विषय पर बढ़ें

जब वकील साथी ने मेरी बिखरी मेज को लेकर शर्मिंदा करना चाहा, मैंने उसे देशी जुगाड़ से जवाब दिया!

दस्तावेजों से भरा एक अस्तव्यस्त डेस्क का कार्टून-शैली 3D चित्र, जो एक कानून कार्यालय का माहौल दर्शाता है।
यह जीवंत कार्टून-3D चित्र एक अस्तव्यस्त डेस्क की अराजकता को दर्शाता है, जो मेरे कानून साथी चाड की मजेदार टिप्पणियों की याद दिलाता है। कल्पना कीजिए उन चुटीली टिप्पणियों को जो हमारे कानों में गूंजती हैं, जबकि हम कानून की दुनिया में हास्य और भाईचारे के साथ आगे बढ़ते हैं!

दफ्तर की ज़िंदगी में हर कोई अपने-अपने ढंग से काम करता है। कुछ लोग होते हैं जो फाइलों को करीने से जमाकर रखते हैं, तो कुछ ऐसे भी हैं जिनकी टेबल पर कागज़ों का मेला लगा रहता है। लेकिन क्या कभी किसी ने सिर्फ आपकी बिखरी मेज की वजह से आपको शर्मिंदा करने की कोशिश की है? आज की कहानी एक वकील साहब की है, जिनकी बिखरी मेज ने उनके साथी की नींद उड़ा दी – लेकिन फिर जो हुआ, वो किसी बॉलीवुड फिल्म से कम नहीं!

"चाड" की बिखरी सोच और तानेदार अंदाज

हमारे कहानी के हीरो एक वकील फर्म में पार्टनर थे। उनकी आदत थी कि ज़रूरत के कागज़, फाइलें, नोट्स – सबकुछ उनकी टेबल पर ढेर में रहता था। भाई, वकीलों का काम ही ऐसा है! लेकिन उनके एक और साथी थे – जिनका नाम हम "चाड" रखेंगे (क्योंकि यही Reddit पर है), जिनको ये बिखरी मेज बिल्कुल पसंद नहीं थी। चाड भाई बार-बार मीटिंग में, दफ्तर के पार्टी में ताने मारते – "इतनी गंदगी! ये क्या तरीका है?" पर हमारे हीरो मुस्कुराकर जवाब देते – "अगर बिखरी मेज बिखरे दिमाग की निशानी है, तो फिर खाली मेज किसकी?"

अब चाड साहब को जब ये जवाब हजम नहीं हुआ, तो उन्होंने नया पैंतरा आज़माया। दफ्तर में हर वकील की अपनी केबिन थी, जिसमें एक लंबी कांच की खिड़की भी थी – जिसकी ब्लाइंड्स (परदे) अंदर से बंद रहते थे ताकि कोई झाँक न सके। हमारे हीरो समेत बाकी सब वकील इन्हें हमेशा बंद रखते थे। लेकिन एक दिन देखा – उनकी केबिन के परदे खुले हैं! अगले दिन फिर वही हाल! हर सुबह आते तो पर्दे खुले मिलते – पूरी दुनिया को उनकी "मशहूर बिखरी मेज" देखने का मौका मिल रहा था!

देसी जुगाड़ और चाड की बोलती बंद

कई दिन तक ये सिलसिला चला। हीरो ने सोचा – शायद सफाई कर्मचारी खोल रहे हों, लेकिन बाकी केबिन के परदे तो बंद ही रहते। अब शक तो चाड पर ही गया – क्योंकि वो हर दिन सबसे पहले दफ्तर आते थे। सीधी बात करने का मन तो किया, लेकिन फिर सोचा – क्यों न थोड़ा देसी जुगाड़ अपनाया जाए?

