जब रूममेट ने मेरी संतरे की जूस चुराई, तो मैंने ऐसे सिखाया उसे सबक!
अगर आप कभी हॉस्टल या किराए के घर में रहे हैं, तो रूममेट के साथ खाने-पीने का सामान बांटने की मजबूरी और उस पर होने वाली छोटी-मोटी लड़ाइयों से जरूर वाकिफ होंगे। "मेरा दूध किसने पिया?", "अरे, मेरी मैगी कौन ले गया?" जैसी बातें भारत के हर हॉस्टल में सुनाई देती हैं। लेकिन आज जो कहानी मैं सुनाने जा रहा हूँ, उसमें एक नौजवान ने अपने खाने का सामान चुराने वाले रूममेट को ऐसा सबक सिखाया कि उसकी चोरी की आदत हमेशा के लिए छूट गई!
जब समझाना न चले, तो 'जुगाड़' अपनाओ!
इस कहानी के नायक Reddit यूज़र 'u/Pleasant_Bad924' हैं, जिनका रूममेट बार–बार उनकी संतरे की जूस, अचार, पीनट बटर और क्रीम चीज़ खा-पी जाता था। कई बार समझाने के बावजूद रूममेट की हरकतें कम न हुईं। अब भारत में भी ऐसा अक्सर होता है—कई बार कहने पर भी लोग समझते नहीं, और हद तो तब होती है जब इंसान की अपनी चीज़ें ही उसे नसीब न हों!
लेकिन फिर इस युवक ने 'जुगाड़' लगाई—एकदम देसी अंदाज़ में। उसने दो दिन तक बीमार होने का नाटक किया, ताकि रूममेट घर पर रहे और सब कुछ देख सके। उसने जूस की बोतल से सीधा मुँह लगाकर पिया, अचार के डिब्बे का किनारा जीभ से चाटा, पीनट बटर में उंगली डाली, और क्रीम चीज़ को भी चाकू की बजाय उंगली से ब्रेड पर लगाया। और ये सब उसने ऐसे किया कि रूममेट की आंखों के सामने हो!
'जुगाड़' का असर—रूममेट की हालत 'खस्ता'
रविवार आते-आते, रूममेट से रहा नहीं गया। उसने पूछा, "क्या तुम हमेशा ऐसे ही अपने खाने के साथ करते हो?" युवक ने सीधा जवाब दिया—"भाई, जब मैं ही अपना सामान खा रहा हूँ, तो बर्तन क्यों गंदे करूँ?" अब सोचिए, भारत में भी अगर आप किसी को अपने सामने ऐसे करते देख लें, तो खुद खाने का मन ही खराब हो जाएगा। रूममेट समझ गया कि आगे से किसी की चीज़ में हाथ डालना मतलब खुद के लिए बीमारी बुलाना!
कमाल की बात यह रही कि रूममेट ने खुद ही समाधान सुझा दिया—"चलो, फ्रिज के लिए अलग-अलग शेल्फ़ और दराज तय कर लेते हैं, ताकि कोई कन्फ्यूजन ही न रहे!" यही तो असली जीत थी!
कम्युनिटी की प्रतिक्रिया—'प्याज के छिलकों' से लेकर 'लाल मिर्ची' तक
Reddit पर जब ये किस्सा पोस्ट हुआ, तो हजारों लोगों ने इसे पसंद किया। एक यूज़र ने लिखा, "ये तो शानदार जीत है!" किसी ने अपने अनुभव साझा किए—"मेरे रूममेट ने मेरी नोज़ हेयर ट्रिमर तक इस्तेमाल कर ली थी! अब मैं अपनी चीजें बैग में बंद करके रखता हूँ।" एक और मज़ेदार कमेंट था—"कॉलेज में एक दोस्त बार-बार संतरे की जूस चुराता था, तो हमने उसमें पाउडर वाली जुलाब मिला दी। दोबारा कभी नहीं छुआ!"
यहाँ तक कि एक ने कहा, "तुमने अपने रूममेट को खुद समझदारी से फैसला लेने लायक बना दिया। यह तरीका न तो खतरनाक है, न ही किसी को नुकसान पहुँचाता है—बस दिमाग से खेलना आना चाहिए!"
और सोचिए, भारत में भी कितने लोग हैं जो अपने खाने की चीज़ें दूसरों से बचाने के लिए तरह-तरह के जुगाड़ लगाते हैं—कभी दही में लाल मिर्च पाउडर तो कभी दूध में नमक! लेकिन इस युवक ने बिना किसी को बीमार किए, बस थोड़ी सी 'गंदगी' दिखाकर ही सबक सिखा दिया।
भारतीय संदर्भ—'अपना खाना, अपनी जिम्मेदारी'
हमारे यहाँ अक्सर बड़े-बुज़ुर्ग कहते हैं—"जो चीज़ तुम्हारी नहीं है, उस पर हक मत जमाओ।" लेकिन जब जबान पर ताला न लगे और आदत न सुधरे, तो कभी-कभी थोड़ा 'प्याज के छिलके' जैसा झटका देना ही पड़ता है। इस कहानी से हमें यही सीख मिलती है कि समस्या का हल हर बार लड़ाई-झगड़े से नहीं, बल्कि चतुराई और हँसी-मज़ाक से भी किया जा सकता है।
कुछ Reddit यूज़र्स ने तो यह भी कहा कि अब रूममेट दूसरों को अपने 'गंदे' रूममेट की कहानी सुनाएगा! और क्यों न सुनाए? आखिर ऐसी 'जुगाड़ू' जीत हर दिन थोड़ी ही मिलती है!
निष्कर्ष—हाथ की सफाई और दिमाग की चाल!
तो दोस्तों, अगली बार जब कोई आपकी मैगी, दूध, या मिठाई चुराए, तो गुस्सा करने से पहले थोड़ा दिमाग लगाइए—शायद कोई ऐसी तरकीब आपके काम आ जाए, जिससे सामने वाला खुद-ब-खुद सुधर जाए। आखिरकार, 'जो काम बातों से न हो, वह जुगाड़ से हो जाता है!'
आपकी क्या राय है? क्या आपने भी कभी अपने रूममेट या ऑफिस के साथी को इस तरह सबक सिखाया है? नीचे कमेंट में जरूर बताइए। साथ ही यह किस्सा अपने दोस्तों के साथ शेयर करना न भूलें—क्या पता, किसी का पेट हँसी से ही दुखने लगे!
मूल रेडिट पोस्ट: Roommate keeps drinking my OJ so I teach them a lesson