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जब होटल के रिसेप्शन पर बन गया 'ड्रामा किंग' मेहमान का सीरियल, और मैं बन गया विलेन!

होटल के रिसेप्शन पर एक आदमी की कार्टून-शैली 3D चित्रण, जो कमरे की चाबी मांग रहा है और अनावश्यक नाटक बना रहा है।
इस जीवंत कार्टून 3D दृश्य में, एक निराश आदमी होटल रिसेप्शन पर एक चाबी की तलाश करता है जो उसकी नहीं है। जानें कैसे इस मजेदार मुठभेड़ में अनावश्यक नाटक सामने आता है!

कहते हैं, होटल का रिसेप्शन वो जगह है जहाँ आपको न जाने कितने किस्से और किरदार देखने को मिल जाते हैं – कोई फिल्मी हीरो, कोई सीरियल की सास, तो कोई डेली सोप का विलेन! लेकिन हाल ही में मेरे साथ जो हुआ, उसने तो मुझे सच में किसी सीरियल का हिस्सा ही बना दिया।

तो आइए, सुनिए मेरी कहानी – 'ड्रामा किंग' मेहमान और उनके साथ हुई मेरी जंग, जिसमें मैं खुद उनके लिए विलेन बन गया!

पहला अंक: चाबी की चक्करबाज़ी और ग़लतफ़हमी

एक दिन, दोपहर की हलचल में एक सज्जन ताव में रिसेप्शन पर आए, बोले, “मेरे कमरे की चाबी चाहिए।” अब होटल की प्रक्रिया के हिसाब से मैंने बड़े आराम से पूछा, “कौन से कमरे के लिए, सर?” कमरे का नंबर मिलते ही मैंने कंप्यूटर में नाम देखा – लेकिन साहब का नाम उसमें नहीं था।

मैंने फिर पूछा, “सर, बुकिंग किस नाम से है?”
उन्होंने एक ऐसा नाम बताया जो हमारे यहाँ लड़का-लड़की दोनों के लिए चलता है (जैसे भारत में ‘सजल’ या ‘किरण’), तो मैंने सोचा शायद महिला होंगी, और मैंने जवाब दिया, “ठीक है, मैं उनसे बात करती हूँ।”

बस, इतना सुनना था कि वो भड़क उठे – “HIM! वो मेरे पति हैं!”

अब गलती मेरी थी, मैंने नाम सुनते ही अंदाज़ा लगा लिया, पर होटल में तो कई बार ऐसे नाम आते हैं जिनसे कन्फ्यूजन हो ही जाती है। मैंने फ़ौरन माफ़ी मांगी – “माफ़ कीजिए, सर, मेरी गलती है। मैं अब से ऐसे शब्दों का ध्यान रखूँगी।”

अब अगला सवाल था, बिना बुकिंग में नाम के मैं उन्हें चाबी कैसे दूँ? मैंने होटल की सुरक्षा के लिए जरूरी सवाल पूछे – ईमेल, फ़ोन नंबर, वगैरह। वो हर जवाब गुस्से में ऐसे दे रहे थे जैसे मैं किसी बड़े राज़ की जांच कर रही हूँ। पास में और भी मेहमान खड़े थे, और साहब का ड्रामा चालू था – “अगर मेरी चाबी खो जाए तो ये मुझे अंदर ही न जाने दे!”

(मन में सोच रही थी – ‘सर, यही तो होटल का नियम है, हर किसी को ऐसे ही चाबी नहीं मिलती!’)

ख़ैर, उन्होंने सब सही-सही जवाब दे दिए और मैंने रिकॉर्ड चेक किया – वो चेक-इन के वक्त अपने पति के साथ थे, कैमरा में भी दिख रहे थे – तो मैंने उन्हें चाबी दे दी।

लेकिन जनाब ने चाबी लेते वक्त ऐसा 'डेथ-स्टेयर' दिया, जैसे मैं उनकी ज़िंदगी बर्बाद कर रही हूँ! एक मिनट तक घूरते रहे – मैं मुस्करा दी, “सर, और कुछ मदद कर सकती हूँ?”

