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जब मेहमान ने होटल के रिसेप्शनिस्ट से 'ठंडक की जादूगरी' की मांग की

रात के ऑडिट शिफ्ट में मेहमान एसी खराब होने की शिकायत कर रहा है, एक सिनेमाई होटल सेटिंग में।
एक सिनेमाई पल में, रात का ऑडिट शिफ्ट अप्रत्याशित चुनौतियों की कहानी में बदल जाता है जब एक मेहमान एसी यूनिट को लेकर अपनी निराशा व्यक्त करता है। क्या हमारा नायक हालात को ठंडा करने का तरीका खोज पाएगा? आइए, इस रात के शिफ्ट के dilema में मेरे साथ चलें!

होटल में रिसेप्शन की डेस्क पर रात की शिफ्ट, ऊपर से गहरी नींद का आलम और अचानक कोई मेहमान गुस्से में सामने आ जाए – सोचिए कैसा लगेगा? एक ऐसी ही घटना सामने आई, जिसमें एक मेहमान ने होटल के रिसेप्शनिस्ट से ऐसी मांग कर डाली कि सुनकर आप भी मुस्कुरा देंगे।

जरा सोचिए, अगर आपसे कोई कहे – “भैया, मेरा कमरा एकदम ठंडा कर दो, अभी के अभी!” और अगर आप खुद भगवान नहीं हैं, तो क्या करेंगे? आज की कहानी है, एक ऐसे रिसेप्शनिस्ट की, जिसे होटल के मेहमान से भिड़ना पड़ा – और वजह थी, एयर कंडीशनर यानी एसी!

एसी का जादू या विज्ञान का सच?

ये किस्सा शुरू होता है रात के करीब 10:30 बजे, जब एक मेहमान होटल में चेक-इन करता है। ठीक आधे घंटे बाद यानी 11 बजे, वही मेहमान गुस्से में रिसेप्शन पर पहुंच जाता है – “भैया, एसी काम नहीं कर रहा, मेरा कमरा ठंडा नहीं हो रहा!”

अब बेचारे रिसेप्शनिस्ट का क्या कसूर? वो खुद ऊपर जाकर एसी चेक करता है – एसी अपनी पूरी ताकत से ठंडी हवा उड़ा रहा था, सेटिंग भी सबसे कम तापमान पर थी। मगर कमरा अभी तक गर्म ही महसूस हो रहा था। रिसेप्शनिस्ट सोच में पड़ जाता है, “आखिर मैं और क्या करूं, क्या मैं शंकर जी का त्रिशूल हूँ कि तुरंत ठंडक फैला दूँ?”

सच बात तो ये है कि होटल के कमरे भी किसी फ्रीज की तरह झटपट नहीं ठंडे हो सकते। ऊपर से अगर दिनभर कमरा बंद रहा हो, गर्मी भरी हो, तो एसी को भी अपना काम करने में वक्त लगता है!

ग्राहक भगवान है...लेकिन भगवान भी फिजिक्स से हार जाता है

अब मेहमान अपनी जिद्द पर अड़ा – “मुझे रिफंड चाहिए, आप कुछ करो!” रिसेप्शनिस्ट ने समझाया – “सर, रिफंड का फैसला तो मैनेजर ही करेंगे, सुबह उनसे बात कीजिए।” मगर साहब का गुस्सा कम नहीं हुआ, बोले – “पैसे मैंने आपको दिए, आप ही हल निकालिए!”

यही नहीं, जैसे लूडो में गोटी बार-बार घर में आकर अटक जाती है, वैसे ही बातचीत गोल-गोल घूमती रही। एक और मेहमान आया, उसने भी एसी की चिंता जताई, पर रिसेप्शनिस्ट ने भरोसा दिलाया – “सर, हमारे एसी सब बढ़िया चल रहे हैं, बस थोड़ा वक्त दीजिए।”

कम्युनिटी के एक सदस्य ने तो मज़ाकिया अंदाज़ में लिखा, “कुछ लोग तो ऐसे हैं, जैसे उन्हें लगता है – बटन दबाओ और कमरा बर्फ़बारी में बदल जाए!” एक और कमेंट में किसी ने कहा, “गुणी आदमी की हद होती है, बेवकूफी की कोई सीमा नहीं!”

होटल की मुश्किलें और भारतीय जुगाड़

भारत में भी गर्मी का हाल क्या है, सब जानते हैं। ऊपर से होटल के कमरे में अगर एसी बंद पड़ा हो, या दिनभर कमरा खाली रहा हो, तो गर्मी ऐसे घर बना लेती है जैसे दादी की रसोई में आम का अचार! कई होटल वाले, बिजली बचाने के लिए, कमरे खाली रहते वक्त एसी या हीटर बंद रखते हैं। लेकिन जब मेहमान आता है, तो उम्मीद करता है कि कमरा पहले से ही 'शिमला' बना हो!

एक अनुभवी कमेंटकर्ता ने सलाह दी – “अगर मेहमान को इतना ही दिक्कत है, तो उसे बिना चार्ज के रद्द करने का ऑप्शन दो, फिर देखो उसका असली मकसद क्या है।” कई बार ऐसा भी होता है कि लोग जानबूझ कर शिकायत करते हैं, ताकि फ्री में रूम मिल जाए या डिस्काउंट झटक लें।

होटल इंडस्ट्री के एक अनुभवी ने लिखा – “कई बार लोग एसी को सबसे कम तापमान पर सेट करते हैं, और उम्मीद करते हैं कि कमरे की खिड़की पर ओस जम जाए!” किसी ने तो यहां तक कह दिया – “इस घर में थर्मोडायनेमिक्स के नियम माने जाते हैं, कोई जादू नहीं चलता!”

आखिरकार – ठंडी हवा, ठंडा दिमाग

कहानी का अंत भी दिलचस्प है। सुबह जब दूसरा रिसेप्शनिस्ट ड्यूटी पर आया, तो पहले वाले ने उसे पूरा मामला समझाया। बाद में जब कमरे में जाकर देखा, तो पूरी रात में एसी ने अपना काम कर ही दिया – कमरा अब एकदम ठंडा और आरामदायक था।

इस पूरे घटनाक्रम से यही सबक मिलता है – चाहे ऑफिस हो, होटल हो या घर, विज्ञान के नियम हर जगह चलते हैं! एसी हो या हीटर, सबको थोड़ा वक्त चाहिए। और हां, रिसेप्शनिस्ट भी इंसान है, जादूगर नहीं!

आपकी राय क्या है?

क्या कभी आपके साथ ऐसा कोई अनुभव हुआ है? होटल, ऑफिस या घर में, जब किसी मशीन से उम्मीदें बढ़ गईं और असलियत ने आपको हैरान कर दिया? अपने अनुभव कमेंट में जरूर शेयर करें। और अगली बार जब होटल जाएं, तो रिसेप्शनिस्ट की मुस्कान को सलाम करना न भूलें – वो भी आपकी तरह इंसान है, भगवान नहीं!


मूल रेडिट पोस्ट: Wherein I, a mere mortal, do not the ability to instantly transfer heat energy