जब रूममेट टॉयलेट पेपर बदलना भूल जाए: एक जुगाड़ू बदला!
हम सबने कभी न कभी रूममेट के साथ रहने का अनुभव किया है—कभी कपड़े फैलाने की लड़ाई, कभी बर्तन धोने की बहस, और कभी-कभी तो ऐसी छोटी-छोटी बातें भी झगड़े की वजह बन जाती हैं जिनका अंदाज़ा भी नहीं होता। लेकिन एक समस्या है जो हर घर, हॉस्टल या पीजी में निश्चित रूप से हर किसी ने झेली होगी—टॉयलेट पेपर न बदलने की आदत!
"अरे भाई, आखिर इतनी भी क्या जल्दी थी?"
सोचिए, आप आराम से बाथरूम जाते हैं, और जैसे ही सबसे ज़रूरी वक्त आता है, सामने टॉयलेट पेपर का खाली रोल आपको ऐसे देख रहा है जैसे आपके हालात पर मुस्कुरा रहा हो। और फिर याद आता है—"ये काम इस बार भी मेरे रूममेट ने किया होगा।" Reddit यूज़र u/josephmethew1988 की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। उन्होंने अपने रूममेट की उस आदत से तंग आकर, जिसमें वो टॉयलेट पेपर खत्म करके भी नया रोल नहीं रखते थे, एक ज़बरदस्त जुगाड़ निकाला।
उन्होंने क्या किया? एक सस्ता सा ओवर-द-डोर हैंगिंग ऑर्गनाइज़र लाए, उसके सबसे ऊपर वाले पॉकेट पर मोटे अक्षरों में "TOILET PAPER" लिख दिया और बाथरूम के दरवाजे पर, बिलकुल आँखों के सामने, टांग दिया। नीचे के पॉकेट्स में वाइप्स, साबुन, कचरा बैग वगैरह रख दिए ताकि सब कुछ "नॉर्मल" लगे, लेकिन असली स्टार वही टॉयलेट पेपर वाली जेब थी। अब उन्होंने कोई एक्स्ट्रा रोल अलमारी या खिड़की पर रखना भी बंद कर दिया। मतलब, अगर रोल खतम तो दरवाजा खोलो और यही से नया रोल लेना पड़ेगा—भले ही कितना भी अजीब लगे!
जब 'छोटी बदला' बन गई बड़ी सीख
पहली बार जब उनके रूममेट के सामने ये जुगाड़ आया, तो हल्की-सी बड़बड़ाहट सुनाई दी। दूसरी बार—रूममेट ने बिना कहे खुद ही रोल बदल दिया! अब तो जब भी आखिरी रोल पॉकेट में रह जाता है, रूममेट खुद जाकर नया पैकेट लाते हैं। Reddit पोस्ट में लिखा गया—"ये बदला तो छोटा सा है, लेकिन असरदार है!"
यह कहानी जितनी मज़ेदार है, उतनी ही रिलेटेबल भी। कमेंट्स में कई लोगों ने अपने-अपने जुगाड़ और 'petty revenge' के किस्से भी साझा किए। एक यूज़र ने लिखा, "अगर रोल खत्म होने वाला हो, तो उसे हटा देता हूँ, ताकि अगला बंदा खुद ही नया रोल लगाने की मजबूरी में आ जाए!" किसी ने तो अपनी टॉयलेट पेपर की पूरी स्टॉकिंग अलमारी में ताला लगाकर रखनी शुरू कर दी—"जब तक खुद को जरूरत न पड़े, तब तक कोई मिलेगा ही नहीं!"
"घर के राजा, लेकिन जिम्मेदारी से कोसों दूर!"
हिंदी परिवारों में भी अक्सर ऐसा देखने को मिलता है—घर के बड़े-बुजुर्ग कहते हैं, "बेटा, छोटा काम हो या बड़ा, घर की जिम्मेदारी सबकी है।" लेकिन रूममेट सिस्टम में, खासकर जब सब जवान हों, तो ये जिम्मेदारी कब किसके सिर आए, भगवान ही जाने!
Reddit के कुछ यूज़र्स ने तो अपने रूममेट को 'नालायक' और 'मैनचाइल्ड' तक कह डाला। एक कमेंट में लिखा था, "मेरे रूममेट ने कभी टॉयलेट पेपर नहीं खरीदा, बस मेरा इस्तेमाल करता रहा। जब उसकी गर्लफ्रेंड आई, तब सब साफ-साफ दिखने लगा—घर की सफाई, बर्तन, सामान...सब मेरा था! गर्लफ्रेंड ने उसकी ये लापरवाही देखी और उसे छोड़ दिया।"
ये सच्चाई है—चाहे लड़का हो या लड़की, जब कोई अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाता, तो दूसरे के लिए बोझ बन जाता है। एक और यूज़र ने चुटकी लेते हुए लिखा, "अगर कोई टॉयलेट पेपर नहीं बदलता, तो क्या उसे दिमागी नुकसान होता है?" इस पर कई लोगों ने मज़ाक में कहा—"नहीं, बस आलसीपन की बीमारी है!"
"जुगाड़, मस्ती और थोड़ी-सी मिर्ची!"
हम भारतीय तो जुगाड़ के लिए जाने जाते हैं। Reddit पर जितने भी किस्से आए, उनमें से कई में हल्की बदमाशी, हंसी-मजाक और थोड़ी-सी तिकड़म साफ झलकती है। किसी ने अपने टॉयलेट पेपर को कांच के केस में बंद करके रूममेट को जलाया, तो किसी ने हर बार अपना रोल साथ लाना शुरू कर दिया। एक जगह लिखा था, "जब रूममेट को खुद रोल लाना पड़ेगा और चुपचाप शेम शेम करते हुए बाथरूम से बाहर निकलना पड़ेगा, तब समझ आएगा!"
कुछ कमेंट्स में तो भारतीय संयुक्त परिवारों की झलक भी दिखी—"हमारे यहां तो दादी-नानी सबको डांट देतीं, एक दिन में आदत सुधर जाती!" वहीं, एक यूज़र ने कहा, "भारत में तो पानी की बाल्टी साथ रखना सिखाया जाता है, टॉयलेट पेपर की इतनी लड़ाई ही नहीं!"
अंत में: "छोटी-छोटी बातों में ही छुपी है बड़ी खुशी"
तो भाइयों और बहनों, चाहे आप हॉस्टल में हों, पीजी में, या अपने ही घर में—ऐसी छोटी-छोटी परेशानियां हर जगह हैं। लेकिन इनका हल भी हमारे पास है—जुगाड़, थोड़ा-सा मज़ाक, और एक-दूसरे को समझाने का तरीका। अगर आपके घर में भी कोई 'टॉयलेट पेपर किंग' है, तो इस कहानी को जरूर शेयर करें। क्या पता, अगली बार वो खुद से रोल बदल दे!
आपके साथ भी ऐसा कोई मज़ेदार किस्सा हुआ है? कमेंट में जरूर बताएं—शायद आपकी कहानी भी किसी की 'petty revenge' बन जाए!
मूल रेडिट पोस्ट: Roommate kept forgetting to replace the toilet paper, so I made it impossible to miss