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जब सहकर्मी ने मेरी नौकरी और मेरे प्रेमी दोनों पर डाका डालने की कोशिश की!

एक फोटो यथार्थवादी छवि जिसमें एक गेम स्टोर में चुलबुले सहकर्मी पुरुष ग्राहकों के साथ बातचीत कर रहे हैं।
इस फोटो यथार्थवादी दृश्य में, एक व्यस्त गेम स्टोर में चुलबुले बातचीत के बीच तनाव बढ़ता है, जहां नाटकीयता और अविस्मरणीय कहानियों का जन्म होता है।

ऑफिस की राजनीति और सहकर्मियों के बीच की नोकझोंक की कहानियाँ तो आपने बहुत सुनी होंगी। लेकिन क्या हो जब कोई आपकी नौकरी के साथ-साथ आपके दिल के राजा पर भी कब्जा जमाने की कोशिश करे? आज की कहानी कुछ ऐसी ही है—जहाँ एक महिला ने अपनी चालाकी और जुगाड़ से अपने प्रेमी और नौकरी दोनों को बचा लिया, और साथ में ‘छोटी-मोटी बदला’ (petty revenge) का ऐसा स्वाद चखाया कि पढ़कर आपके चेहरे पर भी मुस्कान आ जाएगी!

ऑफिस में जलन: जब सहकर्मी ने की हदें पार

हर भारतीय ऑफिस में एक न एक ‘चुगलीबाज’ या ‘फिल्मी विलेन’ टाइप सहकर्मी जरूर मिल जाता है। हमारी कहानी की नायिका भी एक गेम स्टोर में सात साल से ज्यादा काम कर रही थी। तभी एक नई सहकर्मी का ट्रांसफर हुआ—जो हर मर्द ग्राहक पर ऐसे डोरे डालती थी जैसे फिल्मी हीरोइन किसी गाने में डालती है! बात यहीं तक रहती तो ठीक था, लेकिन मुसीबत तब बढ़ गई जब नायिका का प्रेमी, जो अब उनके मंगेतर हैं, उन्हें डिनर देने आया।

सहकर्मी ने उसे देखते ही ‘शिकार’ समझ लिया—और सामने ही फ्लर्ट करने लगी! नायिका ने साफ़ कह दिया कि ये उनके लिए आया है, लेकिन सहकर्मी कहाँ मानने वाली थी? हद तो तब हो गई जब प्रेमी ने गुस्से में उसे 'मार्शमैलो नेक' बोल दिया। अब ये कोई आम गाली नहीं थी—कुछ लोगों का मानना है कि ये मोटापे को लेकर बोला गया, जैसे हमारे यहाँ 'गोलू-मोलू' या 'मिठाई का डिब्बा' कह दिया जाए!

बदला लेने की छोटी-मोटी तरकीबें: दिमाग से दिल तक

अब बात आई बदला लेने की। हमारी नायिका ने सीधे-सपाट बदला तो नहीं लिया, बल्कि हिंदुस्तानी टीवी सीरियल्स की तरह धीरे-धीरे जलाने वाली चालें चलीं।

एक दिन मैनेजर ने बताया कि एक स्पेशल बॉक्स में फ्री सामान आया है, जिसमें से कुछ कोई भी ले सकता है। सहकर्मी ने सबसे बढ़-चढ़कर दावा किया, लेकिन नायिका ने चुपचाप वो चीज़ खुद रख ली—ना उसे चाहिए थी, ना उसने बताया कि कहाँ गई! यही नहीं, सहकर्मी जो स्नैक्स ऑफिस के शेल्फ पर रखती थी, उन्हें रात को नीचे छोड़ देतीं ताकि चूहे आकर उन्हें खा जाएँ। सुबह वही स्नैक्स वापस रख देतीं और मासूमियत से कहतीं—“चूहे कूद भी लेते हैं, क्या पता?”

यहाँ कमेंट्स में भी मजेदार बहस छिड़ी—एक यूज़र ने लिखा, “चूहे तो दीवार पर भी चढ़ सकते हैं, मैंने खुद देखा है!” तो किसी ने मजाक में कह दिया, “चूहे उड़ने भी लगे क्या!” यानी, ऑफिस की चुहलबाज़ी हर जगह एक जैसी है।

सहकर्मी की चालें और नायिका की स्मार्टनेस

सिर्फ इतना ही नहीं, नायिका ने अपनी सहकर्मी के कई बॉयफ्रेंड्स के सामने एक-दूसरे का जिक्र कर दिया। सोचिए, अगर आपकी सहेली के तीन-तीन ‘रिश्तेदार’ ऑफिस में आ रहे हों, और सबको पता चल जाए कि ‘आप अकेले नहीं हैं’—क्या हाल होगा!

एक बार तो नायिका ने ऑफिस की पार्टी में पिज्जा गिरा दिया, उसे वापस डिब्बे में डालकर उल्टा करके ऐसे पेश किया जैसे डिलीवरी वाले की गलती हो। सहकर्मी और मैनेजर दोनों ने मज़े से खा भी लिया! कमेंट्स में एक पाठक ने तो यहाँ तक बोल दिया—“भई, आपने तो सही में बदला लिया, मज़ा आ गया!”

आखिरकार जीत किसकी हुई?

समय के साथ नायिका और उसके प्रेमी की जोड़ी मजबूत होती गई, वहीं सहकर्मी और मैनेजर दोनों को दूसरी ब्रांच भेज दिया गया और अंततः नौकरी भी चली गई। एक पाठक ने लिखा—“किस्मत भी उन्हीं का साथ देती है, जो सही हैं।” खुद नायिका ने बताया कि उनके प्रयासों का भी इसमें थोड़ा हाथ था!

यह कहानी हमें सिखाती है कि ऑफिस में जलन, चुगली या बदले की भावना हर जगह है—चाहे भारत हो या विदेश। लेकिन जब इंसान अपनी इज्जत और रिश्तों की रक्षा के लिए थोड़ा दिमाग और ह्यूमर इस्तेमाल करता है, तो बड़ी मुश्किलें भी आसान हो जाती हैं।

क्या आपने भी ऐसे बदले लिए हैं?

दोस्तों, क्या कभी आपके ऑफिस या कॉलेज में किसी ने आपके दोस्त, रिश्तेदार या बॉयफ्रेंड-गर्लफ्रेंड पर डोरे डाले हों? या आपने भी किसी को मजेदार और मासूम सा बदला चखाया हो? नीचे कमेंट में जरूर बताइए! ऐसी किस्से-कहानियाँ सिर्फ पढ़ने में ही नहीं, सुनाने में भी मजा आता है।

और हाँ, अगली बार अगर कोई आपके हिस्से की मिठाई या दिल पर डाका डाले, तो थोड़ा ‘पेटी रिवेंज’ का तड़का लगाना न भूलें—क्योंकि थोड़ा सा बदला, कभी-कभी बड़ा सुकून दे जाता है!


मूल रेडिट पोस्ट: Try to take my man and get me fired will you?