जब 'स्पर्म डोनर' बाप ने 20 साल बाद बेटे से रिश्ता जोड़ने की कोशिश की!
अगर आप सोचते हैं कि सिर्फ बॉलीवुड की फिल्मों में ही बिछड़े हुए बाप-बेटे की कहानियां होती हैं, तो जनाब ज़रा रुकिए! आज की हमारी कहानी बिल्कुल देसी मसालेदार है, लेकिन इसकी शूटिंग अमेरिका के डकोटा में हुई थी। असली मज़ा तो तब आया, जब 20 साल बाद अचानक 'स्पर्म डोनर' बाप को बेटे की याद आई, वो भी तब जब बेटा अपनी लोकल रैपिंग से थोड़ा-बहुत नाम कमा चुका था।
यकीन मानिए, इस कहानी को पढ़कर आपके चेहरे पर मुस्कान आ ही जाएगी – और थोड़ी-सी 'पेटी रिवेंज' (छोटी-मोटी बदले की भावना) अपने आप अंदर जागेगी!
20 साल बाद अचानक रिश्ते की याद – ये कैसा बाप है भाई?
कहानी की शुरुआत होती है डकोटा से, जहां एक महिला ने बेटे को जन्म दिया। लेकिन बेटा पैदा होते ही उसके बायोलॉजिकल पिता ने ऐसा 'गायब' होने का टैलेंट दिखाया, जैसे हमारे गांव की दादी के पैसे मांगने पर चाचा चुपचाप छत पर चले जाते हैं! माँ और बेटा जैसे-तैसे वहां से निकलकर अपने परिवार के पास आ गए। माँ ने नई शुरुआत की, बेटे की परवरिश की ज़िम्मेदारी उठाई। बाद में, हमारे नायक को एक ऐसे शख्स ने गोद लिया, जिन्होंने उसे अपने खून से भी बढ़कर प्यार दिया – वो असली पिता बन गए।
अब कट टू 20 साल बाद: बेटा अब 20 साल का है, लोकल रैपिंग में नाम कमा रहा है, खुद के पैरों पर खड़ा है, माँ और गोद लिए पिता से शानदार रिश्ता है। लेकिन तभी... पुराने 'स्पर्म डोनर' पापा को पता चलता है कि बेटा फेमस हो रहा है! बस, उसी वक्त उनके अंदर छुपा 'पिता' जाग जाता है!
सोशल मीडिया पर बाप की नौटंकी और बेटे का मास्टरस्ट्रोक
भाई साहब, आधुनिक ज़माने में बिछड़े हुए रिश्ते फेसबुक और इंस्टाग्राम से ही जुड़ने की कोशिश करते हैं। बायोलॉजिकल पिता ने छुप-छुपकर बेटे की पोस्ट लाइक करनी शुरू की, उसकी पुरानी तस्वीरें पोस्ट करने लगे – जैसे कोई पुराना पड़ोसी अचानक याद दिला दे, "अरे बेटा, मैं भी था तुम्हारे बचपन में!"
इतना ही नहीं, जनाब ने बेटे को मैसेज किया – "तुम मेरे बेटे हो, मैंने तुम्हें बनाया है!" यहाँ तक तो ठीक, लेकिन हद तो तब हो गई जब उन्होंने बेटे की माँ पर ही उल्टा आरोप लगा दिया कि वो औरों के साथ थी, जबकि असलियत में वो खुद इधर-उधर मटरगश्ती कर रहे थे। भाई, इस किस्से में तो भाईजान के 20 और भाई-बहन भी अलग-अलग राज्यों में हैं – मतलब जनाब सुपरहिट 'स्पर्म डोनर' निकले!
अब बेटा और उसका कज़िन (कहानी सुनाने वाला) मिलकर इस पूरी नौटंकी पर हँसी रोक नहीं पाए। दोनों ने मिलकर अपने असली पापा (गोद लिए) की तारीफों के पुल बांध दिए और बायोलॉजिकल बाप को खुलेआम 'स्पर्म डोनर' और 'चलती-फिरती वीर्य बैंक' कहकर मज़े लेने लगे।
इंटरनेट की जनता का रिएक्शन – “पैसे और शोहरत की खुशबू आई, तो रिश्तेदार जाग गए!”