हीरो ने पुराने ऑफिस ट्रिप की एक तस्वीर ढूँढ़ निकाली, जिसमें चाड उल्टी टोपी पहनकर, पतली बांहें दिखाते हुए कैमरे के सामने मस्ती कर रहे थे – पूरे दफ्तर की नजर में थोड़ा 'मजाकिया' सा पोज़! उस फोटो की रंगीन कॉपी बनवाई, पीछे लिखा – "कृपया मेरे परदे मत खोलिए। अगर फोटो हटाई तो और लगा दूँगा, कई कॉपीज हैं।" फिर फोटो को पर्दे पर बाहर की तरफ चिपका दिया – ताकि कोई परदा खोले, तो सबसे पहले वही फोटो दिखे।

अगली सुबह ऑफिस पहुंचे – परदे बंद! लेकिन फोटो गायब! ज़मीन पर सिर्फ टेप की निशानी रह गई। फिर फोटो दोबारा लगाई – फिर गायब! लेकिन खास बात – अब कभी भी परदे नहीं खुले। चाड साहब की बोलती बंद, और हीरो की बिखरी मेज के दर्शन भी बंद!

बिखरी मेज: जीनियस या जंगलीपन?

इस कहानी पर Reddit पर खूब चर्चा हुई। एक यूज़र ने लिखा – "किसी को क्या फर्क पड़ता है आपकी केबिन में क्या है, जब तक काम हो रहा है?" एक और मजेदार कमेंट था – "कुछ लोग जन्मजात बदमाश होते हैं, बस तंग करने के लिए ताने मारते हैं।" एक और ने कहा – "मेरी भी टेबल बिखरी रहती थी, लेकिन मुझे पता होता था क्या कहाँ है। मेरी टेबल को किसी ने साफ कर दिया तो मैं खुद परेशान हो गया!"

कई हिंदी दफ्तरों में भी ऐसा होता है – कोई नया बाबू आए, सबका रिकॉर्ड उलट-पुलट कर दे, और फिर खुद ही फँस जाए! बड़े-बुजुर्ग कहते हैं – "अरे भाई, काम हो रहा है न, किसे क्या दिक्कत?" एक पाठक ने तो यहाँ तक लिखा – "खाली मेज खाली दिमाग की निशानी होती है!" और भई, हमारे देश में तो जुगाड़ का जवाब नहीं – फोटो, पोस्टर, डायलॉग्स, सब चलेगा!

काम का तरीका, पहचान का हिस्सा

असल में दफ्तर में हर किसी का अपना-अपना तरीका होता है। कुछ लोग कागज़ों के ढेर में भी मोती तलाश लेते हैं, तो कुछ को सफाई में ही सुकून मिलता है। Reddit पर एक यूज़र ने लिखा – "मेरे बॉस की टेबल हमेशा बिखरी रहती थी, लेकिन उसको हर फाइल का पता था।" एक और बोले – "अगर कोई मेरे ढेर को छुए, तो ग़ज़ब की नाराज़गी होती है!"

यही तो खूबसूरती है – काम करने के अपने-अपने अंदाज़। और अगर कोई आपको आपके काम के तरीके से शर्मिंदा करे, तो थोड़ा सा मजाक, थोड़ी सी जुगाड़ और मुस्कान – सबका हल है।

निष्कर्ष: अपनी पहचान पर गर्व करो!

तो दोस्तों, अगली बार अगर कोई आपकी बिखरी मेज या अलग काम करने के तरीके पर तंज कसे, तो मुस्कुराकर कहिए – "भाई, मेज भले ही बिखरी हो, दिमाग नहीं!" और हाँ, कभी-कभी छोटे-छोटे मजाकिया बदले (petty revenge) भी काम कर जाते हैं – जैसे हमारे वकील साहब ने किया।

क्या आपके साथ भी ऑफिस में कभी ऐसा कुछ हुआ है? नीचे कमेंट में ज़रूर बताइए। और अगर कहानी पसंद आई हो, तो शेयर कीजिए – ताकि और लोग भी समझें, हर बिखरी चीज़ में भी एक सिस्टम होता है!


मूल रेडिट पोस्ट: My law partner wanted to shame me for my messy desk