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जब 'शाइनी रॉक' मेम्बर ने होटल स्टाफ को अदालत में घसीटने की दी धमकी

चमकदार पत्थर की कार्टून-शैली 3डी चित्रण, चार्जिंग ब्लॉक और चार्जेज के बारे में स्टाफ सदस्य से बात करता हुआ।
इस जीवंत कार्टून-3डी दृश्य में, हमारा चमकदार पत्थर सदस्य उधार लिए गए चार्जिंग ब्लॉक को लौटाते समय अप्रत्याशित चार्जेज पर हैरानी जताता है। इस अनोखे मुठभेड़ में डूबिए, जो एक मुकदमे की धमकी में बदल जाती है!

कहते हैं, होटल की रिसेप्शन डेस्क पर हर दिन एक नई कहानी बनती है। जो लोग सोचते हैं कि होटल स्टाफ का काम बस चेक-इन और चेकआउट करना है, उन्हें शायद अंदाज़ा नहीं कि असली ‘मनोरंजन’ तो काउंटर के इस पार होता है! आज मैं आपको सुनाने जा रहा हूँ एक ऐसे मेहमान की कहानी, जिनकी चमक-दमक और रौब के आगे बॉलीवुड के विलेन भी शर्मा जाएं।

'शाइनी रॉक' मेम्बर – नाम बड़ा, दर्शन छोटे

सुबह-सुबह होटल में ‘शाइनी रॉक’ मेम्बर का आगमन हुआ। अब ये ‘शाइनी रॉक’ कोई असली पत्थर नहीं, बल्कि होटल चेन के सबसे ऊँचे स्तर के मेम्बर के लिए अंग्रेज़ी में मज़े-मज़े में कहा गया नाम है। जैसे हमारे यहाँ कुछ लोग अपनी सोसाइटी में खुद को 'VIP' समझ लेते हैं, वैसे ही ये जनाब भी अपने रुतबे पर इतराते हुए आये।

पहले तो बड़े आराम से बिल का पूरा ब्योरा माँगा – होटल स्टाफ ने भी मुस्कराते हुए प्रिंटआउट थमाया। फिर बड़ी सफाई से वो चार्जिंग ब्लॉक भी लौटा दिया, जो कल स्टाफ ने उधार दिया था। लेकिन अगले ही पल, साहब ने जो कहा, उससे स्टाफ की आँखें फटी की फटी रह गईं – “मैं आप पर मुकदमा करूंगा!” अब भाई, यहाँ तो नमक-रोटी की नौकरी, और वहाँ कोर्ट-कचहरी की धमकी!

40 रुपये का पालतू शुल्क और 50 हज़ार की नौटंकी!

हुआ यूँ कि साहब अपने वाहन की परेशानी के कारण एक रात और रुक गए। आमतौर पर होटल वाले जब रुकने की अवधि बढ़ाते हैं, तो कभी-कभी रेट बढ़ा देते हैं – और यहाँ भी अगले दिन के हिसाब से 10 रुपये ज्यादा ले लिए। साहब का कहना – “मैं तो शाइनी रॉक हूँ, मुझसे ज्यादा क्यों लिया?” जवाब देने से पहले ही उन्होंने धमकी दे डाली – “मेरी बैंक मुझे बहुत प्यार करती है, एक फोन करूंगा तो चार्जबैक हो जाएगा, देख लेना!”

लेकिन असली ट्विस्ट तो तब आया, जब बिल में 40 रुपये अतिरिक्त दिखा। साहब बोले – “ऑनलाइन तो यह आधा है!” दरअसल, पालतू जानवर लाने का शुल्क ऑनलाइन बुकिंग पर कम है, लेकिन डेस्क पर मांगने पर होटल की पॉलिसी के अनुसार 40 रुपये वसूलते हैं – और ये बात लिखित और मौखिक दोनों रूप में पहले ही बता दी गई थी। होटल वाले के पास मेहमान का हस्ताक्षरित 'पेट पॉलिसी एग्रीमेंट' भी मौजूद था। यानी, ‘हाथ कंगन को आरसी क्या।’

