जब हाई स्कूल के छात्रों को ट्रक वाले ने मजेदार सबक सिखाया
हमारे यहाँ हर मोहल्ले, स्कूल, या चौराहे पर ऐसी कोई न कोई शरारत होती ही रहती है, जिससे बड़े भी कभी न कभी दो-चार हुए होंगे। लेकिन आज की ये कहानी तो कुछ अलग ही है – इसमें है एक चालाक ड्राइवर, स्कूल के शरारती लड़के, और एक ऐसा पल, जिसे देखकर सबकी हँसी छूट गई। तो चलिए, आपको सुनाते हैं Reddit की इस वायरल पोस्ट की पूरी कहानी, जिसमें एक ट्रक ड्राइवर ने छात्रों को उनकी हरकत का ऐसा मजेदार जवाब दिया कि फिर किसी की हिम्मत नहीं हुई दोबारा ये करने की।
शरारती छात्रों की 'बम्पर राइड' और ड्राइवर की चालाकी
बात है 2000 के दशक की, जब टेक्नोलॉजी हमारे यहाँ इतनी आम नहीं थी। एक बड़े ट्रांसपोर्टेशन कंपनी के लिए काम करने वाले ड्राइवर साहब अपने 'बॉक्सी स्टेपवैन' ट्रक से डिलीवरी करने स्कूल जा रहे थे। अब इन ट्रकों के पीछे चौड़ा बम्पर होता है, जिस पर खड़े होकर लोग अंदर-बाहर जाते हैं। हमारे यहाँ भी तो कभी-कभी बच्चे बस के पीछे लटकने का शौक पाल लेते हैं – वैसे ही वहाँ के स्कूल के कुछ लड़कों ने भी सोचा, 'मौका है, मज़े ले लो!'
ड्राइवर के ट्रक में नई-नई 'बैकअप कैमरा' लगी थी, जो उस ज़माने में बहुत कम देखने को मिलती थी। ड्राइवर ने समझदारी दिखाई और कैमरा ऑन कर लिया। तभी क्या देखता है – एक छात्र ट्रक के पीछे दौड़ता हुआ आ रहा है, इरादा है बम्पर पर चढ़कर 'फ्री की सवारी' करने का! ये न सिर्फ़ खतरनाक था, बल्कि ड्राइवर के लिए भी बड़ी मुश्किल पैदा कर सकता था।
'फेसप्लांट' का वो ऐतिहासिक पल
जैसे ही वह लड़का ट्रक के बम्पर पर चढ़ने को हुआ, हमारे ड्राइवर साहब ने झट से ब्रेक मार दिए। नतीजा? लड़का सीधा दरवाजे से टकराया और ज़ोरदार 'फेसप्लांट' हो गया! आस-पास खड़े सारे छात्र इस नज़ारे पर हँस-हँस के लोटपोट हो गए। अब बताइए, ऐसी शर्मिंदगी के बाद कौन दोबारा कोशिश करेगा? ड्राइवर की छोटी-सी सूझबूझ ने बिना कुछ कहे, सबको बढ़िया सबक सिखा दिया।
यहाँ तो हमारे देश में भी कई बार बस या ट्रक के पीछे लटकने वाले बच्चों को 'कंडक्टर अंकल' डाँट-फटकार लगा देते हैं, लेकिन ये तरीका तो सच में कमाल का था।
'बम्पर राइडिंग' – दुनिया भर में चलती है ये शरारत!
रेडिट पर इस पोस्ट पर कमेंट्स की बाढ़ आ गई। एक यूज़र ने बड़े मज़ेदार अंदाज़ में बताया, "बर्फ़बारी के दिनों में हम भी कार के बम्पर पकड़कर 'लैचिंग' करते थे। अब सोचता हूँ, कितनी बेवकूफी थी!" – जैसे हमारे यहाँ बारिश में बच्चे साइकिल के पीछे लटककर 'फ्री की सवारी' करते हैं।
एक अन्य यूज़र ने बताया कि उनके दोस्त ने भी यही किया था, लेकिन एक हादसे में उनके एक साथी की जान चली गई। तब जाकर सबको समझ आया कि ये 'मस्ती' कितनी खतरनाक हो सकती है।
कई देशों में इसे 'स्किचिंग', 'हूकीबॉबिंग', 'बम्पर हिचिंग' जैसे नामों से जाना जाता है। हमारे यहाँ भी गांव-कस्बों में कभी-कभी बच्चे ट्रैक्टर-ट्रॉली के पीछे ऐसे ही लटक जाते हैं।
एक कमेंट में एक सज्जन ने लिखा, "बचपन में ऐसी मूर्खता न की हो, तो जवानी अधूरी रह जाती है। लेकिन सीख वही है – जान है तो जहान है!" और सच में, आज के सोशल मीडिया के ज़माने में तो लोग अपनी बेवकूफी के वीडियो भी खुद ही अपलोड कर देते हैं – फिर पुलिस को सबूत देने की ज़रूरत ही नहीं रहती!
सीख – मस्ती अपनी जगह, जान की कीमत सबसे ऊपर
अक्सर किशोरावस्था में हम सब ऐसी-वैसी शरारतें कर लेते हैं, जिन्हें बाद में याद कर सर पकड़ लेते हैं। Reddit के OP ने भी कहा, "शुक्र है हमारे समय में मोबाइल कैमरा नहीं था, वरना हमारी सारी बेवकूफियां रिकॉर्ड हो जातीं!"
कई बार लगता है – 'अरे, ये सब तो चलता है!' लेकिन जरा सी गलती ज़िंदगी बदल सकती है। इस कहानी में ड्राइवर ने बिना गुस्से के, मज़ाकिया अंदाज में छात्रों को सबक सिखाया, जिससे न कोई बड़ा हादसा हुआ, न किसी को चोट लगी – बस एक 'फेसप्लांट' और सबक हमेशा के लिए।
निष्कर्ष – आपकी राय क्या है?
तो दोस्तों, आपको क्या लगता है – क्या हमारे स्कूलों में भी ऐसे क्रिएटिव तरीके से शरारती बच्चों को सबक सिखाया जाए? या फिर सख्ती ही एकमात्र रास्ता है? अपने बचपन की ऐसी किसी शरारत को याद आया हो, तो नीचे कमेंट में जरूर बताइए। हँसी-मज़ाक में सीख भी है – और यादें भी!
आखिर में, यही कहेंगे – मस्ती में सावधानी, और जिंदगी में समझदारी, तभी तो बात बनेगी!
आपकी क्या राय है? अपने अनुभव और विचार हमारे साथ ज़रूर साझा करें!
मूल रेडिट पोस्ट: I made sure the students did not do that again.