जब होटल के जनरल मैनेजर को अपना ही होटल समझ बैठा – एक मजेदार किस्सा
अगर आपने कभी किसी होटल के रिसेप्शन पर काम किया है या वहाँ से कोई किस्सा सुना है, तो आपको पता होगा कि वहाँ रोज़ कुछ न कुछ मज़ेदार, चौंकाने वाला या सिर पकड़ लेने वाला वाकया होता ही है। हमारी आज की कहानी भी कुछ ऐसी ही है, जिसमें एक जनरल मैनेजर (GM) ने होटल के नियमों को अपनी जेब में रखकर, अपनी ही चलाने की कोशिश की। लेकिन, जैसा कि हमारे यहाँ कहते हैं – “अकड़ तो बकरी की भी नहीं चलती, इंसान की क्या बिसात!”
होटल का रिसेप्शन: नियमों का अखाड़ा
तो हुआ यूँ कि एक रात होटल की रिसेप्शन पर एक साहब बड़े रोब में घुसे और बोले, “मुझे चेक-इन करना है।” रिसेप्शनिस्ट (जो कि हमारे किस्से के हीरो हैं) ने बड़े ही प्रोफेशनल अंदाज में कंप्यूटर देखा – भाईसाहब का नाम कहीं नहीं मिला। अब साहब बोले, “मेरे जीएम ने फोन किया होगा, एम्प्लॉयी रेट की मंजूरी दे दी है।”
हमारे देश में भी अक्सर कोई ‘जान-पहचान’ या ‘ऊपर से आदेश’ चलाने की कोशिश करता है। यहाँ भी वही हुआ। रिसेप्शनिस्ट ने साफ जवाब दिया, “सर, एम्प्लॉयी रेट का नियम है – पहले से बुकिंग और पहचान जरूरी है। ऐसे ही बाईपास नहीं हो सकता।”
साहब झल्लाकर सोफे पर बैठ गए और अपने जीएम को फोन लगाया। दो मिनट में रिसेप्शन की घंटी बजी – दूसरी तरफ वही जीएम, जिनकी ‘खुशबू’ रिसेप्शनिस्ट पहले भी पहचान चुके थे। पुराने अनुभव से पता था कि ये जनाब ‘मैं ही मालिक, मैं ही भगवान’ टाइप हैं। जीएम ने आदेश के अंदाज में कहा, “मेरा स्टाफ है, एम्प्लॉयी रेट दो और जल्दी से कमरा दो।”
रिसेप्शनिस्ट ने फिर समझाया, “सर, बिना पोर्टल के, बिना वैरिफिकेशन के मैं ये नहीं कर सकता। डिस्काउंटेड रेट देना है तो नियमों के हिसाब से ही होगा।”
यह सुनते ही जनाब का पारा सातवें आसमान पर – “तुम नए हो क्या? मुझे नहीं पहचानते? मैं जीएम हूँ, जो कहूँ वो करो!”
‘मैं जीएम हूँ!’ – अकड़ और असली अधिकार की टकराहट
अब सोचिए, हमारे यहाँ जब कोई कहता है – “तुम्हें पता नहीं मैं कौन हूँ?” तो समझ जाइए, मामला गर्म है। जीएम साहब ने भी वही किया – चिल्लाना, अपशब्द कहना, और पुराने जीएम का नाम लेकर धमकी देना कि ‘उससे बात कर लो, तुम्हारी औकात बता देगा।’ लेकिन मसला ये था कि अब वो GM वहाँ रहे ही नहीं!
रिसेप्शनिस्ट का जवाब सुनकर जीएम ने गुस्से में फोन पटक दिया। जिस स्टाफ के लिए इतना बवाल हुआ था, वो बेचारा भी फोन पर गुस्से से सुनता रहा और फिर चुपचाप चला गया।
कमेंट्स में मज़ा – जनता का न्याय और अनुभवों की बारिश
रेडिट पर इस किस्से ने खूब धमाल मचाया। एक यूज़र ने लिखा, “एक बार मेरी कज़िन भी ऐसे ही एम्प्लॉयी रेट लेने आई थी, भाई GM था – मैंने भी साफ मना कर दिया, नियम तो नियम है!” और एक और कमेंट में मज़ेदार अंदाज में लोगों ने कहा, “अगर इतना ही हक था, तो खुद ऑनलाइन बुकिंग क्यों नहीं कर ली?”
कुछ अनुभवी लोगों ने सुझाव दिया – “ऐसे GM की शिकायत सीधे क्षेत्रीय डायरेक्टर या कंपनी के हेड ऑफिस तक करनी चाहिए। ये न सिर्फ फ्रॉड है, बल्कि पूरी छूट की स्कीम खतरे में डाल सकता है।” एक कमेंट में तो ये तक कहा गया, “ऐसे लोगों के लिए तो रूम का रेट डबल कर देना चाहिए!”
हमारे देश में भी अक्सर देखा जाता है कि कोई अधिकारी या बड़े साहब अपने परिचितों के लिए नियम तोड़ने को कह देते हैं। लेकिन जैसा कि एक पाठक ने लिखा, “नियम सबके लिए बराबर हैं। चाहे आप GM हों या चपरासी, सिस्टम फॉलो करना ही पड़ेगा।”
होटल इंडस्ट्री: ‘क्लाइंट इज़ किंग’ या ‘नियम सर्वोपरि’?
अब बड़ा सवाल – क्या कभी-कभी नियमों को तोड़ देना चाहिए, सिर्फ इसलिए कि सामने वाला ऊँचे पद पर है? होटल इंडस्ट्री में अक्सर दबाव रहता है कि “मेहमान भगवान होता है,” लेकिन अगर हर GM अपने स्टाफ के लिए मनमर्जी करे तो बाकी स्टाफ की इज्जत और मेहनत का क्या?
एक अनुभवी व्यक्ति ने लिखा, “मैं खुद कई साल GM रहा हूँ। मैंने अपने स्टाफ को हमेशा कहा – अगर कोई दिक्कत हो तो पहले पेमेंट करो, बाद में शिकायत मुझसे करना। नियम तोड़ने की छूट किसी को नहीं।”
निष्कर्ष: अपनी रीढ़ सीधी रखो, नियमों के साथ खड़े रहो
इस कहानी से यही सीख मिलती है कि चाहे जितना भी दबाव, धमकी या जान-पहचान हो – अगर आप अपने प्रोफेशन और नियमों के साथ ईमानदारी से खड़े रहेंगे, तो देर-सवेर आपकी ही जीत होगी। लोगों का कहना था – “तुम्हारी जगह कोई नया या डरपोक होता तो शायद झुक जाता, लेकिन तुमने सही किया!”
आपका क्या ख्याल है? क्या कभी आपको भी किसी ऑफिस, बैंक या होटल में ऐसे ‘रौबदार’ लोगों से दो-चार होना पड़ा है? कमेंट में जरूर बताइएगा, और अगर आपके पास भी कोई ऐसा मजेदार किस्सा है, तो हमारे साथ जरूर शेयर कीजिए!
अंत में, जैसे हमारे गाँव में कहा जाता है – “सीधा रास्ता सबसे लंबा सही, पर सबसे सुरक्षित भी!”
नियमों के साथ चलिए, और अपने अधिकारों को कभी मत छोड़िए!
मूल रेडिट पोस्ट: Entitled GM Forgets This Isn't His Hotel