रूम रेंट में छूट भी दी, पर जनाब फिर भी किराया लेट करते रहे (ये कहानी फिर कभी)! वैसे तो ये रूममेट हर मामले में सिरदर्द था, लेकिन सबसे बुरी आदत थी हर वक्त डिब्बे वाला खाना खाना और दूसरों का खाना भी चुपके से चट कर जाना।
एक दिन जनाब ने घर का डिब्बा खोलने वाला (can opener) तोड़ दिया। और फिर बड़ी अकड़ से मकान मालिक से बोले, “अब आप लैंडलॉर्ड हैं, नया डिब्बा खोलने वाला लाना आपकी जिम्मेदारी है!”
यहां दिलचस्प बात ये थी कि साहब हार्वर्ड से पीएचडी कर चुके थे, और हर दूसरी बात में इस बात का ढिंढोरा पीटते रहते थे। भले ही उनकी नौकरी न्यूनतम वेतन वाली थी, लेकिन अपने हार्वर्ड की डिग्री का रौब जमाना कभी नहीं भूलते। वहीं, हमारे मकान मालिक ने भी एक सरकारी यूनिवर्सिटी से पीएचडी की थी, और Nobel Prize विजेताओं के साथ काम भी किया था — लेकिन उनका स्वभाव शांत और व्यावहारिक रहा।
चालाकी की तड़का: ‘डिग्री’ बनाम ‘दिमाग’
अब असली मजा यहीं से शुरू होता है। मकान मालिक ने नया डिब्बा खोलने वाला खरीदा — लेकिन ऐसा जिसमें हाथ आजमाए बिना डिब्बा नहीं खुले! वो दिखने में इलेक्ट्रिक जैसा था, लेकिन चलता था हाथ से। मकान मालिक को पता था कि ये रूममेट इसे कभी नहीं समझ पाएगा, और वही हुआ! हर दिन कूड़े में कुचले हुए, अधखुले डिब्बे मिलते — वो भी बिना रीसायकल किए (इको-फ्रेंडली तो दूर की बात)!
आखिर हार मानकर हार्वर्ड वाले साहब आए, “ये डिब्बा खोलने वाला चलता कैसे है?”
मकान मालिक ने मुस्कराकर कहा, “अरे, जब हार्वर्ड पीएचडी वाला आदमी हूं, तो आपसे तो ये छोटी सी चीज खुद ही हो जानी चाहिए न! मैंने तो सरकारी यूनिवर्सिटी से पढ़कर भी इसे सीख लिया!”
यहां एक Reddit कमेंट की बात याद आ गई — “अगर हार्वर्ड पीएचडी वाला डिब्बा नहीं खोल सकता, तो शायद उसे चम्मच से ही काम चला लेना चाहिए, या फिर डिग्री का रौब झाड़ने से पहले मदद मांग लेनी चाहिए!” ये बात तो बिलकुल सच है, है ना?
किताबों की विद्या बनाम असल जिंदगी की समझ
कई लोगों ने इस कहानी पर प्रतिक्रिया दी कि डिग्री से असल जिंदगी की समझ नहीं आती। एक यूज़र ने लिखा, “कुछ लोग बस परीक्षा पास करने में माहिर होते हैं, असली हुनर तो अपनी समस्या खुद सुलझाने में है।” एक और ने चुटकी ली, “सारा समय हार्वर्ड का रौब झाड़ते रहे, पर डिब्बा खोलने वाले के सामने घुटने टेक दिए!”
हमारे देश में ‘जुगाड़’ का बड़ा महत्व है — यहां लोग टूटी बाल्टी से पौधे सींच लेते हैं, नींबू के बीज से नया पौधा उगा लेते हैं। और वही जुगाड़ की भावना इस कहानी में भी झलकती है। Reddit पर एक और मजेदार सुझाव आया — “अगर ये भी न चले, तो ऐसे डिब्बे ले आओ जिनमें खींचकर खोलने वाली पट्टी (pull tab) हो!” भई, इतने नाजुक हार्वर्ड वाले हाथों के लिए यही आसान रहेगा।
डिग्री का घमंड और असली काबिलियत
कई कमेंट्स में ये भी कहा गया कि हार्वर्ड जैसी बड़ी यूनिवर्सिटी में पहुंचने वाले सब काबिल नहीं होते — अक्सर पहुंच, पैसे या परिवार की वजह से भी लोग वहां तक पहुंच जाते हैं। एक यूज़र बोले, “असली समझ तो उसी में है, जो खुद अपनी समस्या सुलझा ले — वरना चाहे जितनी बड़ी डिग्री हो, काम नहीं आएगी।”
एक और कमेंट में तो यहां तक लिखा, “कैसे पता चले कोई हार्वर्ड गया है? फिक्र मत करो, वो खुद ही बता देगा!”
और है भी सही — अपने देश में भी कुछ लोग IIT, IIM या DU का नाम बार-बार लेते हैं, जैसे कोई जादुई ताबीज हो!
सोचने वाली बात: डिग्री, हुनर या व्यवहार?
इस कहानी में असली सीख यही है — डिग्री, रुतबा, या बड़ी-बड़ी बातें, ये सब तब बेकार हो जाते हैं, जब असल जिंदगी की छोटी-छोटी चुनौतियों से दो-चार होना पड़े। हमारे यहां एक कहावत है, “पढ़ा लिखा गधा वही रहता है!” यानी सिर्फ पढ़ाई काफी नहीं, असली काबिलियत तो व्यवहार और जुगाड़ में नजर आती है।
और हां, एक Reddit यूज़र की बात ने सबका दिल जीत लिया — “अगर वो फिर भी शिकायत करे, तो कह देना — ‘भैया, ये डिब्बा खोलने वाला है, can't opener नहीं!’”
आपकी राय?
क्या आपके साथ कभी ऐसा हुआ है, जब किसी ने अपनी डिग्री या रुतबे का घमंड दिखाया हो, लेकिन काम की बारी आई तो घुटने टेक दिए? या फिर कभी आपको किसी जुगाड़ से बड़ी समस्या का हल मिला हो? अपनी मजेदार कहानी या राय नीचे कमेंट में जरूर बताएं — और हां, अगली बार डिब्बा खोलने वाला खरीदें तो पहले खुद चला कर देख लें!
मूल रेडिट पोस्ट: Roommate broke my can opener, so I bought a new one that I knew I could figure out how to use.