दूसरा अंक: रात की वापसी और दोबारा सामना

शिफ्ट खत्म होते ही मैं होटल से बाहर निकली, लेकिन याद आया – ओहो, कार की चाबी तो लॉबी में ही छूट गई! तुरंत वापस गई तो देखा, वही 'ड्रामा किंग' लॉबी के बाहर खड़े हैं।

रात का वक्त था, होटल का दरवाज़ा ऑटोमैटिक लॉक हो गया था – और मेरे पास मैनेजर के फ़ैसले से एक्स्ट्रा चाबी थी ही नहीं। मैंने उन्हें विनम्रता से बताया – “सर, माफ़ कीजिए, मेरे पास दरवाजा खोलने की चाबी नहीं है, ये मैनेजमेंट का नियम है।”

अब उनका जवाब सुनिए – “ओह हाँ, ज़ाहिर है, फिर से आप ही मिलेंगी!”
ऐसी तिलमिलाहट, जैसे मैं उनकी ज़िंदगी की सबसे बड़ी मुश्किल बन गई हूँ!

अब मुझे पक्का यकीन हो गया – मैं उनके लिए किसी सीरियल का विलेन बन चुकी हूँ, और वो खुद को हीरो समझकर रोज़ नया ड्रामा करते रहेंगे!

होटल की दुनिया और 'ड्रामा किंग' का सच

अक्सर हमारे यहाँ भी ऐसे मेहमान आ जाते हैं, जो हर छोटी बात को बड़ा मुद्दा बना देते हैं। एक कमेंट करने वाले ने तो बिल्कुल सही लिखा, “कुछ लोग तब तक खुश नहीं होते जब तक परेशान न हों, और फिर भी खुश नहीं होते!”

कई बार मैनेजर लोग समझाते हैं – “व्यक्तिगत मत लो, मेहमान होटल से नाराज़ हैं, आपसे नहीं।” लेकिन सच्चाई ये है कि जब उनके मन-माफिक न मिले, तो सारा गुस्सा कर्मचारी पर ही निकलता है। कई तो ऐसे होते हैं, जैसे किसी नाटक के लिए ऑडिशन दे रहे हों – हर बात में एक्स्ट्रा ड्रामा!

कुछ पाठकों ने होटल प्रोटोकॉल पर भी सवाल उठाए – “अगर कोई सही-सही सारी जानकारी दे दे, तो क्या चाबी देनी चाहिए?” इस पर अनुभवी कर्मचारियों ने जवाब दिया – “कई बार लोग सारी डिटेल जानते हैं, पर फिर भी सुरक्षा के लिए बिना बुकिंग वाले या बिना रूम के कन्फर्मेशन के चाबी नहीं दी जाती।”

एक और कमेंट बड़ी मज़ेदार थी – “जैसे ही मैनेजर सामने आते हैं, वैसे ही ये सब मेहमान शरीफ बन जाते हैं!” ये बात हर होटल कर्मचारी की ज़िंदगी का सच है।

भारतीय संदर्भ: होटल, ग्राहक और 'सीरियल' का तड़का

हमारे देश में भी, चाहे शादी-ब्याह के होटल हों या बिज़नेस ट्रैवल, ऐसे 'ड्रामा किंग' और 'ड्रामा क्वीन' हर जगह मिल जाते हैं। कोई चाय में चीनी कम होने पर बखेड़ा करता है, कोई चेक-इन में आधे घंटे के लिए पूरा रिसेप्शन सिर पर उठा लेता है।

कई बार तो ऐसा लगता है जैसे होटल कर्मचारी की असली नौकरी लोगों के मूड झेलने और किस्से सुनने की ही है! एक पाठक ने तो लिखा – “कभी-कभी तो लगता है, मैं किसी के निजी सीरियल का खलनायक बन गया हूँ!”

और सच मानिए, यही होटल की दुनिया का असली मज़ा है – हर दिन नई कहानी, नए किरदार, और कभी-कभी खुद के लिए भी एक नई पहचान!

निष्कर्ष: आपकी राय?

तो भाइयों और बहनों, क्या आपके साथ भी कभी ऐसा कोई 'ड्रामा किंग' या 'ड्रामा क्वीन' टकराया है? या होटल में कोई अजब-गजब अनुभव हुआ हो?
अपनी कहानी कमेंट में जरूर शेयर करें – क्योंकि किस्से तो सबके पास हैं, बस सुनाने वाले चाहिए!

अगली बार जब आप होटल जाएं, तो रिसेप्शन वालों की मुस्कराहट के पीछे छुपे उनके 'सीरियल' के किस्सों को जरूर याद कीजिएगा!


मूल रेडिट पोस्ट: Drama king guest