जब होटल की मेहमाननवाज़ी हुई फेल: 'शार्टगार्डन' की अनोखी करतूत!
कहानी है एक ऐसी रात की, जब एक होटल कर्मचारी को लगा कि आज तो सब शांत है, कोई सिरदर्द नहीं, और शायद भगवान ने उसकी सुन ली है। लेकिन किस्मत के खेल भी अजीब होते हैं—जहाँ खुशफहमी हो, वहीं से झंझट शुरू हो जाती है। होटल में आखिरी दो चेक-इन बचे थे, एक विदेशी एजेंसी से और दूसरा वो मेहमान जो हर बार ऑडिट से एक घंटा पहले ही आ जाता है। तभी दरवाज़े पर एक लड़की हाथ में पेपर लेकर आ जाती है—और यहीं से शुरू होता है असली तमाशा!
होटल इंडस्ट्री में 'मेलजोल' की असली परीक्षा
भारत में अक्सर सुना जाता है, "अतिथि देवो भव:" यानी मेहमान भगवान समान हैं। होटल इंडस्ट्री भी इसी भावना पर चलती है, पर इस कहानी में तो जैसे सब उल्टा हो गया। लड़की के हाथ में जो कागज़ था, उसमें साफ-साफ लिखा था कि उसे इस होटल में रुकना है। लेकिन होटल फुल था और किसी ने भी उसकी बुकिंग के बारे में जानकारी नहीं दी थी।
जब लड़की से पूछा गया कि उसकी बुकिंग क्यों रद्द हुई, तो उसने हड़बड़ाहट में पहले होटल से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन जवाब नहीं मिला। तब हमारे नायक (कर्मचारी) ने खुद फोन मिलाया—और वहाँ से जो जवाब आए, वो किसी मसालेदार हिंदी टीवी सीरियल से कम नहीं थे!
'शार्टगार्डन' के कर्मचारी: बातों में भी बवाल
फोन उठाते ही दूसरे होटल की रिसेप्शनिस्ट ने सीधा आरोप लगा दिया कि यहाँ झूठ बोला जा रहा है। कभी कहती- मैंने कॉल किया था, कभी कहती- मेरे मैनेजर ने बात की थी, और फिर उल्टा हमारे नायक को ही दोषी ठहरा दिया। एक जगह तो उसने इतना असभ्य बोल दिया कि सुनकर हर कोई हैरान रह जाए—होटल इंडस्ट्री में ऐसी भाषा?
यहाँ एक कमेंट याद आता है, "आपका जीएम अगले दिन शार्टगार्डन के जीएम से पूछे कि बचपन में झूला दीवार के पास था क्या?"—यानि दिमाग की दिशा ही उल्टी है! और एक यूज़र ने चुटकी ली, "शार्टगार्डन ने तो अपनी इज्ज़त पर ही दाग लगा लिया!" अब सोचिए, अगर आपके मोहल्ले के होटलवाले ऐसे बदतमीज़ हो जाएं, तो लोग क्या कहेंगे?
मेहमान को बनाना 'पिंगा-बॉल': एक होटल से दूसरे होटल
आम तौर पर, जब एक होटल फुल हो जाए, तो दूसरे होटल में जगह दिलाने में मदद की जाती है। लेकिन शार्टगार्डन होटल ने तो लड़की को हर जगह भेजने का प्लान बना लिया—कहीं कॉल नहीं किया, सिर्फ नाम लिया और भेज दिया। हमारे नायक ने खुद अपने नंबर से बाकी होटलों में फोन घुमा डाले, लेकिन हर जगह से जवाब—"हम भी फुल हैं, हमें कोई कॉल नहीं मिली।"
एक यूज़र ने टिपण्णी की, "हमारे यहाँ तो होटलवाले एक-दूसरे की मदद करते हैं, पर यहाँ तो सब उल्टा हो गया।" एक और ने कहा, "ऐसी बदतमीज़ी देखकर तो लगता है कि इनका होटल पहले भी बैन हुआ होगा, और फिर से होना चाहिए!"
आखिरकार, इंसानियत की जीत
जब सब दरवाज़े बंद हो गए, तो हमारे नायक ने अपने नेटवर्क का इस्तेमाल कर एक सिस्टर प्रॉपर्टी में आखिरी समय में एक फ्री कमरा दिला दिया। रात के बारह बजे, जब हर कोई थक-हारकर हार मान चुका था, तब जाकर उस लड़की को छत मिली।
यहाँ से सीख मिलती है कि चाहे हालात कितने भी कठिन हों, इंसानियत और प्रोफेशनलिज़्म सबसे ऊपर है। एक कमेंट में कहा गया, "मेहमान को परेशान करना, और अपनी गलती दूसरों पर डालना—ये तो सबसे बड़ी शर्मिंदगी है।"
निष्कर्ष: होटलवाले भी इंसान हैं, पर इंसानियत सबसे ज़रूरी
शार्टगार्डन होटल की इस हरकत ने न सिर्फ होटल इंडस्ट्री की साख गिराई, बल्कि ये भी दिखा दिया कि अगर सही सोच और टीमवर्क न हो, तो 'अतिथि देवो भव:' भी बस स्लोगन बनकर रह जाता है। आजकल के ज़माने में, जब ऑनलाइन रिव्यू से ही किसी होटल की किस्मत बदल जाती है, ऐसी हरकतों से तो ग्राहक हमेशा के लिए दूर भाग जाएंगे।
क्या आपके साथ कभी ऐसा कुछ हुआ है? नीचे कमेंट में ज़रूर बताइए। और अगर आप भी होटल इंडस्ट्री में हैं, तो आगे से ज़रा संभलकर और दिल से मेहमाननवाज़ी कीजिए—क्योंकि बदनाम होने में देर नहीं लगती!
मूल रेडिट पोस्ट: World's Worst Hotel award goes to...