जब होटल के मेहमान ने पूछा: 'भैया, गीज़ का कंट्रोल आपके पास है क्या?
भाई साहब, होटल की रिसेप्शन डेस्क पर बैठना क्या आसान काम है? दिन हो या रात, कौन-सा मेहमान किस तरह का सवाल पूछ लेगा, कह नहीं सकते! आजकल तो सोशल मीडिया पर ऐसी-ऐसी मज़ेदार कहानियाँ घूम रही हैं कि पढ़कर हँसी छूट जाए। लेकिन जो हाल Reddit पर एक होटल नाइट शिफ्ट कर्मी का हुआ, वो तो गज़ब ही था! सोचिए, रात के 2 बजे कोई गेस्ट कमरे की चाबी लेकर, तमतमाए चेहरे के साथ रिसेप्शन पर आ जाए और कहे, "आपको बाहर गीज़ (हंस) का कंट्रोल रखना चाहिए!"
"गीज़ की बीट, होटल की जिम्मेदारी?"
अब सोचिए ज़रा, हमारे यहाँ शादी-ब्याह में बारातियों की शरारतें, या मोहल्ले के बच्चों की पतंगबाजी तो होटल वालों को झेलनी ही पड़ती है, लेकिन गीज़? वो भी आसमान से उड़ते हुए? हुआ यूँ कि एक महिला मेहमान होटल के बाहर से अंदर आईं, कमरे की चाबी तो थी, मगर नाम बताने को तैयार नहीं! गुस्से से बोलीं, "आप बाहर के पार्किंग लॉट का ध्यान क्यों नहीं रखते?" रिसेप्शनिस्ट को भी पहले लगा मज़ाक कर रही हैं, मगर नहीं, मैडम तो एकदम गंभीर थीं।
कई सवाल-जवाब के बाद पता चला कि बाहर गीज़ों का झुंड उड़ रहा था, और उनमें से एक ने ऊपर से 'कांड' कर दिया — मतलब बीट गिरा दी, जो 'लगभग' मैडम के ऊपर गिर जाती! अब बात यहीं तक होती तो ठीक, लेकिन उन्होंने बाकायदा छूट (discount) की माँग कर डाली। होटल वाले बेचारे ने भी क्या जवाब दें? आख़िरकार, मज़ाकिया अंदाज़ में लॉगबुक में लिख दिया – "मैं गीज़ों को सूचित करूँगा कि मेहमानों के पास बीट करना अशिष्टता है।" हैरत की बात, मैडम को यह जवाब संतुष्ट कर गया!
होटल स्टाफ और 'पार्किंग लॉट के प्राणी'
हमारे देश में भी कई बार होटल या लॉज के स्टाफ को अजीब-अजीब फरमाइशें झेलनी पड़ती हैं – जैसे, "भैया, जल्दी से कुर्सी हटा दो, वहाँ बिल्ली बैठी है", या "कमरे में छिपकली दिख गई, रूम बदल दो।" Reddit पर इस किस्से के नीचे कमेंट्स में भी मज़ेदार प्रतिक्रियाएँ आईं। एक यूज़र ने मज़ाक में लिखा, "रात की ड्यूटी का ओथ लेते समय, होटल स्टाफ को सारी बुरी शक्तियों का मालिक बना दिया जाता है – जिसमें गीज़ भी शामिल हैं।"
एक और ने कहा, "आपको बाहर जाकर गीज़ों को आवाज़ लगानी चाहिए – 'आओ मेरे सेवकों, अपने मालिक के आदेश सुनो!'" ऐसे व्यंग्य भरे कमेंट्स पढ़कर हमें अपने देसी हास्य कलाकारों की याद आ जाती है, जैसे किसी नाटक में विलेन अपने गुंडों को बुला रहा हो – बस यहाँ गुंडों की जगह गीज़ हैं!
ये होटल या चिड़ियाघर है?
कई लोगों ने पूछा, "अगर होटल स्टाफ गीज़ को कंट्रोल कर सकता है, तो क्या अगली बार बरसात में बादलों को भी रोकेंगे?" एक कमेंट में एक यूज़र ने अपने अनुभव साझा किए, कैसे एक गेस्ट ने उनसे बाहर भौंकते कुत्तों को चुप कराने के लिए कहा – जवाब मिला, "वो कुत्ते नहीं, जंगली सियार हैं।" फिर भी गेस्ट रूठ गया!
हमारे यहाँ भी कई बार लोग पूछ बैठते हैं – "भैया, ये कबूतर यहाँ इतनी गंदगी क्यों कर रहे हैं?" या "मच्छर बहुत हैं, होटल की जिम्मेदारी है!" मानो प्रकृति की सारी व्यवस्था होटल वालों के हाथ में हो।
एक और कमेंट में किसी ने मज़ाक में लिखा, "होटल की लॉबी में कोई डैडी पूछता है – 'भैया, यहाँ के जानवर रात में कहाँ सोते हैं?'" जवाब मिलता, "अंदर शेड में बंद कर देते हैं, सुबह खोलते हैं!" ऐसी बातें सुनकर बॉलीवुड के किसी हास्य दृश्य की याद आ जाती है, जहाँ हर समस्या का हल होटल वाले के पास होता है – चाहे वो गीज़ हों, कबूतर, या जिद्दी मेहमान!
मेहमानों की फरमाइशें और होटल वालों की मजबूरी
इन किस्सों से एक बात तो साफ़ है – चाहे देशी होटल हो या विदेशी, मेहमानों की उम्मीदें कभी-कभी हद से बाहर चली जाती हैं। कोई गीज़ की बीट पर डिस्काउंट चाहता है, कोई छिपकली देखकर हंगामा करता है, तो कोई बिस्तर की नरमी-गरमी पर बहस करता है।
एक कमेंट ने तो ये तक लिख दिया, "अगर आप पर गीज़ की बीट गिरने का डर है, तो या तो छाता लेकर चलिए, या फिर प्रकृति के मज़ाक को हँसी में टाल दीजिए।" और सच कहें तो, यही तो जीवन है – जहाँ हर रोज़ कुछ नया देखने-सुनने को मिलता है।
अंत में – हँसी, मज़ाक और सीख
तो अगली बार जब आप किसी होटल में जाएँ और कोई प्राकृतिक 'सरप्राइज' मिले – जैसे गीज़ उड़ते दिख जाएँ, या कबूतर की बीट गाड़ी पर गिर जाए – तो होटल स्टाफ को भगवान न समझें। वो भी इंसान हैं, और उनकी अपनी सीमाएँ हैं। ऐसी घटनाओं को थोड़ा हल्के-फुल्के अंदाज़ में लें, शायद हँसी भी आ जाए!
अगर आपके पास भी ऐसे कोई मज़ेदार या अजीब होटल के अनुभव हैं, तो नीचे कमेंट में ज़रूर साझा कीजिए। होटल वाले हों या मेहमान, हम सबको हँसी बांटना चाहिए – वरना गीज़ तो अपने अंदाज़ में ही 'गिफ्ट' देते रहेंगे!
मूल रेडिट पोस्ट: I guess I'm in charge of the geese?