जब शोर मचाने वालों को मिला उन्हीं की दवा: होटल की एक मज़ेदार कहानी
कभी-कभी ज़िंदगी हमें ऐसी परिस्थितियों में डाल देती है, जहां गुस्सा तो आता है, लेकिन सीधे टक्कर लेना नुकसानदायक भी हो सकता है। ऐसे में, थोड़ा-सा “पेटी रिवेंज” यानी छोटी-सी बदला लेने की कला बहुत काम आती है। आज की कहानी कुछ ऐसी ही है – एक परिवार का होटल में नींद खराब करने वालों को सबक सिखाने का किस्सा, जो Reddit पर खूब चर्चा में रहा।
होटल का वह कड़वा अनुभव
सोचिए, आपके परिवार में कोई दुखद घटना हो गई हो, आप थके-हारे सफर करके होटल पहुंचे हों और बस चुपचाप सो जाना चाहते हों। लेकिन आपकी किस्मत में चैन कहाँ! Reddit यूज़र rickerwill6104 के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। उनकी दादी के निधन के बाद, भाई-बहन और बच्चों संग होटल पहुंचे। दो कमरे लिए गए, लेकिन दोनों के बीच में एक तीसरा कमरा था – और यहीं से शुरू हुआ असली बवाल!
रात को जैसे ही सब सोने गए, बीच वाले कमरे में कुछ युवा पार्टीबाज़ घुस आए। तेज़ म्यूजिक, ऊंची आवाज़ में बातें, हंसी-मज़ाक – पूरे फ्लोर पर गूंजने लगा। हॉस्टल या कॉलेज की याद ताज़ा हो गई होगी, लेकिन भाईसाहब, होटल में तो सब अपने आराम के लिए आते हैं!
होटल स्टाफ और पुलिस भी फेल!
ऐसी हालत में ज्यादातर भारतीय क्या करते? पहले रिसेप्शन पर शिकायत, फिर मैनेजर को बुलाओ, और अगर फिर भी बात न बने तो “बड़े साहब को फोन लगाओ!” यही सोचकर दोनों भाइयों ने रिसेप्शन पर फोन किया। स्टाफ आया, बच्चों को समझाया – लेकिन यह असर सिर्फ़ 10 मिनट चला। फिर पुलिस बुलानी पड़ी। मगर पार्टीबाज़ों का जोश फिर भी ठंडा नहीं हुआ।
Reddit पर एक कमेंट में कोई लिखता है – “ऐसा लगता है जैसे होटल में शोरगुल वाली रात हर किसी की ज़िंदगी का हिस्सा है। यह तो रिवायत बन गई है!” भारत में भी शादी-ब्याह या ग्रुप ट्रिप्स में ऐसे वाकये आम हैं, जब किसी को रातभर नींद नहीं आती।
बदले की बारी: जब शोर का जवाब शोर से मिला
अब असली मज़ा तो तब आया जब सुबह का बदला लिया गया। दोनों भाई-बहन ने होटल स्टाफ से शिकायत कर ५०% डिस्काउंट तो पा लिया, लेकिन पेट की आग ठंडी नहीं हुई। जाते-जाते भाई ने टीवी की आवाज़ तेज़ कर, टीवी को पार्टी वाले कमरे की तरफ घुमा दिया। बहन ने अलार्म घड़ी का रेडियो भी फुल वॉल्यूम पर कर दिया। सुबह होते ही पार्टीबाज़ों की नींद में खलल पड़ गई। दरवाज़ा खोलकर एक बच्चा गुस्से में बाहर आया, लेकिन भाई-बहन ने भी हमारे देसी अंदाज में कंधे उचकाकर कह दिया – “भैया, अब तो यही चलेगा!”
एक कमेंट में मज़ेदार अंदाज में लिखा गया – “सुबह-सुबह सिर दर्द के साथ न्यूज़ और गानों का मज़ा भी ले लिया होगा!” भारतीय घरों में भी अक्सर देखा है – जब पड़ोसी देर रात तक म्यूजिक बजाते हैं, तो कोई सुबह सुबह भजन या तेज़ घड़ी का अलार्म बजाकर बदला ले लेता है।
कम्युनिटी की राय: सबका दर्द, सबका मज़ाक!
Reddit कम्युनिटी में इस पोस्ट पर खूब मज़ेदार और relatable कमेंट्स आए। एक यूज़र ने लिखा, “ऐसा लगता है जैसे होटल में शोरगुल वाली रात हर किसी का baptism है!” यानी सबको एक बार तो झेलना ही पड़ता है।
दूसरे ने अपने अनुभव शेयर किए – “मेरे ऊपर वाले कमरे में कोई ‘एडजस्टमेंट’ कर रहा था, नीचे वाली दीवार पर भी जोरदार शोर था। मैंने तो टॉयलेट पेपर की रोल छत पर फेंककर शोर बंद कराया!” सोचिए, भारत में अगर कोई चप्पल या झाड़ू से छत पीटता दिख जाए, तो पड़ोसी भी समझ जाते हैं – “अब बस करो!”
एक कमेंट में सलाह दी गई, “होटल वालों से अगर ‘Manager on Duty’ मांग लो, तो स्टाफ फौरन हरकत में आ जाता है। साथ ही, रिव्यू वेबसाइट्स पर नाम डालने की बात करो, तो सबकी क्लास लग जाती है!” यह टिप भारतीय होटल्स में भी खूब काम आती है – ‘TripAdvisor’ या ‘Goibibo’ की धमकी से स्टाफ की नींद उड़ जाती है।
और हाँ, एक यूज़र ने सुझाव दिया – “अगली बार गॉस्पेल चैनल या बच्चों के शिष्टाचार वाले कार्टून फुल वॉल्यूम पर चला दो, ताकि शोर करने वालों को अच्छे संस्कार भी मिल जाएं!” देसी तड़का लगाना हो तो भजन या पुराने गाने भी खूब असरकारक हैं।
निष्कर्ष: कभी-कभी मीठा बदला ही सही जवाब है
अंत में यही कहना है – कभी-कभी सीधी लड़ाई की जगह हल्की-फुल्की शरारतें ज़्यादा असरदार होती हैं। होटल, हॉस्टल या अपने मोहल्ले में – शोरगुल करने वालों को उन्हीं की भाषा में जवाब देना कभी-कभी मुनासिब है। लेकिन ध्यान रहे, मर्यादा न लांघें – थोड़ा सा मज़ाक, थोड़ी मस्ती और बाकी सब हंसी में टाल दें।
क्या आपके साथ भी कभी ऐसा होटल या हॉस्टल का अनुभव हुआ है? क्या आपने भी कभी पड़ोसी या किसी मेहमान को ऐसे ही मज़ेदार तरीके से सबक सिखाया है? अपने अनुभव हमें कमेंट में ज़रूर बताएं!
इस किस्से से एक बात तो तय है – बदला मीठा हो, तो कहानी और भी मज़ेदार बन जाती है!
मूल रेडिट पोस्ट: Party animals go a dose of their own medicine