रेडिट पर इस कहानी की पूरी महफिल जमी। एक कमेंट करने वाले भाईसाहब ने लिखा, "जैसे ही किसी के पास पैसा या थोड़ी सी शोहरत आती है, रिश्तेदारों को पुराने रिश्ते याद आ जाते हैं।" क्या खूब कहा!
दूसरे ने जोड़ा, "जहाँ क्लाउट (नाम) या कैश (पैसा) दिखा, अचानक परिवार याद आ गया!" ये बात तो हमारे यहाँ भी कितनी सच्ची है – जैसे ही कोई विदेश से लौटे, रिश्तेदारों की लाइन लग जाती है, “अरे, मेरा भी तो बेटा है!”
बहुत से लोगों ने कहा कि जो इंसान अपने बच्चे को छोड़कर चला जाए, वो लौटकर प्यार की उम्मीद कैसे कर सकता है? एक यूज़र ने तो यहां तक लिखा, "ऐसे लोगों को मुँह नहीं लगाना चाहिए, क्योंकि ये सिर्फ अपने मतलब के लिए आते हैं।"
किसी ने तो सलाह दे डाली, "भैया, 15 साल का चाइल्ड सपोर्ट मांग लो!" पर फिर किसी और ने समझाया, "अगर गोद लिया गया है तो कानूनन ये संभव नहीं।"
कुछ लोगों ने माफी और हमदर्दी की बात की, लेकिन बाकी सब बोले, "माफ करने की ज़रूरत नहीं, ऐसे लोगों को भुला दो, और अपनी ज़िंदगी में आगे बढ़ो।"
बेटे का जवाब – “स्पर्म डोनर जी, 20 साल पुराना दूध आप ही रख लीजिए!”
अब ज़रा सोचिए, जब बेटे ने अपने सोशल मीडिया पर पूरे मामले की पोल खोल दी: बायोलॉजिकल बाप के मैसेज के स्क्रीनशॉट, ऊपर से बैकग्राउंड में बज रहा था – “I Don’t Fuck with You” (Big Sean)। यानी, “भैया, अब आपकी कोई ज़रूरत नहीं!”
सारे दोस्त और फॉलोवर्स हँसी से लोटपोट हो गए। बेटा लिखता है – "स्पर्म डोनर जी, आप 20 साल पहले जो दूध लेने गए थे, वही रख लीजिए, अब आपकी कोई ज़रूरत नहीं। असली पिता तो वो हैं जिन्होंने मुझे पाला है।"
भाई, ये तो वही बात हो गई – "जिस थाली में खाया, उसी में छेद किया," लेकिन बेटे ने अपनी थाली चमका दी और पुरानी कटोरी वापिस लौटा दी!
रिश्ते खून से नहीं, कर्म से बनते हैं
इस किस्से से यही सिखने को मिलता है कि असली बाप वही है, जो आपको पाले, आपके साथ खड़ा रहे, चाहे खून का रिश्ता हो या नहीं। 'स्पर्म डोनर' बनने से कोई बाप नहीं बन जाता, जैसे क्रिकेट में सिर्फ जर्सी पहन लेने से कोई विराट कोहली नहीं बन जाता!
अगर आपके जीवन में भी कोई ऐसा रिश्तेदार है, जो सिर्फ आपके नाम या कामयाबी के वक्त ही याद करता है, तो समझ लीजिए – असली परिवार वो है, जो आपके दुख-सुख में साथ खड़ा हो, न कि सिर्फ सेल्फी लेने आए!
निष्कर्ष: आपके विचार क्या हैं?
क्या आपको भी ऐसे 'स्पर्म डोनर' रिश्तेदारों का सामना करना पड़ा है? या आपके परिवार में कोई है, जिसने बिना खून के रिश्ते के भी आपको बाप से बढ़कर प्यार दिया? कमेंट में अपनी कहानी ज़रूर साझा करें – और हाँ, अगर आपको ये किस्सा पसंद आया हो, तो दोस्तों के साथ शेयर करना न भूलें।
रिश्ते दिल से बनते हैं, डीएनए से नहीं।
आपका क्या ख्याल है?
मूल रेडिट पोस्ट: My cousin's bio dad wants to 'connect' with him after over 20 years.