जब 'मैं दिख नहीं रहा?' का जवाब शॉपिंग ट्रॉली से मिला: एक छोटी सी बदला कहानी
सुपरमार्केट की लाइन में खड़े होने का अनुभव हम सबने कभी न कभी झेला है। कभी कोई आगे घुस जाता है, कभी कोई आपकी तरफ देख के भी अनदेखा कर देता है। लेकिन सोचिए, अगर किसी ने आपके सब्र का इम्तिहान ले लिया, तो आप क्या करेंगे? आज हम एक ऐसी ही अनोखी, मज़ेदार और थोड़ी-सी चुटीली बदला कहानी लेकर आए हैं, जिसने इंटरनेट पर तहलका मचा दिया।
सुपरमार्केट की लाइन: जब सब्र टूटा
अमेरिका के कैलिफोर्निया में एक सुपरमार्केट (Stater Bros) में एक सज्जन (Reddit पर u/Killwind) ने हाल ही में ऐसा वाकया झेला जो अक्सर भारत के मॉल्स या किराना स्टोर्स में भी देखा जा सकता है। ये जनाब लंबाई में 6 फ़ुट 4 इंच और 100 किलो से ऊपर—यानि किसी को भी नज़र आ जाएं! लेकिन एक महिला आईं और ऐसे आगे बढ़कर काउंटर पर सामान रख दिया, जैसे भाई साहब वहां हैं ही नहीं। सोचिए, आपकी जगह कोई होता तो क्या करता?
जनाब ने भी धीरे से बोल दिया, "तो आप मुझे देख ही नहीं रही हैं क्या?" लेकिन सामने वाली को कोई फर्क नहीं पड़ा। वो अपने काम में लगी रहीं, जैसे सामने खड़े इंसान हवा हो!
अब यहां तक तो कई बार लोग सह लेते हैं, लेकिन असली मज़ा तो आगे आया।
ट्रॉली का बदला: जब शॉपिंग ट्रॉली बनी हथियार
अब दोनों ने अपनी-अपनी शॉपिंग की पेमेंट कर ली। बाहर निकले तो देखा, वही महिला अपनी शॉपिंग ट्रॉली पार्किंग में कार के पास छोड़कर जाने लगी—बस दस कदम दूर ट्रॉली रखने की जगह थी, लेकिन उसे फर्क नहीं पड़ा।
हमारे नायक ने आवाज़ लगाई, "मैडम, ट्रॉली रखने की जगह पीछे है!" लेकिन फिर वही अनदेखी! अब जनाब को भी गुस्सा आ गया, बोले—"कोई बात नहीं, मैं आपकी ट्रॉली रख देता हूँ।"
और फिर ट्रॉली को जाकर सीधे उस महिला की कार के पीछे ऐसे रखा कि अब अगर महिला कार बैक करेगी, तो पहले ट्रॉली हटानी पड़ेगी। जब महिला ने खिड़की खोलकर देखा तो जनाब ने एकदम फिल्मी डायलॉग फेंका—"अब तो दिख रहा हूँ न?" और शान से वहां से निकल गए।
सोशल मीडिया की प्रतिक्रिया: ‘कर्मा’ का मज़ा
इस किस्से ने Reddit पर जैसे आग लगा दी! लोग बोले, "भाई, क्या बदला लिया है—इसे कहते हैं ऑन-द-स्पॉट कर्मा!" एक ने तो मज़ाक में कहा, "अगर ट्रॉली उल्टी करके रखते तो और मज़ा आता!"
बहुतों ने यह भी लिखा कि आजकल लोग छोटी-छोटी बातों पर इतना भड़कते क्यों हैं। एक कमेंट में किसी ने अपनी कहानी सुनाई, "एक दिन एक बूढ़ी औरत ने मुझे गंदी गाली दी, सिर्फ इसलिए कि मैंने कार बैक करते वक्त एक परिवार को रास्ता दिया।"
किसी और ने कहा, "पार्किंग में लोग 30 सेकंड भी इंतज़ार नहीं कर सकते, लगता है जैसे दुनिया का सबसे बड़ा अन्याय उनके साथ हो गया हो!"
यहां तक कि कुछ ने यूरोप का उदाहरण भी दिया—वहां शॉपिंग ट्रॉली यूज़ करने के लिए सिक्का डालना पड़ता है, जिससे लोग मजबूरी में ट्रॉली वापस रखते हैं। भारत में भी कई मॉल्स ने अब ऐसी व्यवस्था शुरू की है, लेकिन फिर भी कई लोग ट्रॉली कहीं भी छोड़ देते हैं।
हमारी संस्कृति में शिष्टाचार: क्या हम सीख पा रहे हैं?
सोचिए, भारत में भी कई बार दुकानों, मॉल्स या पार्किंग में ऐसी घटनाएं हो जाती हैं। कोई लाइन तोड़ देता है, कोई ट्रॉली या ठेला बीच रास्ते में छोड़कर चला जाता है। कई बार हम देखते हैं कि लोग छोटी-छोटी बातों पर बहस करने लगते हैं, या फिर अपने किए गए गलत काम को अनदेखा कर देते हैं।
यह कहानी सिर्फ मज़ाक नहीं, बल्कि हमें यह भी सोचने पर मजबूर करती है कि आखिर हम समाज में रहकर दूसरों की कितनी परवाह करते हैं। Reddit के एक टिप्पणीकार ने बढ़िया लिखा—"मैं तो हमेशा अपनी ट्रॉली वापस रखता हूँ, और कभी-कभी दूसरों की भी।"
कुछ लोगों ने यह भी कहा कि अगर कोई अस्वस्थ है या बुजुर्ग है, तो उसे छूट मिलनी चाहिए। लेकिन अगर आप पूरी तरह स्वस्थ हैं, तो दूसरों के लिए मुश्किल बढ़ाना कहां की समझदारी है?
निष्कर्ष: आप क्या करते?
तो पाठकों, अगली बार जब आप शॉपिंग करें या पार्किंग में ट्रॉली छोड़ने का मन हो, तो इस कहानी को याद कर लीजिएगा। कभी-कभी छोटी-छोटी बातों से ही समाज में बड़ा फर्क आता है। और हां, अगर किसी ने आपके साथ बदतमीजी की, तो सीधे लड़ने के बजाय थोड़ा सा 'प्यारा बदला' भी लिया जा सकता है—जैसे हमारे इस नायक ने किया!
अब आपकी बारी—क्या आपने कभी किसी को ऐसे मज़ेदार तरीके से सबक सिखाया है? या खुद किसी की बदमाशी का शिकार हुए हैं? कमेंट में जरूर बताइए और अपने दोस्तों के साथ ये कहानी शेयर करना न भूलें!
मूल रेडिट पोस्ट: Steps I front of me at check out now wait while I put your shopping cart behind you car.