जब मेहमान ने होटल के लॉन में खड़े होकर कमरे गिनवाए: एक रात की अनोखी कहानी
होटल की नौकरी, वो भी नाइट शिफ्ट – भाई साहब, हर रात कोई न कोई नया तमाशा देखने को मिल जाता है। लेकिन कभी-कभी ऐसे मेहमान आ जाते हैं, जो होटल वालों की परीक्षा ले लेते हैं। आज की कहानी ऐसी ही एक जुगाड़ू इतालवी फैमिली की है, जो थाईलैंड के एक फाइव स्टार होटल में आई और अपने “प्लैटिनम एलीट” स्टेटस का पूरा फायदा उठाने पर अड़ी रही।
जब ‘एलीट’ बनाम ‘अवलेबलिटी’ की हो गई जंग
2014 की बात है, थाईलैंड के रायोंग में एक 14 मंज़िला आलीशान होटल, चारों तरफ फैले हरे-भरे लॉन और सामने समुद्र का नज़ारा। रात की ड्यूटी मैनेजर थे हमारे कहानीकार, और उसी दिन होटल में आई थी एक इतालवी परिवार – जिनका दावा था कि उनका दर्जा “प्लैटिनम एलीट” है। पश्चिम के देशों में होटल चेन में बड़े दर्जे के ग्राहकों को कभी-कभी बुकिंग से बढ़िया रूम या सूट मिल जाता है – वो भी मुफ्त में, अगर उपलब्ध हो।
मगर इस बार किस्मत ने उनका साथ नहीं दिया। होटल में पहले से सारे कमरे बुक थे, इसलिए उन्हें जो मिला – वो प्रीमियम ओशन व्यू रूम था, जबकि उन्होंने तो नॉर्मल रूम बुक किया था। मगर जनाब का मन तो सूट में ही रमता था!
“हमारे सामने गिनिए, कितने कमरे खाली हैं!”
दोपहर को चेक-इन करने के बाद, रात में थोड़ी वाइन पीकर साहब और उनका परिवार लॉबी में पहुंचे। होटल मैनेजर को बुलाया और वही पुरानी ‘हमारा हक’ वाली बहस शुरू हो गई। मुद्दा ये था – “हमें सूट चाहिए, हमारे स्टेटस का सम्मान कीजिए!” मैनेजर ने विनम्रता से समझाया – “सारे सूट बुक हैं, जो सबसे अच्छा उपलब्ध था, वो आपको ही दिया है।” मगर इतालवी परिवार को लगता था कि होटलवाले बहाना बना रहे हैं।
अब तो जैसे हिंदुस्तानी शादी वाले मेहमान हो – बोले, “हम खुद देखना चाहते हैं! चलिए लॉन में, ऊपर की तरफ देखिए और बताइए कौन सा कमरा खाली है!” बेचारे मैनेजर को रात के साढ़े ग्यारह बजे पूरे परिवार के साथ लॉन में खड़ा होना पड़ा। सब मिलकर ऊपर बालकनियों में झांक रहे थे – जैसे कोई सीरियल का क्लाइमेक्स चल रहा हो!
हिम्मत, धैर्य और होटल वालों की मजबूरी
दो घंटे तक ये तमाशा चला – मानों कमरे गिनने की प्रतियोगिता हो रही हो। आखिरकार, जब इतालवी परिवार को यकीन हो गया कि वाकई कोई सूट खाली नहीं है, तो उन्होंने नया पैंतरा आजमाया – “कुछ तो दीजिए! हमारा नुकसान हुआ है।”
यहां पर होटल वालों की मजबूरी देखिए – ग्राहक को मनाने के लिए उन्हें 4000 ‘पॉइंट्स’ मुफ्त में देने पड़े, जो आगे चलकर किसी भी होटल में छूट जैसी सुविधा के लिए इस्तेमाल हो सकते हैं। मैनेजर की हालत जैसे घर में मेहमान के जाते ही राहत की सांस लेने वाली होती है – “क्या रात थी, महाराज!”