यहाँ एक मजेदार बात कम्युनिटी के एक सदस्य ने लिखी, “अमीर लोग अक्सर छोटी-छोटी रकम के लिए सबसे ज्यादा बहस करते हैं। हमारी लाइब्रेरी में भी सबसे अमीर लोग ही लेट फीस पर सबसे ज्यादा झगड़ते थे!” सोचिए, जहाँ गरीब आदमी चुपचाप झेल लेता है, वहीं बड़े लोग हर बात पर ‘कानूनी कार्रवाई’ की तलवार लटका देते हैं।

कानूनी धमकी – 'अब वकील से बात करिए'

जैसे ही साहब ने ‘मुकदमा’ शब्द बोला, होटल स्टाफ ने भी अंग्रेजों वाली चाल चल दी – “माफ़ कीजिएगा, अब आपके वकील हमारे वकील से बात करेंगे। मैं अब कुछ और नहीं कह सकता।” भारतीयों को ये रणनीति जरा अलग लगेगी, लेकिन पश्चिम में जब-जब ग्राहक मुकदमे की धमकी देता है, स्टाफ एकदम चुप हो जाता है – ना पूछताछ, ना सफाई। कम्युनिटी में एक ने तो यहां तक लिख दिया, “ऐसे ग्राहकों को ‘डू नॉट रेंट’ लिस्ट में डाल देना चाहिए – ताकि अगली बार होटल ही ना मिले!”

एक और यूज़र ने चुटकी ली – “50 रुपये के लिए वकील रखोगे? वकील तो 10 मिनट बात करने के ही 1000 रुपये ले लेगा!” और एक ने कहा, “ऐसे लोग धमकी देकर अपना ही नुकसान करते हैं, होटल वालों का क्या जाएगा?” हमारे यहाँ भी अक्सर ग्राहक दुकानदार को धमकी देता है – “कंज्यूमर कोर्ट जाऊंगा!” लेकिन असल में शायद ही कोई जाता हो।

ग्राहक राजा, लेकिन 'कागज़ पर साइन' सबसे बड़ा

कहानी का सबसे मजेदार हिस्सा ये था कि साहब खुद अपने हस्ताक्षर से होटल की नीतियों को स्वीकार कर चुके थे। फिर भी बहस, फिर भी धमकी! एक पाठक ने लिखा, “साइन करने के बाद भी अगर बहस करोगे, तो अगली बार होटल वाले भी सोचेंगे कि ऐसे मेहमान से दूर ही रहना चाहिए।”

गौर करने वाली बात ये भी है कि होटल स्टाफ को इन सब विवादों से कोई फर्क नहीं पड़ता – एक ने लिखा, “भाई, मैं तो न्यूनतम वेतन पर काम करता हूँ, ऊपर वाले जाने, मुझे तो बस शांति चाहिए।” यानी, चाहे आप कितने भी ‘शाइनी रॉक’ क्यों ना हों, स्टाफ के लिए आप भी एक आम ग्राहक ही हैं।

निष्कर्ष – 'शाइनी रॉक' मत बनो, इंसान बनो!

इस कहानी से हमें यही सीख मिलती है कि चाहे आपकी हैसियत कितनी भी ऊँची क्यों न हो, विनम्रता और समझदारी सबसे बड़ी बात है। पचास रुपये के लिए कोर्ट-कचहरी की धमकी देने से न तो आपकी इज्जत बढ़ेगी, न ही कोई फायदा होगा। और हाँ, अगली बार होटल में पालतू जानवर लेकर जाएँ, तो नियम पढ़कर और समझकर ही साइन करें – वरना ‘शाइनी रॉक’ होकर भी कहीं लुड़क न जाएँ!

आपका क्या अनुभव रहा है ऐसे ‘विशेष’ ग्राहकों या दुकानदारों के साथ? कमेंट में जरूर बताएँ – और अगर कहानी पसंद आई हो, तो शेयर करना बिल्कुल न भूलें!


मूल रेडिट पोस्ट: Love me a Shiny Rock Member