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जब होटल के दाम सुनकर मेहमान की हालत पतली हो गई: महंगाई का तगड़ा झटका

होटल दरों में वृद्धि पर चौंके हुए मेहमान की प्रतिक्रिया, आतिथ्य उद्योग में बढ़ती लागत को दर्शाती है।
एक मेहमान के चौंकने वाले चेहरे की यथार्थवादी छवि, नई रात्री दर सुनकर उनकी हैरानी को दर्शाती है। यह पल आज की अर्थव्यवस्था में यात्रा करने वाले कई लोगों की आश्चर्य को बयां करता है।

एक कहावत है—"जो बदलता है वही चलता है", लेकिन जब बदलाव जेब पर भारी पड़ जाए तो दिल बैठ ही जाता है। ऐसा ही कुछ हुआ अमेरिका के एक होटल में, जब एक साठ के पेटे के मेहमान ने कमरे का नया रेट सुना। जनाब का ऐसा चेहरा उतर गया, जैसे किसी ने चाय में नमक डाल दिया हो! अब सोचिए, होटल वाले ने कमरे की तीन रातों का रेट बताया, और सामने वाले साहब का तो मानो ब्लड प्रेशर ही डाउन हो गया।

महंगाई की मार: होटल वाले की मजबूरी

अब ज़रा होटल वाले की भी सुनिए। जैसे हमारे देश में प्याज़-टमाटर के दाम बढ़ते ही सब्ज़ीवाले को कोसा जाता है, वैसे ही वहाँ भी होटल वाले की शामत आई। मेहमान बोले, "पिछले साल तो 90 डॉलर रात का था, अब 126 कैसे?" होटल वाला बड़ी विनम्रता से बोला, "भैया, महंगाई और टैक्स की वजह से सबकुछ महंगा हो गया है।"

यह सुनते ही मेहमान ने टीवी चैनल OANN का हवाला देते हुए तर्क दिया, "अरे, न्यूज़ में तो बताया था कि कंपनियां खुद टैक्स का बोझ उठाएंगी, जनता की जेब पर असर नहीं पड़ेगा।" होटल वाला मन ही मन सोच रहा था—'काश! कंपनियां वैसे ही जनसेवक होतीं जैसी लाला की किराने की दुकान में उधारी देने वाली दादी!'

एक कमेंट में किसी ने बड़ा मज़ेदार तंज कसा—"लगता है साहब ने पिछले तीस सालों में खुद कभी सामान खरीदा ही नहीं, तभी तो महंगाई की असलियत नहीं पता!" सच में, हमारे यहाँ भी कई घरों में पिताजी सालों से खरीदारी की फिक्र से दूर रहते हैं, और जब दाम सुनते हैं, तो आँखें फटी की फटी रह जाती हैं।

'फेक न्यूज़' बनाम सच्चाई: किसकी माने मेहमान?

अब यहाँ मामला बहस का नहीं, समझ का है। होटल वाले ने समझाने की कोशिश की कि टॉयलेट पेपर से लेकर सफाई के सामान तक, सबकुछ महंगा हो गया है। टॉयलेट पेपर का एक पैकेट 6 डॉलर महंगा, हैंड टॉवल कम रोल में आ रहा, सफाई के सामान की कीमतें ऊपर, और मेंटेनेंस की लागत भी बढ़ गई।

लेकिन साहब का जवाब, "तुम तो फेक न्यूज़ का शिकार हो रहे हो!" अब भला बताइए, जब सामने वाला मानने को ही तैयार नहीं, तो गधे को घोड़ा कौन बना सकता है? एक कमेंट करने वाले ने बिल्कुल सही लिखा—"कुछ लोग तो आँखों के सामने भी सच देखना नहीं चाहते, चाहे दाम आसमान छू लें!"

कंपनियां क्या सच में घाटा उठाती हैं?

यहाँ एक और दिलचस्प बात आई—कई लोगों को लगता है कंपनियां महंगाई सहन कर लेंगी, ग्राहक को कोई असर नहीं होगा। एक यूज़र ने हँसते हुए लिखा, "क्या कंपनियां अपने मुनाफे पर पानी फेर देंगी? ये तो वैसे ही है जैसे कोई हलवाई दूध महंगा होने पर मिठाई सस्ती कर दे!"

असल में, चाहे होटल हो या हमारी लोकल दुकान, जब सामान महंगा होता है तो उसका बोझ ग्राहक पर ही आता है। जैसे हमारे मोहल्ले की मिठाई की दुकान में जब दूध महंगा होता है, तो गुलाब जामुन का दाम भी चढ़ जाता है। होटल भी अलग नहीं हैं—साफ-सफाई, बिजली, मरम्मत, सबकी लागत बढ़ी, तो रेट भी बढ़े।

एक और कमेंट में एक होटल वाले ने अपनी भड़ास निकाली—"अगर ग्राहक को रेट पसंद नहीं, तो दूसरी जगह जाकर देख ले, आखिर हर जेब के लिए होटल नहीं बना!" यही बात हमारे यहाँ भी लागू होती है—पाँच सितारा होटल में रुकोगे, तो चाय भी सोने के भाव मिलेगी!

हास्य, व्यंग्य और 'यूनिकॉर्न की सवारी'

कई लोगों ने इस पूरे घटनाक्रम का मज़ाक भी उड़ाया। एक महिला ने लिखा, "क्यों न मैं आपके कार्ड से पैसा काटकर बाकी रकम चॉकलेट और आइसक्रीम के बने अपने महल में उड़नखटोले से ले जाऊँ!" कोई पूछ बैठा—"आपके महल में ठहरने का क्या रेट है? टॉयलेट पेपर में डिस्काउंट मिलेगा क्या?"

यानी, जब ग्राहक अपनी ही दुनिया में गुम है, तो होटल वाले को भी थोड़ी मस्ती करने का हक़ है। आखिर, ऐसे ग्राहकों से बहस करने का कोई फायदा नहीं—जैसे हमारे यहाँ कहते हैं, 'भैंस के आगे बीन बजाने से कुछ नहीं होगा!'

निष्कर्ष: सच्चाई स्वीकारना भी एक कला है

कहानी का सार ये है कि बदलती दुनिया में दाम बढ़ना आम बात है, लेकिन कुछ लोग हकीकत से नज़रें चुराते हैं। आज के जमाने में 'फेक न्यूज़' का नाम लेकर असली महंगाई को झुठलाना कुछ लोगों की आदत बन गई है। होटल वाले हों या दुकानदार, मजबूरी में दाम बढ़ाने पड़ते हैं—ये कोई गुलाबी सपना नहीं, कड़वी हकीकत है।

अब आप बताइए, आपके जीवन में कभी ऐसा अजीब ग्राहक मिला है? या फिर कभी आपको दाम सुनकर झटका लगा? अपने अनुभव नीचे कमेंट में जरूर शेयर करें। और हाँ, अगली बार होटल जाएं तो याद रखें—महंगाई सिर्फ आपके घर में नहीं, हर जगह है!


मूल रेडिट पोस्ट: Guest freaked out when I told him the price.