कमेंट्स की महफिल: होटल कर्मचारियों की पीड़ा और मेहमानों की अदा
रेडिट पर इस किस्से को पढ़ते ही लोगों ने अपनी-अपनी राय दे डाली। एक यूज़र ने बड़ा जोरदार तंज कसा – “ये वही लोग हैं जो कभी भी शर्तें, नियम-पत्र नहीं पढ़ते। बस ‘विषय उपलब्धता’ तो कहीं लिखा रहता ही है, मगर इनको बस अपना हक़ चाहिए!” (जैसा भारत में कई लोग बिना पंक्ति के ही लाइन में घुस जाते हैं)
दूसरे ने लिखा – “ये जानते हैं कि जितना बहस करोगे, होटल वाले डर के मारे कुछ न कुछ मुफ्त में दे ही देंगे!” कुछ-कुछ वैसा ही जैसे भारतीय ग्राहक दुकानदार से “भैया, कुछ तो कम करो” की जिद लगाते हैं।
एक मेहमान ने भी अपनी बात रखी – “मैं खुद कभी नियम नहीं पढ़ता, जब डबल रूम बुक करके सूट मिल जाए तो मजा ही आ जाता है!” यानी कभी-कभी किस्मत भी साथ देती है, मगर हक़ जताना कुछ ज्यादा ही हो जाता है।
एक और यूज़र ने होटल का नाम ‘शमारियट’ सुनकर मजाक किया – “नाम ऐसा है जैसे कोई अजीब सा होटल हो, जहां कुछ भी हो सकता है!” और किसी ने जोड़ा – “शायद यहां जोकरों का सम्मेलन भी होता हो!” (वैसे हमारे यहां शादी-ब्याह में भी अजीबोगरीब रिश्तेदार आ ही जाते हैं)
होटल इंडस्ट्री में ऐसे तमाशे आम हैं – पर हिम्मतवाले ही टिकते हैं
होटल की नौकरी करना, खासकर बड़े-बड़े होटलों में, कोई बच्चों का खेल नहीं। हर दिन, हर रात नए मेहमान, उनकी अलग-अलग फरमाइशें – और कई बार तो ऐसे-ऐसे वाकये, जिन पर यकीन करना मुश्किल है। लेकिन जो लोग फ्रंट डेस्क पर होते हैं, उन्हें हर हाल में धैर्य रखना आता है। चाहे कितनी भी देर हो, चाहे कितनी भी बहस हो, आखिर में काम यही होता है कि मेहमान खुश होकर जाए।
जैसा एक यूज़र ने लिखा – “मैं तो खुश हूं कि कभी बड़े होटलों में काम नहीं किया।” कई बार ये काम वाकई सिरदर्दी भरा होता है, मगर सीख भी बहुत मिलती है – लोगों को समझना, अपनी बात मनवाना और हर हाल में शांति बनाए रखना।
अंत में: आप क्या सोचते हैं?
तो दोस्तों, इस होटल मैनेजर की तरह क्या आपने भी कभी ऐसे जुगाड़ू मेहमान या ग्राहक देखे हैं, जो हर हाल में अपना फायदा निकालना जानते हैं? या कभी खुद भी किसी होटल या दुकान में ऐसी जिद की हो? नीचे कमेंट करके जरूर बताइए – आपकी कहानियां भी सुनने का इंतजार रहेगा!
होटल इंडस्ट्री की और मजेदार कहानियों के लिए जुड़े रहिए, और अगली बार जब होटल में जाएं, तो फ्रंट डेस्क वालों के धैर्य की कद्र जरूर कीजिएगा – क्योंकि पर्दे के पीछे बहुत कुछ चलता है, जो सामने नहीं आता!
मूल रेडिट पोस्ट: We were literally showing the rooms from the banquet lawns to make them believe that we were sold out!!!!