जब शराबी मेहमान होटल के बेसमेंट में पहुँचा: एक रात की जंगली दास्तान
होटल में काम करना कभी-कभी ऐसे अनुभव दे जाता है जो ज़िंदगी भर याद रहते हैं। मेहमानों के नखरे, उनकी फरमाइशें और कभी-कभी ऐसी हरकतें कि दिमाग चकरा जाए! आज मैं आपको सुनाने जा रहा हूँ एक ऐसी ही रात की कहानी, जब एक शराबी मेहमान ने होटल की शांति का कबाड़ा कर दिया और सबको सोचने पर मजबूर कर दिया – "आखिर ये हो क्या रहा है?"
बेसमेंट की ओर बढ़ते क़दम: वो रात, वो मेहमान
ये किस्सा एक ऐसे होटल का है, जहाँ एक बढ़िया स्टेकहाउस और बार भी है। हमारी तरह ही भारत में भी कई होटल ऐसे होते हैं जहाँ खाने-पीने की बढ़िया जगहें होती हैं, लेकिन वहाँ के मेहमानों की कहानियाँ कुछ अलग ही होती हैं। उस रात एक आदमी आया – हालत बुरी तरह नशे में थी। आते ही बोला, "मुझे एक कमरा चाहिए और साथ में स्टेक पैक कर दो।" अब भला कौन होटलवाला ऐसे ग्राहक को मना करेगा, खासकर जब वो पैसे भी चुका दे!
स्टेक तैयार हुआ, तो सवाल उठा – उसे चाकू दिया जाए या नहीं? भारत में तो अक्सर होटल वाले, खासकर जब ग्राहक नशे में हो, तेज़ चीज़ देने से बचते हैं। यहाँ भी बार के बारटेन्डर ने साफ़ मना कर दिया, "भैया, उसे चाकू मत देना!" तो साहब ने स्टेक को ऐसे खाया जैसे समोसा या सैंडविच हो!
"कारिबू और ईल" की तलाश: मेहमान की अनोखी फरमाइशें
अब ये जनाब बार में बार-बार जा रहे थे – कभी "कारिबू" मांगते, कभी "ईल"। यहाँ कई पाठकों ने मज़ाक में कहा कि शायद वो "करिबियन" या "कारिबू लू" जैसी कोई ड्रिंक मांग रहे होंगे, या फिर कोई विदेशी शराब का नाम ले रहे होंगे। वैसे, एक टिप्पणीकार ने बताया कि "कारिबू" एक क्यूबेक की शराब है, जो लाल वाइन, स्पिरिट और मेपल सिरप से बनती है – कुछ-कुछ हमारे यहां के ठंड के मौसम में बनने वाले खास पेयों जैसा। "ईल" के बारे में सब कंफ्यूज़ थे – किसी ने मज़ाक में कहा, शायद वो बर्फ (ice) को "ईल" बोल रहा हो!
ऐसी फरमाइशें सुनकर होटल स्टाफ भी सोच में पड़ गया – भाई, इस आदमी को आखिर चाहिए क्या? एक पाठक ने तो यहाँ तक लिख दिया, "शराबी मेहमान हमेशा एडवेंचर ले आते हैं।"
मेहमान के कारनामे: कभी डॉक्टर की तलाश, कभी नरसिंगपुर की गलियों में
शाम भर वो आदमी कभी बार में, कभी बाहर, कभी लौटकर पूछता, "मैं किस कमरे में हूँ?", "क्या आप मेरे डॉक्टर हैं?" जैसे हमारे यहाँ कोई नशे में धुत होकर पूछता है, "भैया, मेरा मोबाइल कहां है?" या "मैं घर कैसे जाऊँ?"। एक बार तो वो बगल के बार में गया, लेकिन वहाँ से भी शौचालय की इजाज़त नहीं मिली। होटल वाले ने याद दिलाया, "आपके कमरे में वॉशरूम है," लेकिन साहब बार-बार बाहर जाने की जिद्द पकड़ लेते।
कई पाठकों ने लिखा, "इतना पेशेंस कहाँ से लाते हो!" – सच कहें तो भारतीय होटल स्टाफ भी कभी-कभी ऐसे ही धैर्य का परिचय देता है, जब कोई मेहमान रात को तीन बजे समोसा या चाय की जिद पकड़ लेता है।
क्लाइमेक्स: बेसमेंट में शिकार के सींग और 'वेलकम टू हेल' की गूंज
रात के आखिरी हिस्से में माहौल और सनकी हो गया। मेहमान बेसमेंट में जा घुसा, जहाँ कई कीमती चीज़ें रखी थीं। अचानक ऊपर आया – दोनों हाथों में विशाल हिरण के सींग लिए, और जोर से बोला, "वेलकम टू हेल, मदरफकर्स!" (जिसे एक पाठक ने बताया, ये वाक्य एक हॉरर फिल्म का फेमस डायलॉग है)। अब ये सुनकर तो स्टाफ के होश उड़ गए। स्टाफ ने पूछा, "ये तुम्हारे हैं?" तो साहब ने हड़बड़ाकर सींग नीचे गिरा दिए और फिर वही सवाल, "तुम मेरे डॉक्टर हो न? मदद करोगे न?"
यहाँ एक पाठक ने बड़ी मज़ेदार बात लिखी, "कभी-कभी तो लगता है, असली शैतान तो ये ग्राहक ही होते हैं!"
इसी मोड़ पर होटल वालों ने आखिरकार पुलिस को बुला लिया। कई लोगों ने कहा, "भैया, पुलिस को तो बहुत पहले बुला लेना चाहिए था!"
होटल की रातें: कभी-कभी ये फिल्मी सीन से कम नहीं!
इस पूरी कहानी से एक बात तो साफ है – होटल इंडस्ट्री सिर्फ सेवा नहीं, धैर्य, समझदारी और कभी-कभी हंसी-ठिठोली की भी परीक्षा है। भारत में भी ऐसे किस्से आम हैं – कभी कोई बाराती स्टेज पर चढ़ जाता है, तो कभी कोई मेहमान शादी के खाने में रसगुल्ला ढूंढते हुए किचन तक घुस जाता है!
यहाँ एक पाठक ने बढ़िया टिप्पणी की, "हर कोई अलग होता है, लेकिन कुछ लोग तो वाकई 'सबसे अलग' होते हैं।" और यही तो है होटल की असली खूबसूरती – हर दिन एक नई कहानी!
निष्कर्ष: आपकी भी कोई ऐसी कहानी है?
तो मित्रों, आज की ये अजीबो-गरीब, हंसी-मजाक और थोड़ी डरावनी कहानी आपको कैसी लगी? क्या आपके साथ भी कभी किसी होटल, शादी या पार्टी में ऐसा कोई 'गेस्ट' आया हो, जिसने सभी को हैरान कर दिया हो? कमेंट में जरूर बताएं, और अगर पसंद आए तो दोस्तों के साथ शेयर करें – क्योंकि होटल की कहानियां सबको पसंद आती हैं, चाहे वो भारत हो या विदेश!
मूल रेडिट पोस्ट: A drunk/high guest found his way into our basement last night.