जब यूनिवर्सिटी ने कहा 'ऑनलाइन शिकायत करो', छात्र ने ठोक दीं 43 शिकायतें!
हमारे देश में अकसर यह कहा जाता है – “सिस्टम को बदलना हो, तो उसी सिस्टम से लड़ना पड़ता है।” लेकिन क्या हो जब सिस्टम ही कह दे कि “भैया, शिकायत तो ऑनलाइन फॉर्म से ही करनी पड़ेगी”? आज हम आपको एक ऐसी कहानी सुनाएंगे जिसमें एक होशियार छात्र ने अपनी यूनिवर्सिटी की ‘ऑनलाइन शिकायत प्रणाली’ को इतने ज़ोरदार तरीके से आज़माया कि पूरी प्रशासनिक टीम की नींद उड़ गई।
यूनिवर्सिटी की दुविधा और छात्रों की जद्दोजहद
कहानी शुरू होती है एक आम यूनिवर्सिटी के छात्र संघ से, जहां छात्रों की परेशानी कोई नई बात नहीं – कभी हीटर खराब, कभी स्टडी रूम बुकिंग में गड़बड़ी, तो कभी हॉस्टल के बाथरूम में महीनों से पानी ही नहीं! छात्र संघ ने प्रशासन से कई बार मिलकर, मेल भेजकर, हर तरीके से कोशिश की कि उनकी समस्याओं पर ध्यान दिया जाए। मगर जवाब हर बार वही – “आपकी शिकायतें ठीक से दर्ज नहीं हो रही हैं, कृपया ऑफिशियल ऑनलाइन पोर्टल पर फॉर्म भरें।”
अब हमारे देश में भी ऐसा ही चलता है – जब तक लिखित में न दो, कोई सुनवाई नहीं! एक कहावत भी है, “मुंहज़ुबानी बातों की कोई कीमत नहीं, कागज़ दिखाओ!” यही हाल वहां भी था। छात्र सोचते थे कि मिल-बैठकर बात सुलझा लें, पर प्रशासन बस अपने फॉर्म की रट लगाए था।
एक छात्र का ‘ऑनलाइन’ वार – 43 शिकायतें एक ही रात में!
तीसरी मीटिंग के बाद, एक छात्र (माना जाए उसका नाम अमित है) ने ठान लिया कि अब तो जैसा प्रशासन चाहता है, वैसा ही करेंगे – वो भी पूरे जोर-शोर से! अमित ने उस शाम अपनी सारी नोट्स, तस्वीरें, तारीखें और समस्याओं की पूरी लिस्ट निकाली और एक-एक करके 43 अलग-अलग शिकायतें ऑनलाइन फॉर्म में भर दीं। हर शिकायत में पूरा विवरण, लोकेशन, असर, फोटो – सब कुछ।
सोचिए, हमारी सरकारी वेबसाइट्स पर एक ही फॉर्म भरना कितना भारी लगता है, और यहां अमित ने 43 फॉर्म भर डाले! हर शिकायत की पुष्टि में उसे ईमेल भी आया, जिसे उसने अपने छात्र समूह के व्हाट्सएप ग्रुप में भेजा – “लो भाई, अब पूरा सिस्टम हिला दिया!”
प्रशासन के होश उड़ गए – “इतनी शिकायतें एक ही छात्र से?!”
दो दिन बाद यूनिवर्सिटी की सुविधाएं देखने वाले अधिकारी ने छात्र संघ को फोन घुमा दिया – “भई, सब ठीक तो है? हमारे पोर्टल पर एक ही छात्र की तरफ से इतनी सारी शिकायतें आ गई हैं!” छात्र संघ ने आराम से जवाब दिया, “सर, आप ही की सलाह मानी है – हर बात ऑफिशियल फॉर्म से!”
अब कमाल देखिए – दो हफ्तों में तीन बड़ी समस्याएं हल हो गईं। जिस स्टडी रूम की बुकिंग छह हफ्ते से डबल हो रही थी, उसे उसी दिन ठीक कर दिया गया। यानी जब शिकायतें कागज़ी तौर पर दर्ज होती हैं, तो प्रशासन भी तुरंत हरकत में आ जाता है। यही तो है असली ‘दस्तावेजी शक्ति’!
कमेंट्स में क्या हुआ – हंसी-ठिठोली और कामकाजी सीख
रेडिट पर इस पोस्ट को पढ़कर कई लोगों ने मजेदार टिप्पणियां कीं। एक ने लिखा – “ये तो बस नियमों का पालन है, इसमें कोई शैतानी नहीं!” वहीं, किसी ने मज़ाक में कहा – “अगर हर छात्र यही करता तो उनके पोर्टल की सर्वर ही बैठ जाती!” किसी ने यह भी जोड़ा, “हमारे अस्पताल में भी यही है, जब तक लिखित में न दो, कोई काम नहीं होता।”
एक और टिप्पणी थी – “मौखिक शिकायतें हवा में उड़ जाती हैं, और जब कागज़ी शिकायत आती है तो उसका हिसाब-किताब सबके पास रहता है।” यह बात हमारे सरकारी दफ्तरों में भी खूब लागू होती है – जब तक फाइल आगे न बढ़े, काम आगे नहीं बढ़ता!
कुछ लोगों ने तंज भी कसा – “इतने दिनों तक फॉर्म भरने से बचते रहे, अब जब भरा तो काम हो गया। वाह!” एक और पाठक ने हल्के-फुल्के अंदाज में लिखा, “अगर रोज़ हर दिन नई शिकायत डालते, तब असली ‘मालिशियस कम्प्लायंस’ होता!”
हमारी सीख – अपने हक के लिए सही प्रक्रिया अपनाइए
यह कहानी एक मजेदार उदाहरण है कि कैसे कभी-कभी सिस्टम को उसी की भाषा में जवाब देना पड़ता है। हमारे देश में भी, जब तक शिकायतें लिखित में, ऑनलाइन पोर्टल या सीएम हेल्पलाइन पर न जाएं, बड़ी से बड़ी समस्या को हल्के में लिया जाता है। मौखिक शिकायतें चाहे जितनी सच्ची हों, प्रशासन को तब तक फर्क नहीं पड़ता जब तक दस्तावेज़ी सबूत न हो।
तो अगली बार अगर आपके ऑफिस में, यूनिवर्सिटी में या सोसाइटी में कोई समस्या हो – “भैया, ऑनलाइन फॉर्म भर दो!” क्योंकि आखिर में, ‘जो लिखा, वही टिकता है’।
निष्कर्ष – आपकी क्या राय है?
तो दोस्तों, आपको क्या लगता है – क्या अमित ने सही किया? क्या हमें भी हर शिकायत के लिए ऑनलाइन पोर्टल का ही सहारा लेना चाहिए? या कभी-कभी मौखिक संवाद भी मायने रखता है? अपने अनुभव और राय कमेंट में ज़रूर बताएं। और हां, अगली बार जब कोई कहे – “शिकायत लिखकर दो”, तो सोचिएगा जरूर, कहीं कहानी का अमित तो नहीं बनने वाले!
मूल रेडिट पोस्ट: My university said all complaints had to be submitted through the official online form. So I submitted forty three of them.